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कौन हैं प्रह्लाद जोशी, जिन्हें धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सौंपी गई शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी?

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  • जोशी उपभोक्ता, खाद्य एवं नवीन ऊर्जा मंत्रालय भी संभालते हैं।

नीट परीक्षा पेपर लीक और कई छात्रों की आत्महत्या को लेकर छात्रों और युवाओं के भारी विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार (25 जुलाई, 2026) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने तत्काल प्रभाव से अपना पद छोड़ते हुए पीएम मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पीएम मोदी की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को स्वीकार भी कर लिया है.

इसके साथ ही, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर केंद्रीय कैबिनेट में शामिल मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया है. प्रह्लाद जोशी वर्तमान में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री हैं. इसके साथ ही, वे नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा विभाग यानी न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी विभाग के भी केंद्रीय मंत्री हैं और अब पीएम मोदी ने उन्हें अपनी सरकार में शिक्षा मंत्रालय की भी जिम्मेदारी सौंप दी है.

लंबे राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव वाले प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिन्होंने संगठन से लेकर केंद्र सरकार तक कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे मोदी सरकार में अब तक कई अहम मंत्रालयों का कमान संभाल चुके हैं.

कौन हैं प्रह्लाद जोशी, जिन्हें पीएम मोदी ने सौंपा बड़ा जिम्मा?

प्रह्लाद जोशी का जन्म कर्नाटक के विजयपुरा में 27 नवंबर, 1962 को एक साधारण परिवार में हुआ था. एक सामान्य घर में पले-बढ़े प्रह्लाद जोशी अपने छात्र जीवन से ही सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहे और सामाजिक मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करते रहे. जनहित के मुद्दों पर प्रह्लाद की रूचि बचपन से बनी हुई है. उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद कर्नाटक यूनिवर्सिटी के धारवाड़ से संबद्ध केएस आर्ट्स कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की है. वहीं, अपनी ग्रैजुएशन की पढ़ाई के दौरान भी जोशी ने सामाजिक और सार्वजनिक मुद्दों को लेकर काफी सक्रिय भूमिका निभाई है.

संगठन से लेकर सरकार तक संभाली अहम जिम्मेदारियां

प्रह्लाद जोशी ने साल 1995 से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की. उन्होंने साल 1995 से 1998 तक कर्नाटक के धारवाड़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जिलाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद 1998 से 2003 तक वे में धारवाड़ भाजपा के जिला महासचिव की भूमिका में रहे. इसके बाद प्रह्लाद जोशी ने धारवाड़ से भाजपा की टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा, जिसमें वे कांग्रेस उम्मीदवार बीएस पाटिल को पछाड़कर पहली बार लोकसभा के पटल पर पहुंचे. उन्होंने लगातार पांच बार धारवाड़ संसदीय सीट से चुनाव जीता है.

मोदी सरकार में संभाली कई मंत्रालयों की कमान

हालांकि, साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार दूसरी बार सरकार बनने के बाद 30 मई, 2019 को प्रह्लाद जोशी को पहली बार कैबिनेट में जगह मिली और उन्हें संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई. वे मोदी सरकार में कोयला मंत्री भी रहे और इसके बाद वर्तमान में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में प्रह्लाद जोशी उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है. 

यह भी पढ़ेंः पीएम मोदी ने स्वीकार किया धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, पेपर लीक पर प्रदर्शन के बीच बड़ा एक्शन

Gen Z को लेकर इस राज्य के CM का बड़ा ऐलान, चुनाव लड़ने की उम्र घटाने का प्रस्ताव लाएगी सरकार

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तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने शनिवार को घोषणा की कि अगस्त के पहले हफ़्ते में राज्य विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया जाएगा. इस सत्र में एक प्रस्ताव पास किया जाएगा, जिसमें मांग की जाएगी कि विधानसभा और संसद का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम उम्र घटाकर 21 साल कर दी जाए. 

यह घोषणा उन्होंने उन युवा प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए की जो NEET-UG 2026 परीक्षा विवाद को लेकर जवाबदेही की मांग कर रहे थे, इस विवाद के कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था.

25 से घटाकर 21 साल उम्र करने की मांग

CM ने घोषणा की कि विधानसभा प्रस्ताव में राज्य विधानसभाओं और संसद दोनों के लिए चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 25 से घटाकर 21 साल करने की मांग की जाएगी. उन्होंने तर्क दिया कि जो युवा 21 साल की उम्र में IAS, IPS और IFS अधिकारी बन सकते हैं, उन्हें MLA और MP बनने के लिए भी योग्य होना चाहिए.

