अगर आपको लगता है कि भारतीय पासपोर्ट होने का मतलब आप भारतीय नागरिक हैं, तो आप अकेले नहीं हैं, लेकिन कानूनी तौर पर यह पूरी तरह सही नहीं है. 24 जून 2026 को 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘पासपोर्ट एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है, नागरिकता का दस्तावेज नहीं.’ इस पर शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने सवाल उठाया, ‘क्या हम गैर-भारतीयों को भी ट्रैवल डॉक्यूमेंट के तौर पर पासपोर्ट देते हैं’? तो जावेद अख्तर ने तो इसे ‘बेतुका’ तक कह दिया. एक्सप्लेनर में समझते हैं आखिर पासपोर्ट क्यों नागरिकता साबित नहीं करता है…
पासपोर्ट के नागरिकता दस्तावेज नहीं होने की 5 बड़ी वजहें हैं…
पहली वजह: पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20
इसके मुताबिक, ‘कानून खुद गैर-नागरिकों को पासपोर्ट जारी करने की इजाजत देता है.’ यह प्रावधान इसलिए रखा गया ताकि विदेशों में रहने वाले उन लोगों को यात्रा की सुविधा मिल सके जो भारतीय नागरिक नहीं हैं, लेकिन भारत से संबंध रखते हैं (जैसे OCI कार्डधारक). इस पावर को सिर्फ MEA के वरिष्ठ अधिकारी इस्तेमाल करते हैं, जिसमें कड़ी सुरक्षा होती है.
अधिनियम की धारा 3 के मुताबिक, ‘कोई भी व्यक्ति भारत से तब तक नहीं जा सकता जब तक उसके पास वैध पासपोर्ट या ट्रैवल डॉक्यूमेंट न हो.’ इसमें ‘नागरिक’ शब्द का इस्तेमाल नहीं हुआ है, बल्कि ‘व्यक्ति’ कहा गया है. यानी कानून खुद पासपोर्ट को नागरिकता से नहीं जोड़ता.
मद्रास हाईकोर्ट ने भी 2023 में एक मामले में धारा 20 का हवाला देते हुए कहा कि यह प्रावधान केंद्र सरकार को गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी करने का अधिकार देता है.
दूसरी वजह: बॉम्बे हाईकोर्ट का 2013 का फैसला
सितंबर 2013 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला दिया. चार अवैध प्रवासियों ने भारतीय नागरिकता का दावा किया था. इन चारों के पास पासपोर्ट, आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र थे. कोर्ट ने साफ कहा, ‘पासपोर्ट, आधार कार्ड या जन्म प्रमाण पत्र अकेले नागरिकता साबित करने के लिए काफी नहीं हैं.’
हाईकोर्ट ने कहा कि 1 जुलाई 1987 के बाद जन्मे लोगों को यह साबित करना होगा कि उनके माता-पिता में से कोई एक या दोनों भारतीय नागरिक हैं. कोर्ट ने उन चारों की नागरिकता का दावा खारिज कर दिया और उन्हें 6 महीने की जेल की सजा सुनाई. यानी कोर्ट ने 13 साल पहले ही साफ कर दिया था कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है.
अगस्त 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने फिर दोहराया, ‘आधार, पैन कार्ड, पासपोर्ट या वोटर ID को नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता.’ जस्टिस अमित बोरकर ने बाबू अब्दुल रूफ सरदार मामले में कहा, ‘सिटीजनशिप एक्ट, 1955 ही नागरिकता तय करने का मुख्य और नियंत्रित कानून है. सिर्फ आधार कार्ड, पैन कार्ड या वोटर ID होने से कोई नागरिक नहीं बन जाता.’
तीसरी वजह: सुप्रीम कोर्ट का 2025 का फैसला
12 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने बिहार स्पेशल इंटेन्सिव रिवीजन (SIR) मामले में कहा, ‘आधार का इस्तेमाल सिर्फ पहचान के प्रमाण के तौर पर किया जाएगा, नागरिकता के सबूत के तौर पर नहीं.’
सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने फिर दोहराया, ‘आधार नागरिकता का पूर्ण प्रमाण नहीं है. यही वजह है कि इसे सिर्फ एक सहायक दस्तावेज के रूप में शामिल किया गया है.’ कोर्ट ने यह भी कहा कि आधार अधिनियम खुद के मुताबिक, आधार नंबर नागरिकता या निवास स्थापित नहीं करता है.’ हालांकि यह फैसला आधार पर था, लेकिन इसने नागरिकता और पहचान के बीच का फर्क साफ कर दिया. कोई भी सरकारी दस्तावेज अपने आप में नागरिकता का प्रमाण नहीं है.
