तमिलनाडु की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है. द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) प्रमुख एम.के. स्टालिन ने रविवार (28 जून ) को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि यह सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी.
चेन्नई में आयोजित डीएमके के एक कार्यक्रम में, जहां विभिन्न राजनीतिक दलों के 5,000 से अधिक नेता और कार्यकर्ता पार्टी में शामिल हुए, स्टालिन ने कहा कि सत्तारूढ़ टीवीके अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं कर सकी है. स्टालिन ने कहा कि यह सरकार उन दलों के समर्थन से चल रही है, जो कुछ समय पहले तक डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थे। स्टालिन ने कहा, ‘जमीनी हकीकत को देखिए। मौजूदा सत्तारूढ़ दल अपने दम पर स्थिर सरकार बनाने के लिए बहुमत नहीं जीत सका.’
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सरकार गिरने का दावा
स्टालिन ने दावा किया कि टीवीके सरकार केवल उन दलों के रणनीतिक समर्थन के कारण चल रही है, जो पहले डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस का हिस्सा थे. स्टालिन ने कहा, ‘हमारे प्रगतिशील गठबंधन का हिस्सा रहे कुछ दलों के रणनीतिक समर्थन की वजह से ही टीवीके की यह गाड़ी किसी तरह चल रही है.’ डीएमके प्रमुख ने आगे कहा कि यह सरकार कमजोर स्थिति में है और अगले तीन से छह महीने के भीतर गिर सकती है. स्टालिन ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अभी से चुनाव की तैयारी शुरू करने की अपील की.
चुनाव की तैयारी
स्टालिन ने कहा, ‘यह एक कमजोर व्यवस्था है. हमें नहीं पता कि किस मोड़ पर यह गाड़ी अपना संतुलन खो दे और अचानक रुक जाए, इसलिए मैं कह रहा हूं कि चुनाव कभी भी हो सकते हैं. यह तीन महीने में भी हो सकता है और छह महीने में भी. हम पांच साल का इंतजार नहीं कर सकते.’ स्टालिन ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा, ‘हमें हर राजनीतिक परिस्थिति के लिए 100 प्रतिशत तैयार रहना होगा. इसी समय से पार्टी की जीत के लिए पूरी ईमानदारी से काम करना शुरू कर दीजिए.’
बदले सियासी समीकरण
स्टालिन का यह बयान ऐसे समय आया है, जब तमिलनाडु की राजनीति में समीकरण तेजी से बदल रहे हैं. 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में टीवीके बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई थी. इसके बाद कांग्रेस, वामपंथी दलों, वीसीके और आईयूएमएल के समर्थन से उसने सरकार बनाई. ये सभी दल चुनाव से पहले डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थे, लेकिन बाद में उन्होंने विजय को समर्थन दे दिया. इस बीच शनिवार को वाइको के नेतृत्व वाली एमडीएमके ने भी डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस से अलग होने का ऐलान किया और सत्तारूढ़ टीवीके सरकार को समर्थन देने की घोषणा कर दी.
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