रेवंत रेड्डी ने जर्मनी-सिंगापुर का दिय उदाहरण

जर्मनी, ग्रेट ब्रिटेन और सिंगापुर का उदाहरण देते हुए, जहां 18-21 साल के युवा देश के प्रमुख बन सकते हैं, रेवंत रेड्डी ने सवाल किया कि भारत उसी रास्ते पर क्यों नहीं चल सकता. उन्होंने कहा कि भविष्य में जब राहुल गांधी के नेतृत्व में सरकार बनेगी, तो वे शिक्षा सहित अहम मंत्रालयों में युवाओं की भागीदारी पक्की करेंगे.

मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि युवाओं को अपनी आवाज दुनिया तक पहुंचाने के लिए सड़कों से संसद तक पहुंचना होगा और उन्होंने ‘इंडिया अलायंस’ के नेताओं और सभी राजनीतिक दलों के साथ इस पर चर्चा करने का वादा किया.

‘शिक्षा मंत्री का इस्तीफा आंदोलन की जीत’

छात्र प्रदर्शनकारियों की एक सभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हालांकि शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा युवा आंदोलन की जीत थी, लेकिन लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान लाखों छात्रों के ख़िलाफ़ दर्ज मामले वापस नहीं लिए गए हैं, और परीक्षा के तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को न तो कोई मुआवजा मिला है और न ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का मौका.

रेवंत रेड्डी ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी, के.सी. वेणुगोपाल और संसद में तेलंगाना के सभी चुने हुए प्रतिनिधियों से अपील की है कि वे आने वाले सत्र में इन मुद्दों को मज़बूती से उठाएं. उन्होंने मांग की कि छात्र प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ सभी मामले वापस लिए जाएं और NEET विवाद के दौरान अपने बच्चों को खोने वाले परिवारों को उचित मुआवज़ा दिया जाए.

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर, जानें किसे मिली शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी?

‘युवा एकजुट हों…’, पेपर लीक के बाद अब CJP ने लपका ये मुद्दा! GEN-Z को बताया अगला टारगेट

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केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शनिवार (25 जुलाई 2026) को धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है. जोशी को उनके उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है. इस बीच कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) ने ऐलान किया है उनका आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा वो अब देश के अलग हिस्सों में जाएंगे और युवाओं की समस्या का हल निकालेंगे. सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि अगर देश के युवा एकजुट हो जाएं तो सरकार को झुकना पड़ता है.

अब इस मुद्दे को लेकर देशभर जाएगी CJP

कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) ने कहा, ‘ये तो बस ट्रेलर है… पिक्चर अभी बाकी है. देश के युवा जग चुके हैं. देश के युवा इस देश में जितनी समस्याएं हैं उनको हल करेंगे. हम इस मूवमेंट के सदस्य के तौर पर ये कहना चाहते हैं कि ये खत्म नहीं हो रहा है. अब हम देशभर में जाएंगे और युवाओं की बात सुनेंगे, युवाओं के लिए जो बेस्ट पॉलिसी होगी उसको लाएंगे और सब लोगों से जवाबदेही मांगते रहेंगे. अभी तो बस शुरू हुआ आगे बहुत कुछ करना है.’

उन्होंने कहा, ‘ये सरकार अड़ी हुई थी. उनका ईगो बड़ा था कि हमलोगों में इस्तीफा नहीं होता. ये सरकार भूल गई थी कि युवा अगर एकजुट हो जाए तो फिर कोई ऐसी ताकत नहीं है जो उनके सामने नहीं झुकेगी.’ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सीजेपी ने नीट विवाद को लेकर अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की. 

इन मुद्दों पर तैयार हुई सरकार

बैठक के बाद जेपी नड्डा ने सीजेपी प्रतिनिधियों के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकार नीट रद्द होने के बाद ‘आत्महत्या’ करने वाले छात्रों के परिवारों को नियमों के तहत सम्मानजनक मुआवजा देगी. उन्होंने कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी वापस लेना भी सुनिश्चित करेगी. सौरव दास ने कहा, ‘चूंकि, सरकार ने हमारी सभी मांगें मान ली हैं, इसलिए हम तत्काल प्रभाव से अपना विरोध-प्रदर्शन समाप्त कर रहे हैं. हम सभी प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक घर लौटने की अपील करते हैं.’



