Explained: मानसून का इंतजार खत्म! 4 दिन बाद दिल्ली और आपके राज्य में इस दिन होगी बारिश, लेकिन अच्छी के साथ बुरी खबर क्या?

Explained: मानसून का इंतजार खत्म! 4 दिन बाद दिल्ली और आपके राज्य में इस दिन होगी बारिश, लेकिन अच्छी के साथ बुरी खबर क्या?


पिछले कई दिनों से दिल्ली-NCR में जिस भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर रखा था, अब उससे राहत मिलने के आसार बन रहे हैं. दक्षिण-पश्चिम मानसून ने इस बार देरी से दस्तक दी थी, लेकिन अब उसकी रफ्तार बढ़ गई है. मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक अगले पांच से छह दिनों में मानसून उत्तर भारत के बड़े हिस्से को कवर करेगा. इसी के साथ राजधानी दिल्ली को भी इस हफ्ते बारिश से बड़ी राहत मिलने के आसार हैं. लेकिन इसमें एक चिंता की बात भी है. जून 2026 देश का पांचवां सबसे सूखा जून साबित होने जा रहा है, जिसमें 43 प्रतिशत से ज्यादा की बारिश की कमी दर्ज की गई है. आइए समझते हैं कि मानसून अब कहां तक पहुंचा है…

देश में मानसून कहां तक पहुंचा?

इस साल मानसून की चाल कुछ सुस्त रही. 4 जून को केरल में दस्तक देने के बाद 8 से 15 जून के बीच यह लगभग रुका रहा. हालांकि 18 जून के बाद इसने फिर से रफतार पकड़ी. अब मौसम विभाग के मुताबिक, अगले दो से तीन दिनों में मानसून उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ इलाकों तक पहुंच सकता है.

इसके बाद अगले दो से तीन दिनों में यह हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और दक्षिण-पूर्व राजस्थान के कुछ हिस्सों को भी कवर कर सकता है. यानी अगले एक हफ्ते के भीतर मानसून उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों में पहुंच जाएगा.

दिल्ली कब पहुंच रही बारिश?

राजधानी फिलहाल गर्मी से जूझ रही है. रविवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 41.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब 4.1 डिग्री ज्यादा है. इससे भी बड़ी बात यह रही कि रविवार सुबह का न्यूनतम तापमान 31.1 डिग्री दर्ज किया गया, जो पिछले दो सालों में सबसे गर्म सुबह थी. आखिरी बार इससे अधिक न्यूनतम तापमान 14 जून 2024 को 33.3 डिग्री दर्ज किया गया था.

गर्मी का असर सिर्फ थर्मामीटर तक सीमित नहीं रहा. उमस की वजह से ‘फील्स-लाइक’ तापमान (हीट इंडेक्स) रविवार शाम को करीब 50.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. मौसम विभाग ने दिल्ली में हीटवेव की चेतावनी जारी की है. स्काइमेट के वाइस प्रेसिडेंट महेश पलावत के मुताबिक, ‘मानसून दिल्ली में 27-28 जून के आसपास पहुंचता है, जिसके बाद तापमान में गिरावट आनी शुरू हो जाती है. इस साल मानसून करीब एक हफ्ते की देरी से आ रहा है.’

स्काइमेट के मुताबिक, अगर हालात अनुकूल रहे तो मानसून 4 जुलाई तक दिल्ली पहुंच सकता है.

एक और अहम बात: 2 जुलाई से वेस्टर्न डिस्टर्बेंस उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करेगा, जिसका असर दिल्ली के मौसम पर भी पड़ेगा. फिलहाल दिल्ली में जो बारिश के आसार बन रहे हैं, वे इसी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और स्थानीय मौसमी परिस्थितियों की वजह से हैं. मानसून के लगातार आगे बढ़ने से आने वाले दिनों में हालात और बेहतर हो सकते हैं.

जून में बारिश सामान्य से कितनी कम रही?

