बांग्लादेशी से निष्कासित लेखिका तसलीमा नसरीन (वर्तमान में नई दिल्ली में रहती हैं) ने बंगाल सरकार की तारीफ की है. उन्होंने साथ ही शुक्रिया अदा किया है. नसरीन ने कहा है कि एक सरकार ने मुझे देश छोड़ने पर मजबूर किया. दूसरी ने मुझे आने नहीं दिया और तीसरी ने मेरा स्वागत किया. मैं खुश हूं.
तसलीमा ने कहा, ‘मैं सीएम शुवेंदु अधिकारी का शुक्रिया अदा करती हूं. क्योंकि उन्होंने मेरी सुरक्षा सुनिश्चित की. मैंने अभी यह तय नहीं किया है कि मैं कोलकाता में रहूंगी या नहीं. नसरीन ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच रिश्ते अच्छे रहेंगे. हम हमेशा मानते हैं कि 1971 में भारत ने हमारे लिए क्य़ा किया था. लेकिन कुछ पाकिस्तानी जिहादी भारत के खिलाफ हैं.’
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तसलीमा ने कहा- मौजूदा केंद्र सरकार अभिव्यक्ति की आजादी में विश्वास रखती है
तसलीमा नसरीन लगभग दो दशक बाद कोलकाता लौटी है. रविवार (1 जुलाई) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नसरीन ने अलग-अलग सरकारों के दौर में अपने अनुभवों के बारे में बात की. उन्होंने लेफ्ट, फ्रंट, तृणमूल कांग्रेस और मौजूदा बीजेपी सरकार के बीच साफ फर्क बताया. इसके अलावा उन्होंने केंद्र सरकार के रुख की तारीफ की. इसके अलावा नसरीन ने केंद्र सरकार के रुख की तारीफ की है.
उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि भारत की मौजूदा सरकार अभिव्यक्ति की आजादी में विश्वास रखती है. मेरे कार्यक्रम में कोई राजनीति शामिल नहीं थी. इस एक पंक्ति के लिए मैंने कई वर्षों तक इंतजार किया है.’
2007 छोड़ना पड़ा था कोलकाता
नसरीन दो दशक बाद कोलकाता लौटी हैं. जहां उन्हें 2007 में अपनी रचनाओं और संस्मरण द्विखोन्दितो को लेकर तीव्र विरोध प्रदर्शन के बीच शहर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था. यह संस्मरण 2003 मे प्रकाशित हुआ था. उनकी वापसी तब से शहर में उनकी पहली सार्वजनिक यात्रा है.
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