Bhagwan Dada: आज हम आपको एक ऐसे शख्स की कहानी बताने वाले हैं जो एक वक्त पर कुछ भी नहीं था। गरीबी में उसका पालन पोषण हुआ। लेकिन अपनी मेहनत के चलते करोड़पति बन गया और फिर से सब कुछ गंवा दिया। आखिरी दिनों में उनका हाल ऐसा हो गया था कि उनको चावल में रहना पड़ा और खाने तक के लिए फिल्म स्टूडियो पर निर्भर रहना पड़ा था।

कौन थे भगवान दादा?
दरअसल आज हम बात करने वाले हैं भगवान दादा की जो कि भारतीय सिनेमा के टॉप कॉमेडियन के साथ-साथ एक्टर हुआ करते थे। वह एक डायरेक्टर भी थे। एक वक्त था जब वह देश के सबसे अमीर एक्टर्स की लिस्ट में आते थे। 25 कमरों वाले बंगले में रहते थे। लेकिन अपनी बुरी आदतों और बुरी संगत के चलते उन्होंने सब कुछ गंवा दिया।
भगवान दादा ने अपने जीवन में काफी धन दौलत हासिल की और फिर लोगों पर लुटा दी। लेकिन ललिता पवार के साथ जो भी किया उसकी वजह से वह पूरी उम्र पछतावे की आग में जलती रहे। साथ ही उन्होंने पत्नी को भी धोखा दे दिया था। जिसकी वजह से वह कहते थे कि भगवान ने उन्हें सजा दी है।
भगवान दादा की हालत ऐसी हो गई थी कि दूसरों के सामने वो हाथ फैलाने के लिए मजबूर हो गए थे। उन्होंने 30 के दशक में साइलेंट फिल्मों के वक्त काम करना शुरू किया था। जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर काम करना शुरू किया। बाद में उन्हें फिल्म प्रोडक्शन में काम मिला और कई साल तक फिल्में प्रोड्यूस की।
कई बड़ी फ़िल्में की थी प्रोड्यूस
भगवान दादा ने कुछ फिल्मों में काम किया था और वह अपने दौर के मशहूर कलाकार थे। उन्होंने अपने करियर में सबसे बड़ी फिल्म अलबेला प्रोड्यूस की थी और इसमें गीता बाली नजर आई थी। यह फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई और थिएटर में 50 हफ्तों तक चली। इसी फिल्म ने भगवान दादा को करोड़पति बना दिया था।
भगवान दादा ने अपने करियर में 600 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया और इसमें 27 फिल्में प्रोड्यूस भी की। देखते ही देखते वह कभी अमीर बन गए और 25 कमरों के आलीशान बंगले में रहने लगे। लेकिन बाद में भगवान दादा ने सब कुछ गंवा दिया। साल 2001 में फिल्म फेयर के साथ इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया कि दोस्तों ने भी उनसे किनारा कर लिया था और सिर्फ दिलीप कुमार ने ही उनका सपोर्ट किया।
सब दोस्तों ने छोड़ दिया था साथ
इंटरव्यू में भगवान दादा ने बताया कि “एक वक्त हुआ करता था जब इंडस्ट्री के बड़े-बड़े लोग मेरे दोस्त हुआ करते थे। लेकिन सबने मुझसे रिश्ता तोड़ लिया था और दिलीप कुमार आज भी जब मेरी खिड़की के पास से गुजरते हैं तो गाड़ी रोकर हॉर्न जरूर देते हैं। हम दोनों के एक दूसरे का अभिवादन करने के बाद ही वह आगे बढ़ते थे।”
बुरी आदतों के चलते कंगाल हुए भगवान दादा
जब भगवान दादा का सब कुछ चला गया था तो वह परिवार के साथ एक चॉल में रहे। फिल्मों में छोटे-मोटे रोल किया। खाना भी स्टूडियो में मिलता था। एक दूसरे इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उनकी दौलत उनकी बुरी आदतों की वजह से डूबी। उन्होंने कहा कि “मैं शराब और कबाब का बहुत शौकीन हो गया था। ताश और रेस कोर्स में जुआ खेलने लग गया था। शराब और औरतें मेरी कमजोरी बन गई थी। मैंने अपनी पत्नी को धोखा दे दिया था। शायद भगवान ने इसीलिए मुझे सजा दी। एक मजदूर से करोड़पति बनने के बाद में मैं कंगाल हो गया।”
पछतावे की आग में जलते रहे भगवान दादा
जानकारी के लिए आपको बता दें कि साल 2002 में भगवान दादा की चॉल में ही मृत्यु हो गई थी। मृत्यु के आखिरी दिनों में भी उनको पछतावा था क्योंकि उन्होंने एक फिल्म के सेट पर ललिता पवार को ऐसा थप्पड़ मारा कि उनकी एक आंख खराब हो गई थी। आधे चेहरे को लकवा भी मार गया।
फिल्म फेयर के साथ एक इंटरव्यू के दौरान भगवान दादा ने बताया था कि “मुझे इस बात का बहुत ज्यादा अफसोस है कि ललिता पवार को चेहरे पर लकवा होने की वजह ही मैं था। हमारी शुरुआती फिल्मों में से एक सीन के वक्त मैंने उन्हें इतनी जोर से थप्पड़ मार दिया था कि उनकी बाई आंख को नुकसान पहुंच गया था। यह बात माफी की बिल्कुल भी लायक नहीं थी। मेरे किए हुए की माफी नहीं।”






