15 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल की सियासत में एक और भूचाल आया. TMC के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और कामरहाटी से विधायक मदन मित्रा ने ममता बनर्जी के खेमे (कालीघाट TMC) की सभी कमेटियों से इस्तीफा दे दिया और विधानसभा में मुख्य सचेतक के पद से भी हाथ धो लिया. वे ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल हो गए. यह उस विपक्षी एकजुटता को तोड़ने वाला झटका है, जिसके सहारे परिसीमन बिल जैसे बड़े मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरा था. तब से लेकर अब तक परिसीमन बिल के खिलाफ उठी आवाजों के आंकड़े बदल गए हैं. तो अब परिसीमन बिल मंजूर होने के कितने करीब पहुंच गया और क्या है सूरत-ए-हाल…
मदन मित्रा ने ममता का साथ क्यों छोड़ दिया?
मदन मित्रा ने इस्तीफे के साथ कहा कि वे TMC के विधायक बने रहेंगे. उन्होंने कहा, ‘मैंने सिर्फ अपना कमरा बदला है, अपना घर नहीं.’
मित्रा ने इसकी सबसे बड़ी वजह अभिषेक बनर्जी को बताया. उन्होंने अभिषेक से छह महीने या एक साल के लिए एक तरफ हटने का आग्रह किया था, ताकि पार्टी को संभाला जा सके. लेकिन जब अभिषेक ने मना कर दिया, तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया. मित्रा ने कहा, ‘पार्टी डूब रही है, नाव नीचे चली गई है, लोग मर रहे हैं, लेकिन पार्टी ने यह तय कर लिया कि अभिषेक को बचाना है.’ मित्रा ने आरोप लगाया कि पार्टी ‘सिर्फ अभिषेक की सेवा’ कर रही है.
मित्रा का यह कदम प्रवर्तन निदेशालय (ED) के उनकी पत्नी और दो बेटों को नगर निगम भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तलब किए जाने के एक दिन बाद आया. हालांकि, मित्रा ने दोनों बातों को आपस में नहीं जोड़ा और कहा कि उनका परिवार ED के सामने पेश होगा. इस टाइमिंग ने सियासी गलियारों में चर्चा बढ़ा दी है.
अब TMC में दरार कितनी बढ़ गई है?
बंगाल विधानसभा में समीकरण देखें, तो:
- मई 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 15 साल का TMC शासन खत्म कर दिया.
- TMC को 80 सीटें मिलीं, जो पहले के 200 से काफी कम हैं.
- इन 80 विधायकों में से 58 ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता विपक्ष के पद के लिए समर्थन दिया.
- बागी गुट अब 65 विधायकों के समर्थन का दावा करता है.
लोकसभा में समीकरण:
- 21 TMC सांसद ममता खेमा छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए.
- मदन मित्रा सबसे बड़ा धुरा बदलाव हैं जो अब तक बागी गुट में हुआ है.
चुनाव आयोग के सामने दावेदारी:
- दोनों गुट चुनाव आयोग (EC) के सामने पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न (घास-फूल), संगठनात्मक ढांचे और संपत्तियों पर दावा पेश कर रहे हैं.
- बागी गुट ने TMC भवन पर कब्जा कर लिया है.
यानी TMC अब दो फाड़ में बंट चुकी है. एक तरफ ममता बनर्जी की ‘कालीघाट TMC’, दूसरी तरफ ऋतब्रत बनर्जी का बागी गुट. लेकिन इससे भी बड़ा मुद्दा है परिसीमन बिल.
परिसीमन बिल क्या है और लोकसभा में क्या हुआ?
परिसीमन बिल 2026 केंद्र सरकार का वह विधेयक है, जो लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 815 से 850 के बीच करने का प्रस्ताव रखता है. इसके साथ 131वां संविधान संशोधन विधेयक भी जुड़ा था, जो महिला आरक्षण (33%) को परिसीमन के बाद लागू करने से संबंधित था. लोकसभा में 17 अप्रैल 2026 को वोटिंग हुई:
- पक्ष में: 298 वोट
- विरोध में: 230 वोट
- जरूरी दो-तिहाई बहुमत: करीब 362 वोट
- अंतर: 64 वोट कम
केंद्र सरकार दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में नाकाम रही और बिल गिर गया. विपक्ष का कहना था कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना गलत है. कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा, ‘महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना महिलाओं की आकांक्षाओं को बंधक बनाना है.’ प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार ‘महिला आरक्षण के नाम पर निर्वाचन क्षेत्रों को काट-छांट’ करना चाहती है.
TMC ने बिल को ‘खतरनाक’ और ‘बंगाल की आवाज को कमजोर करने की साजिश’ करार दिया. ममता बनर्जी ने कहा कि यह ‘महिला सशक्तिकरण के नाम पर खतरनाक परिसीमन अभ्यास’ है.
मदन मित्रा और परिसीमन बिल में क्या है कनेक्शन?
इन दोनों मुद्दों का सीधा कनेक्शन तो नहीं है, लेकिन 4 अप्रत्यक्ष असर बहुत बड़े हैं:
- विपक्षी एकजुटता कमजोर हुई: परिसीमन बिल को INDIA गठबंधन ने एकजुट होकर विरोध किया था. लेकिन TMC का बंटवारा विपक्षी एकजुटता को तोड़ रहा है.
- संसद में गणित बदला: 21 TMC सांसदों के NCPI में जाने से विपक्ष की ताकत कम हो गई है. द वीक की रिपोर्ट के मुताबिक, TMC के बंटवारे ने बीजेपी के पक्ष में गणित बदल दिया है. अगर सरकार परिसीमन बिल दोबारा लाती है, तो विपक्ष के पास पहले से कम वोट होंगे.
- राज्यसभा पर भी असर: TMC के सांसदों के जाने से राज्यसभा में भी विपक्ष कमजोर हुआ है. परिसीमन बिल को संसद के दोनों सदनों से पास कराना होता है. राज्यसभा में भी सरकार को बहुमत की जरूरत होती है.
- ममता की सक्रियता पर सवाल: ममता बनर्जी पहले से ही परिसीमन बिल की जोरदार विरोधी रही हैं. अगर उनकी अपनी पार्टी ही बिखर रही है, तो संसद में उनकी आवाज कमजोर पड़ सकती है.
परिसीमन बिल पास होने का गणित क्या कहता है?
बिल फिलहाल ठंडे बस्ते में है, लेकिन सरकार ने इसे वापस नहीं लिया है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी परिसीमन और महिला आरक्षण बिलों को दोबारा लाने की रणनीति बना रही है. सरकार BJD और YSR कांग्रेस जैसी गैर-संरेखित पार्टियों को साधने की कोशिश कर रही है. DMK के अनुपस्थित रहने की भी अटकलें हैं.
अगर सरकार को 20 TMC और 22 DMK सांसदों का समर्थन मिल जाए, तो भी उसे 12-19 एक्स्ट्रा वोट चाहिए. लेकिन TMC के बंटवारे से सरकार को कुछ TMC सांसदों का समर्थन मिल सकता है. 15 जुलाई 2026 को सुप्रिया सुले ने खुलासा किया कि अमित शाह ने सीटें जनसंख्या के आधार पर न बढ़ाकर 50% बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है. हालांकि, NCP (SP) ने अभी कोई आधिकारिक रुख नहीं अपनाया है.