Shagufta Ali reveals worst phase of life suffering from breast cancer did not tell so nobody will give work to her

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Shagufta Ali Cancer: बॉलीवुड अभिनेत्री शगुफ्ता अली हर किसी के जेहर में एक जाना पहचाना चेहरा हैं। शगुफ्ता अली ने हाल ही में अपनी लाइफ के सबसे मुश्किल दौर के बारे में बात कर हर किसी को अंदर तक हिला दिया है। शगुफ्ता अली ने बताया है कि कैसे स्टेज 3 ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जंग लड़ने के साथ साथ उन्होंने बीमार पिता का भी साथ साथ इलाज कराया जिसमें उनकी सारी की सारी सेविंग्स खत्म हो गई थी, लेकिन इतने पर भी उन्होंने हार नहीं मानी।

Shagufta Ali Cancer

शगुफ्ता ने बताया कि वो एक से एक पैसे के लिए मोहताज हो गई थीं फिर उन्होंने बिना किसी के मदद के अपनी सारी जिम्मेदारियां निभाईं। इसके साथ ही शगुफ्ता ने इस बात से पर्दा उठाया कि आखिर उन्होंने क्या अभी तक ब्रेस्ट कैंसर की बात छुपा कर रखी थी।

सिद्धार्थ कन्नन को दिए इंटरव्यू में शगुफ्ता अली ने बताया कि जब उन्हें स्टेज 3 ब्रेस्ट कैंसर का पता चला, तो उन्होंने इसे सभी से छुपा कर क्यों रखा? जब शगुफ्ता से पूछा गया कि उन्होंने अपनी इस बीमारी के बारे में किसी को क्यों नहीं बताया, तो उन्होंने कहा, ‘उस जमाने में इस चीज को लेकर यही कहा जाता था कि नहीं, नहीं, बिल्कुल नहीं बताना। एकदम चुप रहो, बात मत करो। वरना काम मिलना बंद हो जाएगा। डरा दिया गया कि काम नहीं मिलेगा। इंडस्ट्री के लोग ऐसा बर्ताव करने लगते हैं, इसलिए मैंने किसी से कुछ नहीं बताया।’

इसके बाद आए मुश्किल दिनों के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि गुजर-बसर करने के लिए उन्हें अपने गहने और कार तक बेचनी पड़ी, हालांकि उन्होंने अपना घर नहीं बिकने दिया। आज भी वह अपने काम और अस्पताल आने-जाने के लिए ऑटो-रिक्शा से सफर करने में बिल्कुल नहीं हिचकिचातीं।

अपनी सेविंग्स पर शगुफ्ता ने कहा, ‘2017 के बाद जब मेरी दिक्कतें बढ़ीं, तो लोग मुझसे पूछने लगे- क्या तुम्हारे पास कोई सेविंग्स नहीं थीं? अरे, बिल्कुल थीं। मेरे पास अच्छी-खासी बचत थी और इतने सालों तक मैंने उसी से अपना घर चलाया। लेकिन मैं कोई अंबानी, टाटा या अडानी तो हूं नहीं कि मेरा पैसा कभी खत्म ही न हो।

उन्होंने आगे कहा, ‘एक टीवी एक्टर के पास भला कितनी सेविंग्स हो सकती हैं? मैं अपने घर में अकेली कमाने वाली थी। उसी बचत से बीमारियां झेलीं, रोज के खर्चे चलाए, राशन खरीदा और परिवार की देखभाल की।’

शगुफ्ता अली ने बताया कि उन्हें सबसे ज्यादा तकलीफ इस बात से हुई कि लोग उनकी बचत को लेकर सवाल क्यों उठा रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना पैसा नाइट क्लब्स, शराब पीने, अय्याशी या पार्टियों में नहीं उड़ाया। अस्पताल के भारी-भरकम बिलों में उनका सारा पैसा खर्च हो गया और उन्हें इस बात से चिढ़ होती थी कि लोग उनसे उनके पैसों का हिसाब मांगते थे।

‘वो ये समझें कि देश का युवा…’, प्रह्लाद जोशी के नए शिक्षा मंत्री बनने पर CJP ने दिया ये रिएक्शन

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  • CJP प्रवक्ता ने कहा, वे एक माह में मंत्री से मिलेंगे।

नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार (25 जुलाई, 2026) को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है, जिस पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का रिएक्शन सामने आया है.

