ममता बनर्जी को कोलकाता हाई कोर्ट से राहत? जज ने पूछा- ‘जब स्पीकर को TMC की ओर से दो अलग-अलग प्रस्ताव…’ 

ममता बनर्जी को कोलकाता हाई कोर्ट से राहत? जज ने पूछा- ‘जब स्पीकर को TMC की ओर से दो अलग-अलग प्रस्ताव…’ 


कोलकाता हाई कोर्ट ने बुधवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब एक ही राजनीतिक दल की ओर से दो परस्पर अलग-अलग प्रस्ताव मिले तो विधानसभा अध्यक्ष ने किस आधार पर फैसला लिया.

अदालत पश्चिम बंगाल के इतिहास में पहली बार सामने आए ऐसे विवाद की सुनवाई कर रही थी. शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने एक रिट याचिका दायर कर उनके नाम को खारिज किए जाने और पार्टी के दूसरे विधायक रितब्रता बनर्जी को विपक्ष का नेता नियुक्त किए जाने को चुनौती दी है.

विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पेश वकील बिल्वदल भट्टाचार्य की दलील पर जस्टिस कृष्णा राव ने टिप्पणी की कि जब अध्यक्ष को दो अलग-अलग प्रस्ताव प्राप्त हुए थे तो वह ‘बिना सदन में बहुमत साबित कराए अपने कक्ष में बैठे-बैठे यह कैसे तय कर सकते थे कि कौन-सा प्रस्ताव सही है और कौन-सा गलत?’

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हाई कोर्ट के जज ने स्पीकर से पूछा

जस्टिस ने अध्यक्ष के वकील से पूछा, ‘दो बागी विधायकों की शिकायत 27 मई को अध्यक्ष के पास आई, जबकि पार्टी की ओर से शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने का पत्र 20 मई को भेजा गया था तो क्या आपत्ति आने का इंतजार किया जा रहा था?’

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की आपत्ति केवल इस बात को लेकर है कि अध्यक्ष ने पार्टी के प्रस्ताव को नजरअंदाज करते हुए किसी अन्य व्यक्ति को विपक्ष का नेता कैसे नियुक्त कर दिया. कोर्ट ने ऐसी असाधारण परिस्थितियों में अध्यक्ष के कर्तव्यों और अधिकारों को लेकर स्पष्टता मांगी.ट

स्पीकर क्यों रहे चुप? जज ने पूछा

अदालत ने कहा, ‘मैं मानता हूं कि हस्ताक्षरों में कथित असमानता आदि को लेकर उनके दावे विवादित हैं, लेकिन सही या गलत, अध्यक्ष को 9 मई को एक प्रस्ताव मिला था और फिर 20 मई को पार्टी की बैठक के प्रस्ताव (रिजोल्यूशन) की प्रति भी प्राप्त हुई. फिर वह चुप क्यों रहे? मान लिया कि विवाद था, लेकिन यह विवाद तो 27 मई को सामने आया. ऐसे में विपक्ष के नेता की नियुक्ति किस प्रस्ताव के आधार पर की गई?’

अदालत की यह टिप्पणी विधानसभा अध्यक्ष द्वारा विपक्ष के नेता की नियुक्ति की प्रक्रिया और उनके निर्णय लेने के अधिकारों पर उठे सवालों के संदर्भ में आई.

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