पायलट लेट, AC बंद.. दिल्ली से पटना फ्लाइट में उड़ान से पहले हंगामा, एयर इंडिया एक्सप्रेस की बड़ी लापरवाही

पायलट लेट, AC बंद.. दिल्ली से पटना फ्लाइट में उड़ान से पहले हंगामा, एयर इंडिया एक्सप्रेस की बड़ी लापरवाही


दिल्ली से पटना जा रही फ्लाइट में उस समय हंगामे की स्थिति हो गई, जब एयर इंडिया एक्सप्रेस यात्रियों को प्लेन में बैठाकर भूल गई. इस दौरान पायलट भी देरी से पहुंचा, और बोर्डिंग के बाद यात्रियों को 1.5 घंटे अंदर ही कैद रखा. 

दिल्ली से पटना जा रही Air India Express की फ्लाइट IX 1197 ने यात्रियों को उड़ान से पहले ही थका दिया. शाम 7:05 बजे की निर्धारित उड़ान के लिए बोर्डिंग पूरी करवा दी गई लेकिन इसके बाद जो हुआ  उसने यात्रियों का गुस्सा बढ़ा दिया. करीब 1 से 1.5 घंटे तक यात्रियों को विमान के अंदर ही बैठाकर रखा गया. बिना किसी स्पष्ट जानकारी के AC बंद, गर्मी से बेहाल यात्री—बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थी. 

स्थिति और खराब तब हुई जब विमान के अंदर एयर कंडीशनिंग तक चालू नहीं थी. जून की गर्मी में बंद विमान के अंदर बैठे यात्रियों के लिए यह हालात किसी टॉर्चर से कम नहीं थे. बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सभी परेशान दिखे. काफी देर बाद जाकर AC चालू किया गया लेकिन तब तक यात्रियों का सब्र जवाब दे चुका था. जब इस देरी पर एयरलाइन से सवाल पूछा गया तो जवाब आया – रनवे गीला था – wet runway और पायलट कागजी प्रक्रिया  में व्यस्त थे.

पहली बार नहीं हो रही ऐसी घटनाएं

एविएशन सेक्टर की सच्चाई – सिस्टम में दरारें साफ दिख रही हैं. इस तरह की घटनाएं कोई पहली बार नहीं हो रही हैं लेकिन हर बार यही पैटर्न सामने आता है – यात्री परेशान, एयरलाइन का अस्पष्ट जवाब और सिस्टम की खामियां उजागर. एविएशन इंडस्ट्री जो समय और प्रोफेशनलिज़्म पर चलती है वहां इस तरह की लापरवाही गंभीर सवाल खड़े करती है. क्या यात्रियों का समय और सुविधा अब मायने नहीं रखती? क्या ऑपरेशनल खामियों का बोझ हमेशा यात्रियों को ही उठाना पड़ेगा? जवाबदेही का अभाव – सिर्फ सॉरी. से काम नहीं चलेगा. ग्राउंड पर सवाल पूछने पर यात्रियों को अक्सर झूठी सांत्वना ही मिलती है. न कोई स्पष्ट जवाब, न कोई ठोस कार्रवाई.  ऐसे में ज़रूरत है सख्त जवाबदेही की जहां एयरलाइंस सिर्फ माफी न मांगे बल्कि सिस्टम सुधारें और यात्रियों को सम्मान के साथ ट्रीट करें. यह घटना सिर्फ एक फ्लाइट की देरी नहीं है ! यह उस सिस्टम की तस्वीर है जहां यात्रियों को कस्टमर नहीं बल्कि मैनेज करने वाला लोड समझा जा रहा है.