नए शिक्षा मंत्री को लेकर बोले सौरव दास

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने पर कहा, ‘सरकार से जो हमारी प्रमुख मांगें थीं और जो हमारी चिंताएं थीं, उसे सरकार ने मान लिया है. ये मांगें पूरे देश के युवाओं की आवाज बन गई थीं, इसलिए इस आंदोलन को पूरे देश से समर्थन हासिल हुआ और अब जो भी नए शिक्षा मंत्री बनेंगे, उन्हें यह पता है कि देश का युवा उन्हें देख रहा है. देश का युवा समय आने पर उनसे जवाबदेही की भी मांग करेगा.’ 

उन्होंने कहा, ‘जो नए शिक्षा मंत्री होंगे, उनसे यह कहना है कि वे अच्छा काम करें, युवाओं के हित में काम करें. पेपर लीक पर पूरी तरह से रोक लगाएं और हमारे डिमांड चार्टर में जो पांच सुझाव थे, उन्हें लागू करें.’

एक महीने में नए शिक्षा मंत्री से मिलेंगे- सौरव दास

सौरव दास ने आगे कहा, ‘हम बहुत जल्द ही नए शिक्षा मंत्री से मुलाकात करेंगे. सरकार ने हमसे वादा किया है कि एक महीने के भीतर हम फिर से मिलेंगे. इसके बाद देखते हैं आगे क्या होता है.’

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफे के बाद सीजेपी के बीच खुशी की लहर

केंद्र सरकार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन के बीच जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफे की घोषणा हुई, वैसे ही जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के समर्थकों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई. सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफे की बात सुनकर मंच पर ही घुटनों के बल बैठ गए और स्टेज पर अपने हाथों को जोर-जोर से पटककर खुशी जाहिर करने लगे. 

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29 साल पहले जिस पेपर लीक ने बनाया धर्मेंद्र प्रधान को नेता, आज उसी मुद्दे ने छीन ली उनकी कुर्सी!

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57 साल उम्र के शिक्षामंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार इस्तीफा दे दिया है. कभी युवा जोश में इसी पेपर लीक को हथियार बनाकर उन्होंने दक्षिणपंथ की सियासत में कदम रखा. देश के केंद्रीय नेतृत्व का हिस्सा बने. लेकिन एक पेपर लीक और 50 दिन तक चले प्रदर्शन ने उन्हें कुर्सी से त्यागपत्र देने को आखिरकार मजबूर कर दिया.

देश में लंबे अर्से बाद शिक्षा को लेकर आंदोलन चल रहा था. प्रधान ने कहा, ‘राष्ट्रपविरोधी ताकतों को भ्रम फैलाने और स्थिति का फायदा उठाने से रोकने के लिए पद छोड़ने का फैसला किया है.’

जिस मुद्दे ने बनाया नेता, उसी ने छिनी कुर्सी

पिछले कुछ सालों में बीजेपी सरकार के भरोसेमंद केंद्रीय मंत्री बनकर उभरे प्रधान की पहचान कुशल आयोजक, एक मंत्री और एक राजनीतिक प्रबंधक के तौर पर भी है. वह उन गिने चुने ओडिशा के लोगों में हैं, जिन्होंने राजनीति के राष्ट्रीय फलक पर अपनी छाप छोड़ी. लेकिन नियति का खेल देखो, जिस शिक्षा को लेकर उन्होंने 29 साल पहले राजनीतिक मुद्दा बनाया था, वही मुद्दा उनके पद ले गया. 

पेपर लीक के एक आंदोलन से राजनीतिक करियर की शुरुआत

पेपर लीक के एक आंदोलन से उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत हुई. साल 1997 था. प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी. इसके मुख्यमंत्री वल्लभ पटनायक थे. पूरे राज्य में पेपर लीक का मामला गरमाया था. उस समय प्रधान एबीवीपी के राष्ट्रीय सचिव और उत्कल यूनिवर्सिटी से एंथ्रोपोलॉजी की पढ़ाई कर रहे थे. 28 साल के धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में 1500 स्टूडेंट ने भुवनेश्वर के राज्य सचिवालय का घेराव किया. इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता से लाठियां चलाई. इसमें प्रधान गंभीर रूप से घायल हो गए. उनके शरीर की हड्डियां टूटी. आज भी कहा जाता है कि अपनी किस्मत की वजह से ही प्रधान आज जिंदा हैं. 

