Know These 5 Giant Killers Who Defeated Contenders For Chief Minister And Current CM Election 2023 ABPP

Know These 5 Giant Killers Who Defeated Contenders For Chief Minister And Current CM Election 2023 ABPP


इतना भी गुमान ना कर अपनी जीत पर ऐ बेखबर, तेरी जीत से ज्यादा चर्चे मेरी हार के हैं… मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का यह शायराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. दतिया सीट पर कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने मिश्रा को चुनाव हरा दिया है. मिश्रा मुख्यमंत्री पद के भी प्रबल दावेदार थे. 

चर्चा केसीआर और रेवंत रेड्डी को हराने वाले केवीआर रेड्डी की भी हो रही है. केवीआर ने तेलंगाना के कामारेड्डी सीट से केसीआर और रेवंत को हराया है. केसीआर तेलंगाना के मुख्यमंत्री थे, जबकि रेवंत मुख्यमंत्री पद के दावेदार. 

मिजोरम के आइजोल ईस्ट-1 सीट पर लथनसांगा ने कद्दावर नेता और राज्य के मुख्यमंत्री जोरमथांगा को हरा दिया है. 79 साल के जोरमथांगा का यह आखिरी चुनाव माना जा रहा था. वे मिजो नेशनल फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं.

दिलचस्प बात है कि पांच राज्यों के चुनाव में 5 बड़े नेताओं को धूल चटाने वाले अधिकांश विधायक पहली बार चुनकर सदन पहुंचे हैं. आइए इस स्टोरी में इन्हीं 5 जॉइंट किलर के बारे में विस्तार से जानते हैं…

1. प्रशांत शर्मा ने सतीश पूनिया को हराया(*5*)
जयपुर के आमेर सीट पर बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां मैदान में थे. पूनियां मुख्यमंत्री पद के भी मजबूत दावेदार थे, लेकिन कांग्रेस के प्रशांत शर्मा ने उन्हें पटखनी दे दी. कांग्रेस यह सीट 2013 से ही हा रही थी. 

प्रशांत शर्मा पहली बार जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं. प्रशांत 2018 में भी चुनाव लड़े थे, लेकिन पूनियां ने उन्हें हरा दिया था. 

प्रशांत को राजनीतिक विरासत में मिली है. उनके पिता सहदेव शर्मा इस सीट से 3 बार विधायक रह चुके हैं और वे जयपुर कांग्रेस के कद्दावर नेता थे. पिछली बार हार के बाद से ही प्रशांत इस क्षेत्र में सक्रिय थे. 

चुनाव में हार के बाद सतीश पूनियां ने आमेर से अब कभी चुनाव नहीं लड़ने की बात कही है. पूनियां ने लिखा कि मैं अब आमेर की सेवा नहीं कर पाऊंगा. मैं हाईकमान से गुजारिश कर दूंगा कि इस सीट पर किसी योग्य व्यक्ति को भेजा जाए.

2 . ईश्वर साहू ने रवींद्र चौबे को पटखनी दी(*5*)
भूपेश बघेल सरकार में कद्दावर मंत्री रहे रवींद्र चौबे को छत्तसीगढ़ के साजा सीट से बीजेपी के ईश्वर साहू ने चुनाव हरा दिया. ईश्वर साहू का यह पहला चुनाव था, जबकि चौबे 7 बार से विधायक बन रहे थे. 

चौबे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं. बात ईश्वर साहू की करें तो साहू का कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है. साहू को टिकट बीजेपी ने उनके बेटे भुवनेश्वर को न्याय दिलाने के लिए दिया था. 

अप्रैल 2023 में कवर्धा के एक सांप्रदायिक हिंसा में भुवनेश्वर की मौत हो गई थी. इस हिंसा को लेकर बीजेपी ने भूपेश सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया. 

ईश्वर के लिए खुद गृहमंत्री अमित शाह ने कैंपेन किया था. शाह ने ईश्वर को जिताने और उनके बेटे को न्याय दिलाने की अपील साजा के लोगों से की थी. 

3. चौथे प्रयास में भारती ने उखाड़ा नरोत्तम का तंबू(*5*)
मध्य प्रदेश के दतिया सीट से शिवराज कैबिनेट के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा चुनाव हार गए हैं. मिश्रा को कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने चुनाव हराया है. भारती इससे पहले भी 3 बार मिश्रा के खिलाफ चुनाव लड़ चुके थे, लेकिन उन्हें हार का ही सामना करना पड़ रहा था. 