चौथी वजह: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पासपोर्ट की स्थिति
पासपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सिर्फ एक ट्रैवल और आइडेंटिटी डॉक्यूमेंट है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ‘पासपोर्ट विदेश में भारतीयों की राष्ट्रीयता की पुष्टि करता है, लेकिन यह नागरिकता का दस्तावेज नहीं है.’
पासपोर्ट मैनुअल भी कहता है, ‘पासपोर्ट मुख्य रूप से राज्य के अपने नागरिकों को जारी किया गया एक पहचान और यात्रा दस्तावेज है.’
राष्ट्रीयता और नागरिकता में बहुत बारीक फर्क है. राष्ट्रीयता आपके देश से जुड़ाव को दिखाती है, जबकि नागरिकता आपको वोट देने, सरकारी नौकरी पाने और संवैधानिक अधिकारों का हक देती है.
वीजा-फ्री देशों का डेटा भी बढ़ा है:
- 27 देश भारतीयों के लिए वीजा-फ्री हैं.
- 47 देश वीजा ऑन अराइवल है.
- 66 देश इलेक्ट्रॉनिक वीजा देते हैं.
- हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 के मुताबिक, भारत 80वें स्थान पर है और 55 देशों में बिना वीजा या वीजा ऑन अराइवल मिलता है.
पांचवी वजह: भारत में नागरिकता का कोई ‘एक’ दस्तावेज नहीं
भारत में नागरिकता साबित करने के लिए कोई एक दस्तावेज नहीं है. नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत नागरिकता जन्म, वंश, पंजीकरण या क्षेत्र के विलय के जरिए मिलती है.
नागरिकता साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेजों में शामिल हैं:
- जन्म प्रमाण पत्र (1987 से पहले जन्मे लोगों के लिए)
- माता-पिता की नागरिकता के दस्तावेज (1987 के बाद जन्मे लोगों के लिए)
- विदेश मंत्रालय या गृह मंत्रालय से जारी नागरिकता प्रमाण पत्र
- विदेश मंत्रालय से मिला प्राकृतिकरण प्रमाण पत्र या पंजीकरण प्रमाण पत्र
फरवरी 2020 में गृह मंत्रालय ने संसद में साफ कहा, ‘आधार, पासपोर्ट, वोटर ID, PAN कार्ड या जन्म प्रमाण पत्र, इनमें से कोई भी अकेले नागरिकता साबित नहीं करता है.’
विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘पासपोर्ट कई सरकारी एजेंसियों के दस्तावेजों के आधार पर बहुत सावधानी से जांच के बाद जारी किया जाता है.’ यह जांच नागरिकता साबित नहीं करती, यह सिर्फ सफर की इजाजत देती है.
तो फिर पासपोर्ट का मतलब क्या है?
इसका मतलब यह नहीं है कि पासपोर्ट बेकार है. लगभग हर भारतीय नागरिक के पास पासपोर्ट होता है और यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपकी पहचान का सबसे मजबूत दस्तावेज है. लेकिन कानूनी तौर पर, पासपोर्ट नागरिकता साबित नहीं करता है. पासपोर्ट सेवा दिवस 2026 पर MEA ने अहम आंकड़े जारी किए:
- 2025 में 1.5 करोड़ पासपोर्ट और संबंधित सेवाएं दी गईं.
- 1.47 करोड़ ई-पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं. ये चिप-बेस्ड दस्तावेज हैं, जिनमें RFID चिप लगी है.
- ये ई-पासपोर्ट कुल पासपोर्ट का लगभग 10% हैं.
- अब सभी नए पासपोर्ट चिप-बेस्ड ही जारी किए जा रहे हैं.
- देशभर में 500 से ज्यादा पासपोर्ट केंद्र काम कर रहे हैं.
- पुलिस वेरिफिकेशन छोड़कर पासपोर्ट 6 वर्किंग डेज में बन जाता है.
ई-पासपोर्ट की खासियत: RFID चिप में पर्सनल डिटेल्स और बायोमेट्रिक डेटा होता है. इससे नकली पासपोर्ट बनाना मुश्किल हो जाता है और फॉरेन इमिग्रेशन ऑफिसर्स को आसानी होती है. ये चिप्स नासिक की इंडिया सिक्योरिटी प्रेस सप्लाई करती है.
Input By : Ministry of External Affairs