प्रधान दो बार ABVP के राष्ट्रीय सचिव भी रहे

18 साल के उम्र में एक छात्र के तौर पर उन्होंने रानजीति में कदम रखा. प्रधान ने आरएसएस के स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ABVP में एक सक्रिय आयोजक के रूप में पहचान बनाई.1994 से 1997 के बीच दो बार एबीवीपी के राष्ट्रीय सचिव भी रहे. 

1997 में ओडिशा के इस ऐतिहासिक आंदोलन के बाद वह बीजेपी में शामिल हो गए. उन्होंने बीजेपी की जड़ों को मजबूत किया. इसका नतीजा साल 2024 में दिखा. भाजपा ने ओडिशा में नवीन पटनायक के 24 साल पुराने बीजू जनता दल के शासन को खत्म किया. बीजेपी ने इसी साल पहली बार सरकार बनाई. उन्हें केंद्र में पेट्रोलियम और कौशल विकास जैसे अहम मंत्रालय को संभालने के बाद 2021 में देश का शिक्षामंत्री बनाया. 

यह भी पढ़ें : धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अमित शाह का पहला रिएक्शन, कहा- पद से ज्यादा देश जरूरी

शिक्षामंत्री बनाए जाने के बाद प्रह्लाद जोशी का आया पहला रिएक्शन, बोले- ‘धर्मेंद्र प्रधान ने…’

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25 जुलाई 2026 को आखिरकार छात्रों की मांग के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षामंत्री के पद से इस्तीफा दिया है. उनके इस्तीफे के मंजूर करते हुए सरकार ने अब इस मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंपी है. उन्हें अतिरिक्त प्रभार सरकार की तरफ से सौंपा गया है. अब शिक्षामंत्री बनाए जाने के बाद प्रह्लाद जोशी का रिएक्शन आया है. उन्होंने पीएम मोदी का आभार जताया है. 

कर्तव्य-विनम्रता से जिम्मेदारी स्वीकार करता हूं: प्रह्लाद जोशी

प्रहलाद जोशी ने कहा, ‘मैं कर्तव्य और विनम्रता की भावना के साथ इस जिम्मेदारी को स्वीकार करता हूं. मैं प्रधानमंत्री का आभारी हूं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के पिछले 12 सालों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की गई हैं. पिछले चार-पांच सालों में धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया और कई महत्वपूर्ण पहल की गईं. देश ने नई शिक्षा प्रणाली में उल्लेखनीय प्रगति की है. प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में, मैं अपनी पूरी क्षमता से काम करूंगा और पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियों को निभाऊंगा.’

प्रह्लाद जोशी पहले से केंद्र सरकार में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. इन मंत्रालयों के साथ-साथ वह अब शिक्षा मंत्रालय के कामकाज और नीतिगत फैसलों की निगरानी करेंगे. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि से आने वाले प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ से पांच बार के सांसद हैं. उन्हें पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का करीबी भी माना जाता है.

राष्ट्रपति ने मंजूर किया इस्तीफा

प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत के संविधान के आर्टिकल 75 के खंड (2) के तहत धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्री परिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया है. पीएम की सलाह पर राष्ट्रपति ने निर्देश दिया है. कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूद विभागों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का प्रभार भी सौंपा जाएगा. 

इसके अलावा, प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने निर्देश दिया है कि कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा विभागों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) का प्रभार भी सौंपा जाए।

‘आप 2017 तक UP की सत्ता में थे, आपने क्यों नहीं…’, जौहर यूनिवर्सिटी मामले पर ओवैसी का अखिलेश यादव पर निशाना

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AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार (25 जुलाई, 2026) को उन युवाओं (Gen-Z) की कोशिशों की तारीफ की, जो अपने मकसद में कामयाब रहे और सरकार को युवाओं के सामने झुकने और धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने पर मजबूर किया.

मुरादाबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने भाजपा और RSS पर हिंदुत्व की विचारधारा को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया. ओवैसी ने मुसलमानों से अपील की कि वे उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनावों से पहले उस राजनीति के खिलाफ एकजुट रहें, जिसे उन्होंने बांटने वाली राजनीति कहा.

जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर बिफरे ओवैसी

इस दौरान हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने जौहर यूनिवर्सिटी को गिराने के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी (SP) के नेता अखिलेश यादव पर खासतौर पर निशाना साधा. उन्होंने सवाल किया कि अखिलेश यादव, जो 2017 तक मुख्यमंत्री रहे, ने अपने कार्यकाल के दौरान यूनिवर्सिटी की इमारतों को रेगुलर क्यों नहीं किया, जबकि उत्तर प्रदेश शहरी विकास अधिनियम, 1973 में ऐसा करने की गुंजाइश थी.

