Modi Cabinet Expansion: मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में संभावित कैबिनेट विस्तार और फेरबदल को लेकर चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं. लंबे समय से इस संबंध में अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रपति से हुई मुलाकात के बाद इन चर्चाओं को और बल मिला है.
जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे से बढ़ी अटकलें
जॉर्ज कुरियन मोदी मंत्रिपरिषद में शामिल एकमात्र ईसाई मंत्री थे. वह केरल में भाजपा के पुराने नेताओं में गिने जाते हैं और पार्टी की शुरुआती दौर से ही सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं. हालांकि वे मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद थे. उनके इस्तीफे के बाद मंत्रिमंडल में बदलाव की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है.
रवनीत सिंह बिट्टू का भविष्य भी चर्चा में
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा गया है. ऐसे में उनके मंत्री पद को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा उन्हें राज्य में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है. एनडीए सरकार में कई सहयोगी दल शामिल हैं. ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल के दौरान सभी दलों को प्रतिनिधित्व देना भाजपा नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है. इसी वजह से कुछ विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल बड़े बदलाव की बजाय सीमित फेरबदल हो सकता है.
संगठन और सरकार दोनों में बदलाव की चर्चा
हाल ही में पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया है. वहीं हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा की कमान सौंपी गई है. भाजपा लंबे समय से ‘वन मैन, वन पोस्ट’ की नीति पर जोर देती रही है. ऐसे में दोनों नेताओं के मंत्री पद छोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के दिनों में मंत्रियों के कामकाज की विस्तृत समीक्षा की थी. इस दौरान विभिन्न मंत्रालयों की प्रस्तुतियां देखी गईं और प्रदर्शन के आधार पर आकलन किया गया. माना जा रहा है कि संभावित फेरबदल में प्रदर्शन भी एक अहम आधार बन सकता है.
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संगठन में नई जिम्मेदारियों की तैयारी
भाजपा अध्यक्ष नीतिन नवीन संगठन के विस्तार और नई टीम को लेकर लगातार मंथन कर रहे हैं. ऐसे में कुछ नेताओं को सरकार से संगठन में भेजे जाने और कुछ नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की चर्चा है. भाजपा में 75 वर्ष से अधिक आयु वाले नेताओं को लेकर लंबे समय से एक अनौपचारिक राजनीतिक परंपरा की चर्चा होती रही है. ऐसे में कुछ वरिष्ठ नेताओं के स्वास्थ्य और उम्र को देखते हुए भी बदलाव की संभावनाएं जताई जा रही हैं. हालांकि अंतिम फैसला प्रधानमंत्री और पार्टी नेतृत्व के हाथ में होगा.
पश्चिम बंगाल को मिल सकता है ज्यादा प्रतिनिधित्व
हालिया राजनीतिक परिस्थितियों के बाद पश्चिम बंगाल को केंद्र सरकार में अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है. भाजपा वहां से किसी नए चेहरे को मंत्रिमंडल में शामिल कर सकती है. उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष चुनाव होने हैं. ऐसे में राज्य का प्रतिनिधित्व बढ़ाने को लेकर भी चर्चा है. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में समाप्त होने वाला है. दोनों को दोबारा राज्यसभा भेजा जाएगा या नहीं, इस पर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा जारी है.
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पंजाब और महाराष्ट्र के समीकरण भी अहम
पंजाब में भाजपा अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है. इसी वजह से राज्य को अतिरिक्त प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है. वहीं महाराष्ट्र में सहयोगी दलों और बदलते राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए कुछ नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है.
राज्यपाल और राजदूत नियुक्तियों की भी चर्चा
कर्नाटक, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के राज्यपालों का कार्यकाल समाप्ति की ओर है. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल का कार्यकाल भी पहले ही पूरा हो चुका है. ऐसे में चर्चाएं हैं कि मंत्रिमंडल से बाहर होने वाले कुछ नेताओं को राज्यपाल या राजदूत जैसी जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं.



