Ayodhya Ram Mandir Pran Pratistha Ceremony Date Pm Narendra Modi Will Address People From Singh Dwar

Ayodhya Ram Mandir Pran Pratistha Ceremony Date Pm Narendra Modi Will Address People From Singh Dwar


Ram Mandir In Ayodhya: अयोध्या में 22 नवंबर को रामलला की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर तैयारियां जोरों पर है. इस बीच इसे लेकर बड़ी खबर सामने आई है. बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर के भव्य अभिषेक समारोह में उपस्थित लोगों को मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार ‘सिंह द्वार’ के सामने से संबोधित करेंगे.

एएनआई ने गुरुवार (28 दिसंबर) को अपने सूत्रों के हवाले से बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘सिंह द्वार’ के सामने से लोगों को संबोधित करेंगे. पीएम मोदी अगले साल 22 जनवरी को भव्य राम मंदिर का उद्घाटन करेंगे और यहां आने वाले मेहमानों को स्वागत करेंगे.

आज बैठक में मूर्ति पर होगी चर्चा

सूत्रों के अनुसार, 22 जनवरी को अभिषेक के लिए लाखों भक्तों के मंदिर शहर में आने की संभावना है. इस बीच अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वाले ट्रस्ट श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की आज (28 दिसंबर) बैठक होने वाली है. बैठक में भगवान राम की मूर्ति पर चर्चा की जाएगी. इसके अलावा 22 जनवरी को मंदिर के प्रतिष्ठा समारोह की तैयारियों पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी. रामलला की मूर्ति के चयन के लिए ट्रस्ट की एक और बैठक होगी.

डिप्टी सीएम ने की स्वच्छता अभियान की शुरुआत

वहीं, गुरुवार को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भव्य आयोजन से पहले मंदिर शहर में स्वच्छता अभियान में भाग लिया. पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “स्वच्छ रहे श्री राम का धाम” के संकल्प के साथ अयोध्या में हमने स्वच्छता अभियान शुरू किया है. सभी मिलकर अयोध्या को स्वच्छ और साफ रखेंगे.”

तीन डिजाइन में से चुनी जाएगी मूर्ति

इससे पहले बुधवार को ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने कहा था कि “भगवान राम की 51 इंच ऊंची मूर्ति, जो पांच साल पुराने राम लला को दर्शाती है, को तीन डिजाइनों में से चुना जाएगा. जिसमें सबसे अच्छी दिव्यता होगी और उसका स्वरूप बच्चों जैसा होगा, उसे चुना जाएगा.” राय ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर के मानचित्र का वर्णन करते हुए कहा कि ”पूरे ढांचे के निर्माण में कुल 21-22 लाख घन फीट पत्थर का उपयोग किया गया है. इतनी बड़ी पत्थर की संरचना पिछले 100-200 वर्षों में भी उत्तर या दक्षिण भारत में कभी नहीं बनाई गई है.”

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