ओवैसी ने सभा से पूछा, ‘अखिलेश यादव ने कानून का हवाला देते हुए कहा था कि उत्तर प्रदेश शहरी विकास अधिनियम, 1973 के तहत जौहर यूनिवर्सिटी को रेगुलर किया जा सकता है. मैं सपा के चाटुकारों और समाजवादी पार्टी की गुलामी करने वालों से पूछना चाहता हूं कि आप 2017 तक मुख्यमंत्री थे. आपने जौहर यूनिवर्सिटी को रेगुलर क्यों नहीं किया?’

अखिलेश यादव पर ओवैसी का तीखा हमला

AIMIM प्रमुख ने सपा की इस दलील को पाखंड करार दिया कि पूर्व मंत्री आजम खान ने उन्हें इस मुद्दे के बारे में जानकारी नहीं दी थी. उन्होंने कहा, ‘सपा के लोग कहेंगे- नहीं, आजम खान ने हमें नहीं बताया. तो क्या आप वही करेंगे, जो आजम खान कहेंगे? यह उनका पाखंड है. जब वे मुख्यमंत्री थे, तब वे इमारत को बचा सकते थे, लेकिन अब क्योंकि चुनाव आ रहे हैं, वे आपके सामने ऐसे झूठ पेश कर रहे हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी ने हाल ही में मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया था. यह आदेश उत्तर प्रदेश शहरी योजना और विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27 के तहत नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए दिया गया था.’

यूपी चुनाव से पहले बढ़ रही सियासी सरगर्मी

ओवैसी का यह भाषण उत्तर प्रदेश में बढ़ती राजनीतिक सरगर्मी के बीच आया है. AIMIM प्रमुख ने सत्ताधारी पार्टी के तथाकथित हिंदुत्व एजेंडा के खिलाफ मुसलमानों की एकता पर जोर दिया. इमारतों को गिराने का यह आदेश राज्य की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन गया है और आने वाले चुनावों से पहले कई पार्टियां इसका इस्तेमाल एक-दूसरे पर हमला करने के लिए कर रही हैं.

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अमित शाह पहला रिएक्शन, कहा- पद से ज्यादा देश जरूरी

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हमारे लिए पद से ज्यादा महत्वपूर्ण देश और युवा छात्र हैं. धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई दोपहर में अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि पिछले 10 दिन के घटनाक्रम से उनका मन बेहद दुखी है और यह मुद्दा उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है. उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार देश के युवाओं का सम्मान करती है और पेपर लीक के खिलाफ सुधार के लिए प्रतिबद्ध है.

बीजेपी के लिए देश महत्वपूर्ण: अमित शाह

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ‘बीजेपी के कार्यकर्ताओं के लिए पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण देश, हमारी युवा पीढ़ी और विद्यार्थी हैं. आज धर्मेंद्र प्रधान जी  का अपने पद से इस्तीफा इसी को दर्शाता है. मोदी सरकार देश के युवाओं की भावनाओं का सम्मान करती है और पेपर लीक के विरुद्ध आवश्यक सुधारों के लिए कटिबद्ध है. पेपर लीक के दोषियों को कठोर दंड मिले, इसके लिए मोदी जी द्वारा लिए गए निर्णय सराहनीय हैं. मुझे पूर्ण विश्वास है कि इन कदमों से NEET परीक्षा में सफल हुए विद्यार्थियों के साथ पूरा न्याय होगा.’

गृह मंत्री ने धर्मेंद्र प्रधान के कामों को गिनाया

उन्होंने कहा, ‘धर्मेंद्र प्रधान जी ने अपने कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन, मातृभाषाओं में परीक्षाओं की व्यवस्था, पीएम श्री विद्यालयों के विस्तार, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने, कौशल विकास और उद्योग-अकादमिक समन्वय को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं. परीक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में भी उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं. उनका कार्यकाल भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के प्रति उनके समर्पण का परिचायक है.’

प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है. इसी बीच, राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्रिमंडल मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है, जबकि वे खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के केंद्रीय मंत्री के रूप में अपना मौजूदा कार्यभार भी संभालते रहेंगे. देश के कई हिस्सों में जोर पकड़ने वाले इन विरोध प्रदर्शनों ने मंत्रालय को गहन जन और राजनीतिक जांच के दायरे में ला दिया था.

