अगर सरकारी स्कूलों की संख्या लगातार कम हो रही है तो सवाल उठना स्वाभाविक है. क्या स्कूल बंद हो रहे हैं? अगर हां ! तो बच्चों की पढ़ाई पर इसका क्या असर पड़ रहा है? इन्हीं सवालों के बीच लोकसभा में सरकार ने ऐसे आंकड़े पेश किए हैं, जिन्होंने सरकारी स्कूलों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है.
शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने लोकसभा में समाजवादी पार्टी सांसद आनंद भदौरिया के सवाल का जवाब देते हुए बताया कि साल 2021-22 में देश में 10,22,386 सरकारी स्कूल थे, लेकिन 2025-26 तक यह संख्या घटकर 10,05,245 रह गई. यानी सिर्फ पांच साल में करीब 17,141 सरकारी स्कूल कम हो गए.
केंद्र सरकार ने क्या बताया ?
सरकार ने साफ किया कि स्कूल खोलने, बंद करने या उनका विलय करने का फैसला राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकार क्षेत्र में आता है. सरकार ने अपने जवाब में यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के मुताबिक स्कूलों का विलय बहुत सोच-समझकर किया जाना चाहिए, यह तभी किया जाए जब यह सुनिश्चित हो कि इससे बच्चों की स्कूल तक पहुंच या उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो. सरकार के मुताबिक स्कूल कॉम्प्लेक्स या क्लस्टर बनाने का उद्देश्य संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और स्कूलों का संचालन अधिक प्रभावी बनाना है.
किन राज्यों में सबसे ज्यादा कमी दर्ज हुई?
लोकसभा में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक सबसे बड़ी गिरावट जम्मू-कश्मीर में दर्ज हुई. यहां सरकारी स्कूलों की संख्या 23,173 से घटकर 18,787 रह गई. इसके अलावा कई बड़े राज्यों में भी सरकारी स्कूलों की संख्या कम हुई है. महाराष्ट्र, असम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में भी सरकारी स्कूलों की संख्या पहले के मुकाबले कम दर्ज की गई.
किन राज्यों में गिरावट?
– मेघालय: 7,783 से 5,620
– तेलंगाना: 30,023 से 28,088
– पश्चिम बंगाल: 83,302 से 81,591
– मध्य प्रदेश: 92,695 से 91,199
– कर्नाटक: 49,679 से 48,527
इन राज्यों में बढ़े स्कूल
हर जगह तस्वीर एक जैसी नहीं है. कुछ राज्यों में सरकारी स्कूलों की संख्या बढ़ी भी है. राजस्थान में पांच साल के दौरान सरकारी स्कूलों की संख्या 68,948 से बढ़कर 69,983 हो गई. बिहार में यह 75,558 से बढ़कर 76,435 पहुंच गई. इसके अलावा छत्तीसगढ़ और गुजरात में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यानी पूरे देश की तस्वीर एक जैसी नहीं है, कुछ राज्यों में स्कूलों की संख्या घटी है जबकि कुछ ने नए सरकारी स्कूल भी जोड़े हैं.
उत्तर प्रदेश का आंकड़ा क्या कहता है?
उत्तर प्रदेश में पहली नजर में तस्वीर लगभग स्थिर दिखाई देती है. 2021-22 में राज्य में 1,37,024 सरकारी स्कूल थे, जबकि 2025-26 में यह संख्या 1,37,103 हो गई लेकिन जिलेवार आंकड़े देखें तो तस्वीर बदलती नजर आती है.
– गाजियाबाद: 504 से 474
– अलीगढ़: 2,167 से 2,114
– झांसी: 1,504 से 1,450
– हाथरस: 1,285 से 1,268
इसके अलावा फिरोजाबाद, प्रयागराज और जालौन में भी सरकारी स्कूलों की संख्या में मामूली कमी दर्ज की गई.
लड़कियों की पढ़ाई पर क्या तस्वीर सामने आई?
सरकार ने अपने जवाब में लड़कियों के नामांकन और पढ़ाई जारी रखने से जुड़े आंकड़े भी दिए. कक्षा 3 से 5 में लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात 97 से घटकर 93.5 हो गया. कक्षा 6 से 8 में भी यह 92.5 से घटकर 92.3 रहा. हालांकि, 9वीं से 12वीं के स्तर पर इसमें सुधार दर्ज किया गया और यह 70.5 से बढ़कर 74 पहुंच गया. अगर स्कूल में टिके रहने की दर देखें तो प्राथमिक स्तर पर यह 93.4 से घटकर 92.2 रही. वहीं, हायर सेकेंडरी स्तर पर यह 49.6 से बढ़कर 55 हो गई.
सरकार का दावा – सुविधाओं के लिए पैसा दिया जा रहा
सरकार ने बताया कि समग्र शिक्षा योजना के तहत राज्यों को नए स्कूल खोलने, स्कूल भवन और अतिरिक्त कमरे बनाने, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय चलाने, मुफ्त किताबें और यूनिफॉर्म देने, आने-जाने का भत्ता उपलब्ध कराने और स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ने के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है.
शिक्षक-छात्र अनुपात बेहतर बनाए रखने में भी केंद्र राज्यों की मदद करता है. हालांकि, शिक्षकों की भर्ती और तैनाती की जिम्मेदारी राज्यों की ही है, लेकिन इस जवाब से कुछ सवाल अभी भी बाकी हैं.
लोकसभा में पूछा गया सवाल सिर्फ यह नहीं था कि देश में कितने सरकारी स्कूल हैं. सांसद ने यह भी जानना चाहा था कि कितने स्कूल बंद हुए कितनों का दूसरे स्कूलों में विलय किया गया और क्या इससे बच्चों की पढ़ाई या स्कूल तक पहुंच प्रभावित हुई, लेकिन सरकार के जवाब में सिर्फ कुल सरकारी स्कूलों की संख्या दी गई. यह नहीं बताया गया कि इन पांच वर्षों में कितने स्कूल वास्तव में बंद हुए, कितनों का विलय हुआ और कितने नए स्कूल खोले गए.
स्कूल घटे लेकिन पूरी तस्वीर साफ नहीं
इसी तरह यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि जिन इलाकों में स्कूलों का विलय हुआ, वहां बच्चों को स्कूल तक पहुंचने के लिए ज्यादा दूरी तय करनी पड़ी या नहीं और उसका दाखिले या पढ़ाई जारी रखने पर क्या असर पड़ा. यानी लोकसभा में आए इन आंकड़ों ने एक तथ्य जरूर सामने रखा है कि देश में सरकारी स्कूलों की कुल संख्या पांच साल में 17 हजार से ज्यादा घटी है, लेकिन इसके पीछे की पूरी तस्वीर अभी भी इन आंकड़ों से साफ नहीं होती.
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