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‘धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिया तो…’, CJP का क्या है ‘प्लान बी’? आशुतोष रांका ने दिया जवाब

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केंद्र सरकार के साथ हुई बैठक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने साफ कर दिया है कि उसकी सबसे बड़ी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने कहा कि मुआवजे और कानूनी मामलों पर सरकार की ओर से सकारात्मक रुख जरूर देखने को मिला है, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अब तक कोई ठोस फैसला नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि अगर सरकार इस मांग पर स्पष्ट जवाब नहीं देती है तो ऐसी बैठकों का कोई मतलब नहीं रह जाता और पार्टी आगे की रणनीति पर काम करेगी.

‘मुआवजे और कानूनी मामलों पर सकारात्मक जवाब मिला’

आशुतोष रंका ने कहा कि सरकार के साथ हुई बैठक में मुआवजे और कानूनी मामलों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली. उन्होंने बताया कि इन मुद्दों पर सहमति बनी है और उन्हें उम्मीद है कि आज सरकार की ओर से इस संबंध में लिखित सहमति भी मिल जाएगी. उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ी है, लेकिन आंदोलन की मुख्य मांग अब भी अधूरी है.

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सरकार का यही रवैया रहा तो अपनाएंगे कड़ा रुख’

CJP  के  राष्ट्रीय प्रवक्ता ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार का यही रवैया जारी रहा तो पार्टी को मजबूर होकर आंदोलन को और तेज करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि अगर सरकार उनकी मुख्य मांगों पर फैसला नहीं करती है तो संगठन कड़ा रुख अपनाने के लिए बाध्य होगा.

सरकार की ओर से 47 एनटीए अधिकारियों को हटाए जाने के फैसले पर भी आशुतोष ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि इस फैसले के सभी पहलुओं को देखना होगा, लेकिन इससे मूल सवाल खत्म नहीं हो जाता. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी लगातार यही कह रही है कि अंतिम जवाबदेही शिक्षा मंत्री की है, क्योंकि NEET पेपर लीक और उसके बाद कथित तौर पर छात्रों की आत्महत्या जैसे मामलों की सीधी जिम्मेदारी शिक्षा मंत्रालय की बनती है.

‘शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना ही होगा’

ने कहा कि उनकी पार्टी का मानना है कि इन घटनाओं की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की है और उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए. उन्होंने कहा कि पार्टी केवल इस्तीफे की मांग ही नहीं कर रही, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों को लेकर भी लगातार चर्चा कर रही है.

सरकार को सौंपा गया मांगों का चार्टर

आशुतोष ने बताया कि सरकार के साथ हुई बैठक के दौरान पार्टी ने अपनी मांगों का विस्तृत चार्टर भी सौंप दिया है. उन्होंने कहा कि यह मांगपत्र सरकार को औपचारिक रूप से दे दिया गया है और अब पार्टी को सरकार के अगले कदम का इंतजार है. साथ ही उन्होंने दोहराया कि आंदोलन की दिशा आगे सरकार के रुख पर निर्भर करेगी.



CJP और सरकार के बीच तीसरे दौर की बैठक, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होगा या नहीं? पढ़ें अपडेट

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पेपर लीक और एजुकेशन सिस्टम में सुधार को लेकर जारी आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और केंद्र सरकार के बीच आज शनिवार (25 जुलाई) को दोपहर साढ़े तीन बजे तीसरे दौर की अहम बैठक होगी. इस बातचीत में एक बार फिर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग सबसे प्रमुख मुद्दा रहने की संभावना है.

शुक्रवार को दोनों पक्षों के बीच दूसरे दौर की बातचीत हुई थी. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि सीजेपी ने सरकार के सामने 3 प्रमुख मांगें और परीक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़े 5 सुझाव रखे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार कर रही है. हालांकि सीजेपी ने साफ कर दिया है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर वह किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी. 

सीजेपी नेताओं का कहना है कि तीसरे दौर की बातचीत में सरकार को इस मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख बताना होगा. बैठक के बाद सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने दावा किया कि सरकार ने आंदोलन के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के स्वजन को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग पर सैद्धांतिक सहमति जताई है. हालांकि सरकार की ओर से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.