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं में खुशी की लहर है. प्रदर्शनकारियों ने इसे अपने लंबे आंदोलन की पहली बड़ी सफलता करार देते हुए जश्न मनाया. छात्रों का कहना है कि यह केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने तक जारी रहेगा.

NEET पेपर लीक प्रोटेस्ट से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक…, CJP आंदोलन ने कैसे हिला दी हुकूमत

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कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार (25 जुलाई 2026) को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफे ने भारतीय राजनीति में आंदोलन की परिभाषा को फिर से गढ़ा है. भारत में अब तक रैलियों, पर्चों और भाषणों से महीनों तक जमीनी स्तर पर भीड़ जुटाकर आंदोलनों को सफल बनाया जाता था. जबकि इस आंदोलन में पेपर लीक का मुद्दा जिस तरह से सोशल मीडिया पर उठाया गया उससे देशभर के लोग इससे जुड़ते गए और इसका एपी सेंटर रहा जंतर-मंतर. सरकार की ओर से संगठन की अन्य मांगें मान लिए जाने के बाद सीजेपी ने 36 दिन से जारी अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की.

प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शनिवार को धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है. जोशी को उनके उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है. राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सलाह पर प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है.

शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त चार्ज मिलने पर केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा, ‘मैं यह जिम्मेदारी निभाऊंगा. मैं प्रधानमंत्री का शुक्रगुजार हूं. पीएम मोदी की सरकार के पिछले 12 सालों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल हुई हैं. पिछले चार-पांच सालों में धर्मेंद्र प्रधान ने नई शिक्षा नीति भी लागू की और कई जरूरी काम किए गए. देश ने नई शिक्षा व्यवस्था में काफी तरक्की की है. प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मैं अपनी पूरी काबिलियत से काम करूंगा और अपनी जिम्मेदारियों को पूरी लगन से पूरा करूंगा.’

धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा

इस पूरे घटनाक्रम को युवाओं के नेतृत्व वाले उस आंदोलन के लिए एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने परीक्षाओं में गड़बड़ी और नीट पेपर लीक विवाद को लेकर लाखों लोगों को एकजुट किया था. धर्मेंद्र प्रधान ने दोपहर में अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि पिछले 10 दिन के घटनाक्रम से उनका मन बेहद दुखी है और यह मुद्दा उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है. उन्होंने कहा, ‘जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, उसका राष्ट्र-विरोधी ताकतें लाभ न उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझें, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर ध्यान केंद्रित करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया है.’ 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से प्रधान का इस्तीफा रात में स्वीकार कर लिया. सीजेपी प्रवक्ता सौरव घोष ने देशभर में सभी जगहों पर अपना विरोध-प्रदर्शन तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा करते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के अलावा सरकार नीट विवाद को लेकर कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा देने और बीजेपी शासित सभी राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने पर भी सहमत हो गई है. 

36 दिन के विरोध-प्रदर्शन के बाद सरकार ने मानी बात

सीजेपी ने 25 जुलाई दोपहर शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा के बाद कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. यह सीजेपी और सरकार के बीच तीसरे दौर की बातचीत थी. इसमें केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने किया, जबकि सीजेपी प्रतिनिधिमंडल में सौरव दास के अलावा आशुतोष रांका शामिल थे. रांका ने कहा, ‘चूंकि, सरकार ने 36 दिन के विरोध-प्रदर्शन के बाद हमारी सभी मांगें मान ली हैं, इसलिए हम सभी से अपील करते हैं कि वे शांतिपूर्ण ढंग से विरोध स्थल से हट जाएं और घर लौट जाएं.’  

सौरव दास ने कहा कि उन्होंने संगठन की मांगों का एक मसौदा सरकार के साथ साझा किया है, जिस पर मंगलवार (28 जुलाई 2026) तक लिखित गारंटी मिलेगी. जेपी नड्डा ने कहा कि सीजेपी के प्रतिनिधि बैठक में एक लिखित मसौदा लेकर आए थे, जिसमें उन्होंने आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों से जुड़े कुछ बिंदु रखे हैं. उन्होंने कहा कि सीजेपी ने (मसौदे में) बाकी मांगें भी उठाई हैं, जिनमें कोई जवाबी कार्रवाई न किया जाना, मुआवजा दिया जाना और संगठन के पांच-सूत्री चार्टर पर विचार किया जाना शामिल है. नड्डा ने कहा, ‘हमने इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. चर्चा के बाद पहला निर्णय यह लिया गया कि कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी और कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी. अगर दिल्ली पुलिस या बीजेपी शासित राज्यों में कोई प्राथमिकी पहले ही दर्ज की जा चुकी है, तो उसे वापस ले लिया जाएगा.’

