पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाय कुरैशी ने एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा है कि इस प्रक्रिया की नीयत ठीक नहीं है. इस प्रक्रिया के तहत करोड़ों वोटर्स के नाम हटाए गए हैं. यह लोकतंत्र के साथ छेड़छाड़ है. ANI को दिए इंटरव्यू में कुरैशी ने कहा कि वोट देना एक संवैधानिक अधिकार है.
वोट देने का अधिकार चुनाव आयोग की खैरात नहीं है: कुरैशी
उन्होंने कहा, ‘वोट देने का अधिकार चुनाव आयोग की तरफ से दी कोई खैरात नहीं है. मुझे लगता है कि पूरी एसआईआर प्रक्रिया की नीयत ठीक नहीं है. जिस तरह से करोड़ों वोटरों के नाम हटाए गए हैं. वह लोकतंत्र के साथ छेड़छाड़ है. आप भारत के नागरिक हैं. मैं भारत का नागरिक हूं. वोट देना हमारा संवैधानिक अधिकार है. अनुच्छेद 326 कहता है कि हर किसी का रजिस्ट्रेशन होना चाहिए. इसलिए यह चुनाव आयोग की तरफ से कोई खैरान नहीं है. वे आपको यह अधिकार देंगे.’
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कुरैशी बोले- चुनाव आयोग वोटरों की जिंदगी मुश्किल बना रहा
कुरैशी ने कहा है कि चुनाव आयोग वोटरों की जिंदगी मुश्किल बना रहा है. बंगाल चुनाव के दौरान 27 लाख वोटर वोट नहीं दे पाए. इसका असर नतीजों पर पड़ा है. साथ ही कहा है कि नागरिकों के बचाव में आगे न आकर सुप्रीम कोर्ट ने भी हमें निराश किया. बंगाल, बिहार और असम के मुख्यमंत्रियों ने कहा कि अगर वोटर लिस्ट में आपका नाम नहीं है, तो आप कई अन्य अधिकार भी खो देंगे.
बिहार-बंगाल चुनाव पर विपक्षी पार्टी उठा चुकी सवाल
इसके अलावा विपक्षी पार्टियां भी बंगाल, बिहार समेत कई राज्यों में इस प्रक्रिया की कड़ी आलोचना कर चुकी हैं. इस प्रक्रिया से योग्य वोटर प्रभावित हो सकते है. इस रिविजन का मकसद सही और अपडेटेड वोटर लिस्ट सुनिश्चित करना है.