सरकारी सूत्रों का कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का सवाल नहीं उठता. सरकार का मानना है कि पद छोड़ना समाधान नहीं है और वह शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाकर जवाब देना चाहती है. देशभर में सीजेपी का आंदोलन जारी है. कई विपक्षी दल, जिनमें कांग्रेस भी शामिल है छात्रों की मांगों और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग का समर्थन कर रहे हैं.

इन्हीं सब मुद्दों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 26 दिनों का आमरण अनशन कर चुके हैं, जिसके बाद सरकार और सीजेपी के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ. अब सबकी निगाहें आज दोपहर होने वाली तीसरे दौर की वार्ता पर टिकी हैं. 

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CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा है कि संगठन को मुआवजे और कानूनी कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर आज एक लिखित समझौता मिलने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार के साथ बातचीत चल रही है और संगठन को उम्मीद है कि इन विषयों पर आश्वासन दिया जाएगा. आशुतोष रांका ने कहा कि आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जुड़ी है. उन्होंने कहा कि संगठन सरकार की ओर से इस मांग पर आने वाली प्रतिक्रिया का भी इंतजार कर रहा है.

आशुतोष रांका ने कहा कि अगर धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. उनके अनुसार, ऐसी स्थिति में सीजेपी को जल्द ही आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए एक नया देशव्यापी आह्वान जारी करना पड़ सकता है. रांका ने कहा कि आंदोलन से जुड़े लोग अपनी मांगों को लेकर गंभीर हैं और उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनकी बातों पर सकारात्मक निर्णय लेगी. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आगे की रणनीति सरकार की प्रतिक्रिया और बातचीत के नतीजों पर निर्भर करेगी.

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CJP का मुख्य मुद्दा क्या है?

CJP का कहना है कि मुआवजे, कानूनी कार्रवाई और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है. संगठन का मानना है कि इन मामलों में स्पष्ट निर्णय और जिम्मेदारी तय होना जरूरी है, ताकि छात्रों और उनके परिवारों की चिंताओं का समाधान हो सके. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा को लेकर फैसला लिया जाएगा और अगर प्रमुख मांगों पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो विरोध प्रदर्शन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है.

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‘मेट्रो बंद करो, रास्ते बंद करो और…’, राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर कसा तंज, पीएम मोदी को लेकर क्या कहा?

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राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बीच 18 मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने के फैसले पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के आंदोलन को रोकने के लिए मेट्रो स्टेशन बंद कर सकती है, सड़कों पर पाबंदियां लगा सकती है, इंटरनेट सेवाएं बाधित कर सकती है और आम लोगों की आवाजाही मुश्किल बना सकती है, लेकिन बार-बार हो रहे पेपर लीक को रोकने में पूरी तरह विफल रही है. राहुल गांधी ने कहा कि अपने अधिकारों की मांग कर रहे छात्रों के साथ सरकार का रवैया बेहद कठोर और असंवेदनशील है.

राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने लिखा, “मेट्रो बंद करो. रास्ते बंद करो. दुकानें बंद करो. Internet बंद करो. खाना बंद करो. अपना हक़ मांग रहे छात्रों के ख़िलाफ सरकार ने ये क्रूर कदम उठाए. बस एक चीज बंद नहीं कर पाए, मोदी जी – पेपर लीक.”

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18 मेट्रो स्टेशन अगले आदेश तक बंद

दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने शनिवार सुबह 7:30 बजे से राजधानी के 18 मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद रखने की घोषणा की. डीएमआरसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि सुरक्षा कारणों से यह फैसला लिया गया है और अगले निर्देश तक इन स्टेशनों पर यात्रियों का प्रवेश और निकास बंद रहेगा. हालांकि, राजीव चौक, मंडी हाउस और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी. डीएमआरसी ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद भी जताया है.