जंतर-मंतर पर खुशी की लहर 

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर खुशी की लहर दौड़ पड़ी और विरोध स्थल पर ‘हम जीत गए’ के नारे गूंजने लगे. जश्न जारी रहने के बीच अधिकारियों ने विरोध-प्रदर्शन को खत्म करने की प्रक्रिया की निगरानी शुरू की और प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक तितर-बितर होने का आग्रह किया, जबकि दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने लोगों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए आसपास के स्टेशन पर सभी एंट्री और एग्जिट गेट फिर से खोल दिए. 

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान सार्वजनिक विवाद के बाद इस्तीफा देने वाले दूसरे केंद्रीय मंत्री हैं. उनसे पहले एमजे अकबर ने 2018 में विदेश राज्य मंत्री के पद से उस समय इस्तीफा दे दिया था, जब मीटू आंदोलन के दौरान उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे. धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा 2014 के बाद उन कुछ मौकों में से एक है, जब मोदी सरकार ने जनता के विरोध या राजनीतिक दबाव के बीच अपने पैर खींचे हैं. 2015 में मोदी सरकार को बुनियादी ढांचे और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण को आसान बनाने के मकसद से भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन की अपनी योजना टालनी पड़ी थी, जबकि 2021 में उसे तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा करनी पड़ी थी. 

राहुल ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह छात्रों के खिलाफ हुई हिंसा के लिए “सीधे तौर पर जिम्मेदार” हैं. उन्होंने शाह पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक हथियारों और पैलेट गन के इस्तेमाल की मंजूदी देने का भी आरोप लगाया. हालांकि, बीजेपी ने प्रधान का बचाव किया. पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि उनके फैसले में ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा के उच्चतम मानक झलकते हैं. 

दो साल पुराने पेपर लीक रोधी कानून में संशोधन करने के उद्देश्य से सोमवार (27 जुलाई 2026) एक बिल लोकसभा में पेश किया जाएगा. इस बिल में आरोपियों की तुरंत सुनवाई के लिए हर राज्य में फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने और सजा को और कड़ा करने का प्रस्ताव किया गया है. इसमें पेपर लीक या अनुचित साधनों का प्रयोग करने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल की कैद और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.  संगठित अपराधों के लिए बिल में कम से कम 7 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है. 

सीजेपी आंदोलन ने कैसे पकड़ी रफ्तार

परीक्षा प्रणाली में सुधार, नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर 20 जून को छात्रों का विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ था. धीरे-धीरे यह Gen-Z के नेतृत्व वाले सबसे अहम आंदोलनों में से एक बन गया. जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के 28 जून को छात्रों के समर्थन में उतरने और जंतर-मंतर पर आइसा के छह कार्यकर्ताओं के साथ अनशन शुरू करने के बाद सीजेपी के नेतृत्व वाले आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर जोर पकड़ लिया.  

दिल्ली पुलिस की ओर से वांगचुक को 18 जुलाई को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के बाद छात्रों और युवाओं का आक्रोश और बढ़ गया. वांगचुक ने केंद्र से प्रदर्शनकारियों की मांगें मानने का आश्वासन मिलने के बाद गुरुवार (23 जुलाई) को 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया. केंद्र सरकार और सीजेपी नेतृत्व के बीच पहली आधिकारिक बैठक 20 जुलाई को जेपी नड्डा के आवास पर हुई थी. उसी दिन हजारों प्रदर्शनकारियों ने संगठन के ‘संसद चलो’ आह्वान पर संसद की ओर मार्च शुरू किया था, लेकिन पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करके उन्हें पीछे धकेल दिया था.

इस दौरान कई लोग घायल हुए थे.  दोनों पक्षों के बीच दूसरे दौर की बातचीत शुक्रवार को हुई थी, जब केंद्र ने बैठक किसी मंत्री के आवास या कार्यालय के बजाय एक तटस्थ स्थल पर आयोजित करने की सीजेपी की मांग स्वीकर कर ली.