दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 19 दिनों से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का धरना जारी है. इसी मंच पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 11 दिनों से अनशन कर रहे हैं. नीट पेपर लीक मामले को लेकर वह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. लंबे समय से अनशन पर रहने की वजह से उनका वजन काफी कम हो गया है और उनकी तबीयत भी प्रभावित हुई है. बताया जा रहा है कि अब उन्हें चलने-फिरने में भी परेशानी हो रही है.
इस बीच सोशल मीडिया पर कई लोग अभिजीत दीपके की आलोचना कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि जब मंच पर अनशन चल रहा है तो वह खुद भूख हड़ताल में शामिल क्यों नहीं हैं. कुछ लोगों ने ऐसे वीडियो भी शेयर किए हैं जिनमें एक तरफ सोनम वांगचुक अनशन करते दिखाई दे रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ अभिजीत दीपके को ब्रेड पकौड़े और अन्य खाने की चीजों का आनंद लेते हुए दिखाया गया है. इन आरोपों पर अब अभिजीत दीपके ने अपनी सफाई दी है. एक यूट्यूब चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें जानबूझकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने बताया कि जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे हैं, वे उस समय के हैं जब सोनम वांगचुक ने अनशन शुरू नहीं किया था.
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पुराने वीडियो से भ्रमित करने की कोशिश
दीपके ने कहा कि सोनम वांगचुक बाद में धरना स्थल पर पहुंचे थे. उस समय वह यूरोप में आयोजित एक क्लाइमेट समिट में शामिल थे. उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो उसी दौरान के हैं जब आंदोलन चल रहा था, लेकिन सोनम वांगचुक वहां मौजूद नहीं थे. उनके अनुसार पुराने वीडियो को वर्तमान स्थिति से जोड़कर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, अभिजीत दीपके ने यह स्वीकार किया कि आंदोलन की कोर टीम के सदस्य अनशन पर नहीं बैठे हैं. उन्होंने इसकी वजह भी बताई. दीपके के अनुसार, सोनम वांगचुक ने खुद कोर टीम के लोगों से कहा था कि वे भूख हड़ताल में शामिल न हों.
भूख हड़ताल को लेकर सोनम वांगचुक की राय
दीपके ने कहा कि सोनम वांगचुक का मानना था कि आंदोलन को व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए कुछ लोगों का एक्टिव रहना जरूरी है. अगर पूरी कोर टीम अनशन पर बैठ जाती तो धरने का प्रबंधन करना मुश्किल हो जाता. दीपके ने बताया कि रोज बड़ी संख्या में लोग धरना स्थल पर पहुंच रहे हैं और कई प्रशासनिक तथा अन्य व्यवस्थाओं को संभालना पड़ता है. उन्होंने कहा कि कई बार छोटी-छोटी बातों को लेकर पुलिस से बातचीत करनी पड़ती है और आंदोलन से जुड़े अन्य काम भी देखने होते हैं. यही कारण है कि कोर टीम को अनशन से अलग रखा गया है, जबकि सोनम वांगचुक और कुछ छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं. इनमें से कई छात्रों की तबीयत भी बिगड़ने की खबरें सामने आई हैं.
जंतर-मंतर पर खाने-पीने की व्यवस्था
अभिजीत दीपके को लेकर विवाद तब और बढ़ गया जब सोनम वांगचुक का एक बयान सामने आया. वांगचुक ने मंच के सामने बैठे लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि कुछ लोग यहां आकर भरपेट खाना खाते हैं. उन्होंने इस पर दुख जताया था और समर्थकों से कम से कम एक दिन का अनशन करने की अपील की थी. जंतर-मंतर पर चल रहे इस प्रदर्शन के दौरान लोगों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था भी की जा रही है. सुबह और शाम कई तरह के व्यंजन बांटे जा रहे हैं. इसी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और अभिजीत दीपके के वीडियो वायरल होने लगे.