नई दिल्ली स्टेशन बंद करने की वजह नहीं बताई

डीएमआरसी ने अपने आधिकारिक बयान में यह जरूर बताया कि नई दिल्ली सहित 18 मेट्रो स्टेशन बंद किए जा रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि नई दिल्ली स्टेशन को बंद करने के पीछे क्या विशेष कारण है.

इन मेट्रो स्टेशनों पर लगी रोक

जिन मेट्रो स्टेशनों को बंद किया गया है उनमें लोक कल्याण मार्ग, नई दिल्ली, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ, जनपथ, मंडी हाउस, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग, शिवाजी स्टेडियम और झंडेवालान शामिल हैं. झंडेवालान स्टेशन को बाद में इस सूची में जोड़ा गया.

20 जुलाई के प्रदर्शन के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा

इन स्टेशनों को 20 जुलाई को हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद बंद किया गया है. उस दिन कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थकों और बड़ी संख्या में छात्रों ने जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला था. प्रदर्शनकारी कथित NEET पेपर लीक समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए राजधानी के कई इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था. इसके बाद से दिल्ली में सुरक्षा इंतजाम और सख्त कर दिए गए हैं.

Education Minister Dharmendra Pradhan resigns; Abhijit Dipke reaction goes viral

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Dharmendra Pradhan resigns: कॉकरोच जनता पार्टी ने जो मुहिम शुरु की थी उसमें उनको कामयाबी मिल गई है। जी हां, जंतर मंतर में चल रहे प्रोटेस्ट का असर दिखा है और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है।

Dharmendra Pradhan

इस खबर के सामने आते ही सीधे जंतर मंतर से एक वीडियो सामने आया है जिसने लोगों खुश कर दिया है। सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके का रिएक्शन इस खबर को सुनकर ऐसा था कि आप भी उछल पड़ेंगे।

काफी समय से NEET पेपर लीक पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को कामयाबी मिल गई है। अभिजीत दीपके इसी मुद्दे के साथ भारत आए थे और वो कामयाब हुए हैं। सोनम वांगचुक का अनशन और छात्रों की मेहनत रंग लाई है।

खुशी से इमोशनल हो गए अभिजीत

वायरल वीडियो में आप देखेंगे कि अभिजीत दीपके पहले इमोशनल होकर बैठ जाते हैं फिर वहां पर छात्रों को संबोधित करते हुए ये खबर उनको देते हैं। इसके बाद छात्रों के चिल्लाने की आवाज आपको साफ साफ सुनाई देगी। जंतर मंतर पर इसके पहले भी कई आंदोलन हुए हैं लेकिन आजाद भारत का ये आंदोलन सदियों तक याद रखा जाएगा। पीएम मोदी ने भी सामने आकर ये साफ किया था जो कि भी गुनाहगार हैं उनको सजा होगी और फास्ट ट्रैक में मामला चलेगा।

कमेंट्स कर रहे हैं लोग

मोदी सरकार के झुकने के बाद शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने के बाद लोगों के ढेरों कमेंट्स आ रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, ”ये देश की जीत है।” एक ने लिखा, ”प्लीज़ मुझे बताइए कि यह सच है, या क्या बात है, क्योंकि मैं इस खबर को लेकर बहुत उत्साहित हूँ। अल्लाह का शुक्र है, अल्हम्दुलिल्लाह।” एक ने लिखा, ”अब मोदी के इस्तीफ़े का समय आ गया है।” एक ने लिखा, ”बहुत बढ़िया बच्चों, अब PM को जाना होगा।” एक ने लिखा, ”मेहनत रंग लाई।”

बता दें कि इस आंदोलन में सलमान खान समेत कई सितारे भी साथ थे और बच्चों के हक में ही बात की थी।

बैरिकेड्स और लोहे की चादरों से जंतर मंतर प्रोटेस्ट साइट सील, भारी पुलिस फोर्स के साथ सड़कें बंद

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CJP के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है. प्रदर्शन लगातार जारी रहने के कारण प्रशासन ने पूरे जंतर-मंतर क्षेत्र को बैरिकेड लगाकर सील कर दिया है. इलाके में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. जंतर-मंतर के आसपास आने-जाने वाले रास्तों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसी तरह की अप्रिय घटना न हो.

