टीएमसी में जारी अंतर्कलह के बीच शनिवार (4 जुलाई ) सुबह मामले में एक नया मोड़ आ गया, जब कोलकाता स्थित तृणमूल भवन पर रिताब्रता बनर्जी गुट द्वारा लगाए गए तालों को भवन मालिकों के प्रतिनिधियों ने कथित तौर पर बागी गुट से चाबियां हासिल करके खोल दिया. इस घटनाक्रम के बाद तृणमूल कांग्रेस के बागी नेताओं और ममता बनर्जी समर्थकों के बीच विवाद और बढ़ गया. अब दोनों पक्ष खुलकर पार्टी कार्यालय पर अपना अधिकार जता रहे हैं.
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि भवन मालिकों का एक प्रतिनिधि इमारत परिसर पहुंचा और कथित तौर पर रिताब्रता बनर्जी के गुट से हासिल डुप्लिकेट चाबियों से भवन के ताले खोल दिए. इसके बाद, भवन मालिकों के प्रतिनिधि ने मेट्रोपॉलिटन इलाके में स्थित किराये की इस इमारत की दूसरी और तीसरी मंजिल पर ‘मरम्मत का काम’ शुरू करने के लिए प्रवेश किया. फिलहाल इसी इमारत में पार्टी का कामकाजी मुख्यालय है. स्थानीय प्रगति मैदान थाने के पुलिसकर्मियों और केंद्रीय बल के जवानों की मौजूदगी में यह घटनाक्रम हुआ. स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए उन्हें वहां तैनात किया गया था.
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इमारत पर दावा
रिताब्रता गुट के विधायक और मुख्य सचेतक अखरुज्जमां ने कहा कि भवन मालिकों के साथ समझौते पर पार्टी की ओर से फिरहाद हकीम ने हस्ताक्षर किए थे. उनके अनुसार, हकीम अब उनके गुट के साथ हैं, इसलिए इमारत से जुड़े फैसले वही करेंगे. अखरुज्जमां ने बताया कि भवन मालिकों से बात कर तीसरी और चौथी मंजिल के ताले खुलवाए गए हैं, जहां टीएमसी के युवा, महिला, छात्र और श्रमिक संगठनों के दफ्तर खोलने की योजना है.
मुख्यालय पर कब्जे की जंग
शुक्रवार को विवाद तब और बढ़ गया, जब रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने पार्टी मुख्यालय का नियंत्रण संभालकर ताले बदल दिए और नए बैनर लगाकर यहीं से काम करने का ऐलान किया. इससे एक दिन पहले बागी गुट ने निर्वाचन आयोग के समक्ष पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर अपना दावा पेश किया था. फिरहाद हकीम, जावेद खान, संदीपन साहा और अखरुज्जमां भी उनके साथ मौजूद थे.उन्होंने ईएम बाइपास स्थित कार्यालय के अंदर बैठक की और दावा किया कि उनका गुट ही ‘असली तृणमूल’ है.कुछ ही देर बाद ममता बनर्जी समर्थक टीएमसी विधायक कुणाल घोष वहां पहुंचे और इस कदम की कड़ी आलोचना की.
बैनर से बवाल
अखरुज्जमां ने आरोप लगाया कि रिताब्रता गुट ने पार्टी कार्यालय पर ‘कब्जा’ कर लिया है. घोष ने आरोप लगाया कि यह सब राज्य सरकार और पुलिस के समर्थन से हुआ है. शुक्रवार को मेट्रोपॉलिटन स्थित कार्यालय में लगे बैनर में अरूप रॉय को पार्टी अध्यक्ष के रूप में दिखाया गया था, हालांकि बैनर में किसी की तस्वीर नहीं थी. इसके विपरीत, कालीघाट गुट द्वारा लगाए गए फ्लेक्स में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तस्वीर थी. बागी गुट ने कहा कि वह ममता बनर्जी की तस्वीरों को नहीं हटाएगा क्योंकि वह अब भी उन्हें अपना मार्गदर्शक मानता है.
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