केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर तेलंगाना में राजनीतिक सरगर्मी जारी है. इस दौरान पूर्व BRS मंत्री और MLA जगदीश रेड्डी ने शनिवार (25 जुलाई, 2026) को प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना की है. जगदीश रेड्डी ने पीएम मोदी की आलोचना करते हुए कहा कि वे दूसरी बार संसद से भाग गए और जब बच्चे संसद के पास प्रदर्शन कर रहे थे और पिट रहे थे, तब राहुल गांधी मोदी के घर गए. उन्होंने आरोप लगाया कि रेवंत रेड्डी ‘बड़े भाई’ के डर से दिल्ली भी नहीं गए.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले भाजपा नेता
केंद्रीय राज्य मंत्री बंदी संजय ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘देश पहले, पार्टी बाद में.. खुद आखिर में.’ उन्होंने कहा, ‘पद अस्थायी होते हैं, लेकिन लोगों का भरोसा मुख्य चीज है. धर्मेंद्र प्रधान ने छात्र आंदोलन से लेकर केंद्र सरकार में अहम पदों पर रहने तक दशकों तक सेवा की.’ बंदी संजय कुमार ने धर्मेंद्र प्रधान की सेवाओं और प्रयासों के लिए उन्हें धन्यवाद दिया.
KTR ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या कहा?
BRS के कार्यकारी अध्यक्ष KTR ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘लोगों की ताकत हमेशा सत्ता में बैठे लोगों से ज्यादा होती है. Gen-G ने इसे हासिल कर लिया है.’
वहीं, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर BRS पार्टी की चुप्पी पर सवाल उठाया. रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि BRS और BJP के बीच ‘सीक्रेट अंडरस्टैंडिंग’ है.
तेलंगाना कांग्रेस के मंत्रियों ने मामले पर क्या कहा?
तेलंगाना कांग्रेस के मंत्रियों ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. ट्रांसपोर्ट और BC वेलफेयर मिनिस्टर पोन्नम प्रभाकर ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्टूडेंट्स के लंबे समय से चल रहे आंदोलन की जीत है. उन्होंने कहा कि केंद्र ने स्टूडेंट्स की मांगों पर ध्यान दिया है और यह घटनाक्रम सरकारों के लिए आंखें खोलने वाला होना चाहिए.
जबकि पोन्नम प्रभाकर का मानना है कि यह सिर्फ मंत्री पद का इस्तीफा नहीं है, बल्कि लोगों की आवाज का सम्मान है. उन्होंने कहा कि स्टूडेंट्स के हक और उनके भविष्य के लिए देश भर में हुए विरोध प्रदर्शनों की वजह से केंद्र सरकार को पीछे हटना पड़ा.
कांग्रेस के मंत्रियों ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को स्टूडेंट यूनिटी और राहुल गांधी के संघर्ष की जीत बताया. पोन्नम प्रभाकर ने कहा कि स्टूडेंट्स की शिकायतों को नजरअंदाज करने के केंद्र सरकार के बर्ताव की कड़ी आलोचना हुई और आखिर में उसे जनता के दबाव के आगे झुकना पड़ा.
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