सुरक्षा एजेंसियां पूरे इलाके पर नजर बनाए हुए हैं. प्रदर्शन के चलते जंतर-मंतर और उसके आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं. फिलहाल जंतर-मंतर पर भारी सुरक्षा बल तैनात है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है. हालांकि, पूरे इलाके में लोहे के बड़े-बड़े बैरिकेट्स को जंजीरों से लपेटा गया है. उन्हें जगह-जगह पर सील किया गया है, ताकी कोई भी प्रदर्शनकारी उसमें सेंध न लगा सके.

 

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जंतर-मंतर पर इंटरनेट सेवाएं बंद

जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दिए गए हैं. CJP 20 जून से मध्य दिल्ली में प्रदर्शन कर रही है और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है. इस बीच कानूनी सेवा संगठन सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर ने अपनी याचिका में केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से 17, 20, 22 और 23 जुलाई को मध्य दिल्ली के कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करने के लिए जारी किए गए आदेशों को रद्द करने का अनुरोध किया.

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How Vipul Razdan Is Shaping the Way Machines Learn to Understand the World

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Some researchers spend a career perfecting one narrow corner of artificial intelligence. Others treat AI the way a master craftsman treats a well-worn toolkit as something to be carried from problem to problem, reshaped each time to fit whatever is broken. The body of work explored here belongs firmly to the second category, moving comfortably between distributed computing infrastructure, financial disclosures, music archives, and the grammar of human language. Across eight distinct research contributions, a consistent thread emerges: take a challenge long dismissed as either too costly to fix or too messy to formalize, and recast it as a rigorous, testable optimization problem.

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That approach is most visible in Razdan’s paper “RackWeave: Hierarchical Gradient Exchange for Distributed AI,” which tackles one of the most expensive bottlenecks in modern machine learning the network traffic generated when thousands of processors synchronize during training. By redesigning gradient exchange as a balanced service co-engineered across network cards, memory, and CPUs, and by confining most synchronization traffic within the rack rather than across it, the framework restores compute-bound performance and delivers measurable throughput and cost gains over existing sharded systems, all without discarding the training stacks organizations already rely on.

A parallel concern with efficiency under real-world constraints appears in “Adaptive Parameter Setting for Genetic Algorithms Using Reinforcement Learning: A Case Study on the Capacitated Vehicle Routing Problem.” Logistics networks routinely rely on genetic algorithms to plan delivery routes, but static, manually tuned parameters often produce mediocre results. This research instead lets a reinforcement learning agent dynamically adjust those parameters mid-search, outperforming static configurations on benchmark routing problems and pointing toward broader use in other combinatorial optimization tasks where hand-tuning has long been the default.

The same instinct for structure without brittle rules drives “MixSense: AI Optimization for Contiguous Music Segmentation at Scale,” which reframes the task of splitting a continuous music stream into individual tracks as a global optimization problem rather than a series of local, heuristic guesses. Using spectral embeddings and dynamic-programming inference, the method finds boundary points without arbitrary thresholds, and was validated against a hand-annotated corpus exceeding 640 hours of audio a scale that speaks to its readiness for production use.

Language poses a different kind of challenge, one Razdan takes up in “Substitute-Space Embeddings for Label-Free Syntax: Unsupervised AI for POS Discovery.” Rather than relying on costly labeled data to teach a system grammatical categories, this work embeds words alongside probabilistic substitutes in a shared space where clusters naturally align with syntactic roles. Tested across English and more than seventeen other languages, the approach achieved state-of-the-art results on standardized linguistic benchmarks, offering a scalable path for languages where labeled data is scarce or unavailable.

A companion effort in natural language understanding, “Complementary Priors Meet Margin: A Hybrid AI Stack for Robust Sentiment Judgments,” fuses generative language models with high-margin discriminative classifiers to judge sentiment in long-form text such as movie reviews. The research is notable less for the accuracy it achieves than for what it clarifies methodologically: precisely when and why older generative techniques still add value when combined with modern discriminative methods, offering a practical blueprint for resource-constrained text-understanding systems.

