‘विवाद कहीं का भी हो, दिल्ली HC कर सकता है CAPF मामले की सुनवाई’, सुप्रीम कोर्ट का आदेश

‘विवाद कहीं का भी हो, दिल्ली HC कर सकता है CAPF मामले की सुनवाई’, सुप्रीम कोर्ट का आदेश


सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (9 जून, 2026) को अपने फैसला में कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट सीमा सुरक्षा बल समेत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के कर्मियों की सेवा समाप्ति के मामलों की सुनवाई कर सकता है, भले ही कार्रवाई का कारण राष्ट्रीय राजधानी के बाहर क्यों न उत्पन्न हुआ हो.

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने बीएसएफ के कांस्टेबल की याचिका पर पुनर्विचार करते हुए यह आदेश दिया. कांस्टेबल ने याचिका में बिना किसी पेंशन लाभ के अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दी थी. कांस्टेबल को इस आधार पर बर्खास्त किया गया था कि उसने अपनी पहली पत्नी के रहते हुए बिना उसकी अनुमति के दूसरी शादी कर ली थी.

याचिकाकर्ता को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के नारायणपुर में ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया था, जहां उसकी तैनाती थी. कांस्टेबल निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब देने में विफल रहा, जिसके बाद कमांडेंट ने 2022 में उसे बिना किसी पेंशन लाभ के सेवा से बर्खास्त कर दिया.

बर्खास्तगी के आदेश से परेशान होकर कांस्टेबल ने सेवा में पुनः बहाली के लिए एक वैधानिक याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया. सेवा से बर्खास्तगी के आदेशों और अपनी वैधानिक याचिका को खारिज किए जाने के खिलाफ कांस्टेबल ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन यहां भी उसकी याचिका खारिज कर दी गई. हाईकोर्ट ने कहा कि वह याचिका पर सुनवाई के लिए उपयुक्त मंच नहीं है. इसके बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.

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बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि केंद्र सरकार के कार्यालयों और सीएपीएफ की कमांडिंग ऑथिरिटी/जनरल डायरेक्टर का ऑफिस दिल्ली में है इसलिए हाईकोर्ट के पास संविधान के अनुच्छेद 226(1) के तहत ऐसी याचिकाओं पर सुनवाई का अधिकार है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 226(1) प्रतिवादी प्राधिकरण के स्थान के आधार पर हाईकोर्ट को क्षेत्राधिकार का प्रयोग करने का अधिकार देता है, फिर वाद चाहे कहीं भी उत्पन्न हुआ है.

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