नरोत्तम मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे और 2020 में उन्होंने बीजेपी की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. 

दतिया सीट पर कांग्रेस ने इसबार मजबूत किलेबंदी की थी. पार्टी ने शुरू में भारती का टिकट काट दिया, लेकिन जैसे ही सभी कार्यकर्ता एकजुट हुए, पार्टी ने टिकट बदलकर भारती को मैदान में उतार दिया.

एलएलबी तक की पढ़ाई कर चुके भारती ने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1980 के दशक में की थी. 1985 उन्होंने सबसे कम उम्र में विधायक बनने का रिकॉर्ड बनाया था. 

4. केवीआर ने केसीआर और रेवंत को दी पटखनी(*5*)
तेलंगाना चुनाव में भारतीय जनता पार्टी 8 सीटों पर सिमट गई है, लेकिन उसके कामारेड्डी से जीते विधायक केवीआर रेड्डी की चर्चा खूब हो रही है. केवीआर का पूरा नाम है- कटिपल्ली, वेकेंटा रमना रेड्डी. 

केवीआर ने इस सीट पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर और कांग्रेस अध्यक्ष रेवंत रेड्डी को हराया है.रेवंत रेड्डी मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं. 

चुनाव आयोग के मुताबिक कामारेड्डी सीट पर केवीआर को 66652, केसीआर को 59911 और रेवंत रेड्डी को 54916 वोट मिले हैं. केवीआर को यहां पर 6741 वोटों से जीत हासिल की है. 

केवीआर ने अपनी करियर की शुरुआत निकाय राजनीति से की थी. 12वीं पास केवीआर निजामाबाद निगम के सदस्य रह चुके हैं. केसीआर सरकार ने जब कामारेड्डी को स्मार्ट बनाने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया, तो केवीआर के नेतृत्व में इस इलाके के किसानों ने बड़ा आंदोलन किया. 

केवीआर 2018 में भी इस सीट से मैदान में उतरे थे, लेकिन उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा था. इस चुनाव में केवीआर के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने कैंपेन किया था. 

5. ललथनसांगा ने जोरमथांगा को हराया(*5*)
मिजोरम के आइजोल ईस्ट-1 सीट से मुख्यमंत्री जोरमथांगा चुनाव लड़ रहे थे. यह सीट उनका गढ़ माना जाता था, लेकिन जेपीएम के ललथनसांगा ने उन्हें चुनाव हरा दिया. 

मुख्यमंत्री को चुनाव हराने के बाद ललथनसांगा ने पत्रकारों से कहा कि जनता मुख्यमंत्री से नाराज थे और जीत का यही सबसे बड़ा कारण रहा. 

जोरमथंगा मिजोरम के कद्दावर नेता हैं और 1990 से मिजो नेशनल फ्रंट के अध्यक्ष पद पर काबिज हैं. जोरमथांगा मिजोरम के 15 साल मुख्यमंत्री भी रहे हैं. 

बात ललथनसांगा की करें तो वे 2008 में विधायक चुने गए थे. इसके बाद से ही राजनीति में साइडलाइन चल रहे थे. जोरमथांगा को हराने के बाद पार्टी के भीतर उनका कद बढ़ गया है. 

जायंट किलर का मतलब क्या होता है?(*5*)

1970 के आसपास यह शब्द भारत की राजनीतिक हलकों में पहली बार गूंजा था. 1967 में समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडीस ने मुंबई दक्षिण सीट से दिग्गज कांग्रेस नेता एसके पाटील को चुनाव हराया था. पाटील उस वक्त रेल मंत्री थे और जॉर्ज रेल यूनियन के सदस्य.

इस हार के बाद पाटील का राजनीतिक उदय नहीं हो पाया. 1977 में राजनारायण ने इंदिरा गांधी को चुनाव हराया, तब भी यह शब्द सियासी गलियारों में खूब गूंजा. राजनीतिक गलियारों में जायंट किलर का मतलब होता है- वो नेता, जिसकी वजह से कोई नेता चुनाव हारा है और उसका राजनीतिक करियर संकट में पड़ गया है.