Financial markets receive similar treatment in “Vector Semantics at Scale: An AI Pipeline for Financial Text Similarity,” an end-to-end system that converts unstructured corporate filings into vector representations and computes interpretable similarity signals across firms and time. By coupling classic natural language processing with distributed, cloud-scale computing, the work offers regulators, analysts, and researchers a reproducible way to detect when companies’ accounting narratives echo one another a signal with direct relevance to investor behavior and disclosure quality.

Perhaps the most conceptually distinct of Razdan’s contributions is “Bounding the Long Tail: AI Norms for Decision-Making under Negligible Probabilities,” which addresses a problem more philosophical than computational: how should autonomous systems handle offers or threats involving vanishingly small probabilities paired with extreme outcomes? By introducing a rationally grounded probability threshold and design norms including utility bounding and calibrated priors, the research gives AI agents a principled way to resist exploitation by adversarial, Pascal-style gambles, a safety-oriented contribution relevant to any system making high-stakes decisions on incomplete information.

Taken together, these eight projects reveal less a scattershot curiosity than a deliberate methodology applied wherever it is needed: distributed systems, logistics, audio engineering, computational linguistics, sentiment analysis, financial disclosure, and the theoretical foundations of safe autonomous decision-making. Vipul Razdan’s research does not treat these as separate specialties requiring separate toolkits, but as variations on a single discipline identifying where a problem’s apparent difficulty comes from unnecessary heuristics or missing structure, and replacing it with something formal, testable, and scalable.

The cumulative impact of Razdan’s range is difficult to overstate. Organizations training large models, logistics firms optimizing delivery networks, streaming platforms managing vast audio libraries, linguists working in under-resourced languages, financial regulators auditing disclosures, and AI safety researchers designing robust decision rules each stand to benefit from at least one strand of this work. In a field frequently criticized for narrow specialization, that breadth anchored by consistently rigorous, empirically validated methods stands out as a distinguishing mark of this body of research.

कर्तव्य पथ हिंसा केस में बड़ा खुलासा, हत्या के प्रयास समेत 13 धाराओं में FIR; FRS कैमरों से 2 हजार से ज्यादा संदिग्धों की पहचान

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई को हुई हिंसा को लेकर कर्तव्य पथ थाना पुलिस की एफआईआर में कई बड़े खुलासे हुए हैं. संसद और रेल भवन के पास हुई झड़प के मामले में पुलिस ने हत्या के प्रयास (BNS 109(1)) समेत 13 गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है. एफआईआर में दावा किया गया है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की, पुलिस पर पथराव और चप्पलें फेंकी, मारपीट की और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया. वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस हिंसा में 129 पुलिसकर्मी और 60 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हुए.

इंस्पेक्टर की शिकायत पर दर्ज हुई FIR

कर्तव्य पथ थाने में दर्ज एफआईआर थाने में तैनात एक इंस्पेक्टर की शिकायत पर दर्ज की गई है. इसमें रफी मार्ग पर हुई हिंसा के दौरान पुलिस की ओर से सामने आए घटनाक्रम का विस्तृत विवरण दर्ज किया गया है. एफआईआर के अनुसार, इंस्पेक्टर की ड्यूटी 20 जुलाई की सुबह 5 बजे से सी-हेक्सागन, जोन-11 (पिंक बूथ) पर लगी थी. इसी दौरान वायरलेस के जरिए सूचना मिली कि रेल भवन राउंडअबाउट के पास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हो गए हैं. सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, जहां हजारों प्रदर्शनकारी मौजूद थे.

‘बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश’

एफआईआर में कहा गया है कि मौके पर मौजूद पुलिस ने लाउडस्पीकर के माध्यम से घोषणा की कि BNSS की धारा 163 लागू है और प्रदर्शन की अनुमति नहीं है. प्रदर्शनकारियों से वहां से हटने की अपील भी की गई, लेकिन चेतावनी के बावजूद भीड़ नहीं हटी और लगातार नारेबाजी करती रही. पुलिस का आरोप है कि इसके बाद कुछ लोगों ने भीड़ को बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़ने के लिए उकसाया. एफआईआर के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की और पुलिसकर्मियों को चारों तरफ से घेर लिया.

