Ram Mandir Pran Pratishtha: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को भव्य राम मंदिर का उद्घाटन होना है. इसको लेकर देश भर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. देश के प्रतिष्ठित लोगों को मंदिर उद्घाटन के लिए पत्र भेजा जा रहा है. इसी बीच देश से सात समंदर अमेरिका में बसे भारतीयों के लिए भी विश्व हिंदू परिषद कार्यक्रम का आयोजन करने जा रहा है.
इस कार्यक्रम के मुताबिक राम मंदिर के उद्घाटन से लगभग एक महीने पहले भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों के लिए मंदिर के इतिहास को दर्शाने वाले पांच भाग वाली एक वेबिनार श्रृंखला आयोजित की जाएगी. इस वेबिनार श्रृंखला का आयोजन विहिप की अमेरिकी इकाई और अमेरिका के हिंदू विश्वविद्यालय मिलकर कर रहे हैं.
9 दिसंबर से शुरू होगी वेबिनार की श्रंखला
विहिप की अमेरिकी इकाई और अमेरिका के हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि विहिप ‘अयोध्या में श्री राम मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए हिंदुओं का 500 साल का संघर्ष’ नामक विषय पर वेबिनार नौ दिसंबर से शुरू होगा. बयान के अनुसार इस वेबिनार में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के (सेवानिवृत्त) क्षेत्रीय निदेशक (उत्तर) के के मोहम्मद की एक प्रस्तुति भी शामिल है.
राम मंदिर के आयोजन के लिए अयोध्या में काफी तैयारियां चल रही हैं. 22 जनवरी 2024 को देश के गणमान्य लोगों की उपस्थिति में इस मंदिर में भगवान श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी.
कैसे बसी अयोध्या?
ऐसा कहा जाता है कि सतयुग में वैवस्वत मनु ने अयोध्या को बसाया था. यहीं प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ जिसका जिक्र वाल्मीकि की रामायण में है. सालों तक चले राम राज्य के बाद जब श्रीराम ने जल समाधि ली तो अयोध्य सूनी हो गई. दशकों बाद उज्जयिनी के राजा विक्रमादित्य जब यहां आखेट करने आए तो उन्हें पता चला कि ये श्रीराम की अवध भूमि है. इसके बाद उन्होंने यहां श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण कराया जिसमें काले रंग के कसौटी पत्थर वाले 84 स्तंभ थे.
14वीं शताब्दी में जब भारत में मुगलों का शासन हुआ तो श्रीराम जन्मभूमि को नष्ट कर वहां बाबरी बना दी गई. इतिहासकारों के मुताबिक 1525 में राम जन्मभूमि मंदिर को बाबर के सेनापति मीर बांकी ने ध्वस्त करवाया था.
मंदिर के मुख्य शिखर की ऊंचाई 161 फीट
बाबरी मस्जिद और राम जन्मभूमि मंदिर पर सालों चले विवाद के बाद अब राम मंदिर फिर से बन गया है. मंदिर के लिए कुल 67 एकड़ जमीन लाई गई जिसमें 2 एकड़ में मंदिर बन रहा है. पहले मंदिर के मुख्य शिखर की ऊंचाई 128 फीट थी. अब यह 161 फीट होगी. तीन की जगह पांच गुंबद और एक मुख्य शिखर होगा.
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