मंगलवार (30 जून) को थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी अपना दो साल का कार्यकाल पूरा कर रिटायर हो गए. जनरल उपेंद्र का कार्यकाल पिछले साल मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और भारतीय सेना में ड्रोन फोर्स की नींव रखने के लिए याद किया जाएगा. अपने समापन संबोधन में भी उन्होंने भविष्य के युद्धों में ड्रोन क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया.
‘ऑपरेशन सिंदूर‘ के दौरान पाकिस्तान ने सियाचिन ग्लेशियर से लेकर जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात के रण ऑफ कच्छ तक करीब 1000 ड्रोन से हमला किया. भारतीय सेना की एंटी-एयरक्राफ्ट गन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम ने इन हमलों को नाकाम कर दिया. इसके बाद सेना ने ड्रोन फोर्स खड़ी करने का संकल्प लिया और अशनी प्लाटून, भैरव बटालियन व दिव्यास्त्र बैटरी जैसी नई इकाइयों की शुरुआत की. कारगिल विजय दिवस के मौके पर जनरल द्विवेदी ने इनकी घोषणा की.
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अशनी प्लाटून की तैयारी
पाकिस्तान के ड्रोन हमलों के बाद सेना ने हर इन्फैंट्री बटालियन में ‘अशनी’ ड्रोन प्लाटून बनाई. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जैसलमेर में इसका उद्घाटन किया. पौराणिक मान्यता में ‘अशनी’ देवराज इंद्र के वज्र का नाम है. इस प्लाटून में 20 सैनिक हैं, जिन्हें एफपीवी, सर्विलांस, स्वार्म ड्रोन और लोएटरिंग म्युनिशन चलाने की ट्रेनिंग दी गई है. भारतीय सेना की करीब 380 इन्फैंट्री बटालियन में ऐसी इकाइयां शामिल की जा रही हैं.
ड्रोन युद्ध की भूमिका
रूस-यूक्रेन युद्ध में एफपीवी ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ. ये ड्रोन निगरानी के साथ हैंड ग्रेनेड ले जाकर नजदीकी लक्ष्य पर हमला कर सकते हैं. वहीं, स्वार्म ड्रोन कई छोटे ड्रोन का झुंड होता है, जो सैनिकों, टैंकों और सैन्य वाहनों पर एक साथ हमला करता है. लोएटरिंग म्युनिशन लक्ष्य तक पहुंचकर खुद को विस्फोट के साथ नष्ट कर देता है और भारी नुकसान पहुंचाता है.
नई ड्रोन यूनिटें तैयार
भारतीय सेना के पास फिलहाल करीब 50 हजार एफपीवी और स्वार्म ड्रोन हैं, हालांकि लंबी दूरी के लोएटरिंग म्युनिशन की जरूरत अभी भी बनी हुई है. सेना ने आर्टिलरी के लिए ‘शक्तिबाण यूनिट’ और टैंक रेजीमेंट के लिए ‘शौर्य स्क्वाड्रन’ तैयार किए हैं. डिवीजन स्तर की ‘भैरव बटालियन’ में हर कमांडो को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया गया है.
‘बाज बटालियन’ पर जोर
सेना का लक्ष्य अगले दो-तीन वर्षों में ड्रोन की संख्या बढ़ाकर एक लाख करना है. इसी उद्देश्य से एफपीवी, स्वार्म ड्रोन, लोएटरिंग म्युनिशन और रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट के बेहतर समन्वय के लिए नई ‘बाज बटालियन’ बनाई जा रही है. यह यूनिट ड्रोन आधारित हमलों की क्षमता बढ़ाएगी. साथ ही भारतीय सेना स्वदेशी कंपनियों के साथ मिलकर दुश्मन के ड्रोन को निष्क्रिय करने वाली नई काउंटर-ड्रोन तकनीक भी विकसित कर रही है.
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