‘पुलिस पर पत्थर और चप्पलें फेंकी गईं’

एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की और उन पर पत्थर तथा चप्पलें फेंकीं. पुलिस का दावा है कि हमले में कई जवान घायल हो गए. एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हत्या की नीयत से हमला किया. इसी आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1) यानी हत्या के प्रयास सहित कुल 13 गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है.

सरकारी संपत्ति और वाहनों को नुकसान पहुंचाने का आरोप

दिल्ली पुलिस ने एफआईआर में आरोप लगाया है कि हिंसा के दौरान सरकारी संपत्ति और निजी वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाई गई, जिससे हालात और बिगड़ गए. एफआईआर के मुताबिक, संसद और आसपास स्थित अन्य महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने हालात को नियंत्रित करने के लिए हल्का लाठीचार्ज किया. इसके साथ ही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए. पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए की गई.

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हत्या के प्रयास समेत 13 धाराओं में मामला दर्ज

कर्तव्य पथ थाने में दर्ज एफआईआर में हत्या के प्रयास के अलावा सरकारी कर्मचारी पर हमला, सरकारी कार्य में बाधा डालना, गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और लोगों की जान को खतरे में डालने जैसी कुल 13 गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

फेशियल रिकग्निशन सिस्टम से हो रही पहचान

दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया कि जंतर-मंतर आने वाले लोगों पर नजर रखने के लिए फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है. पुलिस का दावा है कि इस तकनीक की मदद से अब तक 2 हजार से अधिक ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और जो जंतर-मंतर पहुंचे थे.

Raha Kapoor to make her debut in ‘Ramayana’; Ranbir Kapoor makes the announcement

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Raha Debut Film: रणबीर कपूर इस वक्त अपनी फिल्म रामायण को लेकर बिजी हैं। काफी जल्दी फिल्म का ट्रेलर धमाका करने वाला है। पहले ये ट्रेलर 24 जुलाई को रिलीज होने वाला था लेकिन किसी कारणवश इसको पोस्टपोन कर दिया गया था।

Raha Debut

मेकर्स ने इस ट्रेलर को क्यों टाला इसको लेकर किसी तरह की पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है। रणबीर कपूर इस फिल्म में भगवान श्री राम का किरदार निभा रहे हैं और वो खुद काफी एक्साइटेड हैं। लेकिन इस बीच उनकी बेटी राहा को लेकर खबर आ रही है कि वो भी इस फिल्म से डेब्यू करने वाली हैं।

रामायण से राहा कपूर का डेब्यू

अगर आप ये सोच रही हैं कि राहा कपूर इस फिल्म के हिस्सा होने वाली हैं तो जरा ठहरिए। दरअसल वो फिल्म में काम करने का नहीं बल्कि फिल्म देखने का डेब्यू करेंगी। जी हां, ये पहली बार होगा जब आलिया भट्ट किसी फिल्म को देखेंगे। रणबीर कपूर का कहना है कि, ”मैं अपनी बेटी को ये फिल्म दिखाने के लिए बहुत एक्साइटेड हूं।

यह उसकी पहली फिल्म होगी, जिसे वो बड़े पर्दे पर देखेगी।’ रणबीर कपूर का मानना है कि ये जैसी फिल्म है इस तरह की फिल्मों को बच्चों को दिखाना काफी जरूरी है। राहा की बात करें तो वो अभी काफी छोटी हैं। नवंबर में राहा कपूर 4 साल की हो जाएंगी। 6 नवंबर 2022 को उनका जन्म हुआ था।

रामायण को लेकर फैंस काफी समय से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म में यश रावण के किरदार में नजर आने वाले हैं। इसके अलावा सनी देओल हनुमान के किरदार में दिखने वाले हैं। सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर काफी चर्चा है।रामायण काफी बड़े बजट की फिल्म है जिसको नितेश तिवारी ने निर्देशित किया है।