केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की इथेनॉल नीति को लेकर कथित रूप से भ्रामक और आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के मामले में नागपुर के सदर पुलिस थाने में चार सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. यह मामला भाजपा के सोशल मीडिया पदाधिकारी शिशिर अरुण भिवापुरे की शिकायत पर दर्ज किया गया.
एफआईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि 3 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनॉल और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को लेकर एक कार्यक्रम में संबोधन दिया था. इसके बाद कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके बयान को कथित तौर पर तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और गलत जानकारी के साथ वीडियो प्रसारित किए गए. शिकायत में कहा गया है कि इन वीडियो के जरिए जनता को गुमराह करने और केंद्रीय मंत्री की छवि खराब करने का प्रयास किया गया.
इन यूट्यूबर के खिलाफ केस दर्ज
पुलिस ने इस मामले में यूट्यूबर मनीष कश्यप, इंस्टाग्राम पेज ‘देसी बॉयज (Desi Boysncr)’, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हर्षित राठी और अंकलेश इनवाटे (Akkaspeaks) के खिलाफ मामला दर्ज किया है. एफआईआर में इन सभी के यूट्यूब और इंस्टाग्राम अकाउंट के लिंक तथा संबंधित वीडियो का उल्लेख किया गया है.
गडकरी के बयान को गलत तरीके से पेश करने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मनीष कश्यप ने अपने यूट्यूब चैनल पर इथेनॉल नीति को लेकर कई वीडियो अपलोड किए, जिनमें नितिन गडकरी के बयान को कथित रूप से गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया. इसी तरह ‘देसी बॉयज’ नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी ऐसे वीडियो साझा किए गए, जिनमें इथेनॉल नीति को लेकर भ्रामक दावे किए गए और केंद्रीय मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया.
एफआईआर में यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हर्षित राठी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर नितिन गडकरी की तस्वीर के साथ ऐसा पोस्ट साझा किया, जिसमें इथेनॉल नीति पर सवाल उठाते हुए कथित रूप से भ्रामक और अपमानजनक टिप्पणियां की गईं. वहीं, अंकलेश इनवाटे के इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी इसी विषय से जुड़े वीडियो प्रसारित किए गए, जिनमें मंत्री के बयान को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया गया है.
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जांच में जुटी नागपुर पुलिस
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन सभी वीडियो और पोस्ट में इथेनॉल नीति को लेकर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, जिससे आम लोगों में भ्रम फैल सकता था. साथ ही ऐसे कंटेंट से सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है. नागपुर पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए वीडियो, पोस्ट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है. जांच के दौरान संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स की गतिविधियों और पोस्ट किए गए कंटेंट की भी फोरेंसिक जांच की जाएगी. फिलहाल मामले की जांच जारी है.