मानसून की रफ्तार भले अब बढ़ी हो, लेकिन जून का आंकड़ा चिंता बढ़ाने वाला है. 1 जून से 27 जून के बीच देश में 43% बारिश की कमी दर्ज की गई. 24 जून तक के डेटा के मुताबिक यह कमी 42% थी. यानी देश में सामान्य से लगभग आधी बारिश हुई है.

यह जून 2026 को 1901 के बाद का पांचवां सबसे सूखा जून बना रहा है. पिछले 124 सालों में जून का महीना 100 मिमी से कम बारिश वाला सिर्फ चार बार 1905, 1926, 2009 और 2014 में रहा है. इस साल 29 जून तक   महज 85.2 मिमी बारिश दर्ज हुई है.

किन राज्यों में सबसे ज्यादा कमी और क्यों?

देश के लगभग सभी हिस्सों में बारिश की कमी दर्ज की गई है:

  • मेघालय: 82% की कमी
  • गुजरात: 79% की कमी
  • मणिपुर: 71% की कमी
  • छत्तीसगढ़: 68% की कमी
  • झारखंड: 66% की कमी
  • महाराष्ट्र: 59% की कमी
  • उत्तर प्रदेश: 56% की कमी
  • ओडिशा: 52% की कमी
  • बिहार: 50% की कमी

मध्य भारत में सबसे ज्यादा 57% की कमी दर्ज की गई, जबकि पूर्वोत्तर में 44%, दक्षिण प्रायद्वीप में 30% और उत्तर-पश्चिम में 27% की कमी रही. मौसम विभाग ने इसकी 6 बड़ी वजहें बताई हैं:

  • मानसूनी हवाएं कमजोर रहीं: महीने के ज्यादा दिनों में मानसूनी हवाएं काफी कमजोर रहीं.
  • मानसून की रफ्तार पर ब्रेक: 8 से 15 जून के बीच मानसून लगभग ठहर गया था.
  • मेडेन जूलियन ओस्किलेशन (MJO) अनुकूल नहीं: बारिश लाने वाला यह क्लाउड सिस्टम मेडेन जूलियन ओस्किलेशन (MJO)अनुकूल चरण में नहीं था.
  • सूखी उत्तरी हवाएं: उत्तर से आने वाली शुष्क हवाओं ने कमजोर मानसूनी हवाओं को आगे बढ़ने नहीं दिया.
  • साइक्लोन और लो प्रेशर सिस्टम की कमी: मई और जून में उत्तरी हिंद महासागर में कोई साइक्लोन या लो प्रेशर सिस्टम नहीं बना, जो आमतौर पर मानसून को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं.
  • अल नीनो का असर: इस साल अल नीनो एक्टिव है, जो भारतीय मानसून को कमजोर करने के लिए जाना जाता है. IMD ने पहले ही इस मानसून सीजन के लिए ‘सामान्य से कम’ बारिश (90%) का अनुमान जताया था, जिसके 60% संभावना के साथ ‘अपर्याप्त’ (10% से ज्यादा की कमी) होने की आशंका है.

क्या आने वाले दिनों में अच्छी उम्मीद करें?

मौसम विभाग के मुताबिक, 2 जुलाई से एक नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करेगा. इसका असर दिल्ली समेत आसपास के राज्यों पर पड़ेगा और बारिश की संभावना बढ़ जाएगी. हालांकि, दिल्ली में मानसून पहुंचने की कोई पक्की तारीख नहीं दी गई है.

स्काइमेट के मुताबिक, 4 जुलाई तक मानसून आने की उम्मीद है. स्काइमेट के महेश पलावत बताते हैं, ‘पाकिस्तान से आने वाली शुष्क पछुआ हवाएं तापमान को ऊंचा रख रही हैं, जबकि अरब सागर से आने वाली नम हवाएं भी दिल्ली तक पहुंच रही हैं और उमस बढ़ा रही हैं.’ जब ये शुष्क और नम हवाएं आपस में टकराती हैं, तो बादल तो बनते हैं, लेकिन भारी बारिश के लिए जरूरी नमी नहीं होती है.’