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‘वो ये समझें कि देश का युवा…’, प्रह्लाद जोशी के नए शिक्षा मंत्री बनने पर CJP ने दिया ये रिएक्शन

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  • CJP प्रवक्ता ने कहा, वे एक माह में मंत्री से मिलेंगे।

नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार (25 जुलाई, 2026) को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है, जिस पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का रिएक्शन सामने आया है.

नए शिक्षा मंत्री को लेकर बोले सौरव दास

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने पर कहा, ‘सरकार से जो हमारी प्रमुख मांगें थीं और जो हमारी चिंताएं थीं, उसे सरकार ने मान लिया है. ये मांगें पूरे देश के युवाओं की आवाज बन गई थीं, इसलिए इस आंदोलन को पूरे देश से समर्थन हासिल हुआ और अब जो भी नए शिक्षा मंत्री बनेंगे, उन्हें यह पता है कि देश का युवा उन्हें देख रहा है. देश का युवा समय आने पर उनसे जवाबदेही की भी मांग करेगा.’ 

उन्होंने कहा, ‘जो नए शिक्षा मंत्री होंगे, उनसे यह कहना है कि वे अच्छा काम करें, युवाओं के हित में काम करें. पेपर लीक पर पूरी तरह से रोक लगाएं और हमारे डिमांड चार्टर में जो पांच सुझाव थे, उन्हें लागू करें.’

एक महीने में नए शिक्षा मंत्री से मिलेंगे- सौरव दास

सौरव दास ने आगे कहा, ‘हम बहुत जल्द ही नए शिक्षा मंत्री से मुलाकात करेंगे. सरकार ने हमसे वादा किया है कि एक महीने के भीतर हम फिर से मिलेंगे. इसके बाद देखते हैं आगे क्या होता है.’

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफे के बाद सीजेपी के बीच खुशी की लहर

केंद्र सरकार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन के बीच जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफे की घोषणा हुई, वैसे ही जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के समर्थकों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई. सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफे की बात सुनकर मंच पर ही घुटनों के बल बैठ गए और स्टेज पर अपने हाथों को जोर-जोर से पटककर खुशी जाहिर करने लगे. 

यह भी पढ़ेंः कौन हैं प्रह्लाद जोशी, जिन्हें धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सौंपी गई शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी?



29 साल पहले जिस पेपर लीक ने बनाया धर्मेंद्र प्रधान को नेता, आज उसी मुद्दे ने छीन ली उनकी कुर्सी!

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57 साल उम्र के शिक्षामंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार इस्तीफा दे दिया है. कभी युवा जोश में इसी पेपर लीक को हथियार बनाकर उन्होंने दक्षिणपंथ की सियासत में कदम रखा. देश के केंद्रीय नेतृत्व का हिस्सा बने. लेकिन एक पेपर लीक और 50 दिन तक चले प्रदर्शन ने उन्हें कुर्सी से त्यागपत्र देने को आखिरकार मजबूर कर दिया.

देश में लंबे अर्से बाद शिक्षा को लेकर आंदोलन चल रहा था. प्रधान ने कहा, ‘राष्ट्रपविरोधी ताकतों को भ्रम फैलाने और स्थिति का फायदा उठाने से रोकने के लिए पद छोड़ने का फैसला किया है.’

जिस मुद्दे ने बनाया नेता, उसी ने छिनी कुर्सी

पिछले कुछ सालों में बीजेपी सरकार के भरोसेमंद केंद्रीय मंत्री बनकर उभरे प्रधान की पहचान कुशल आयोजक, एक मंत्री और एक राजनीतिक प्रबंधक के तौर पर भी है. वह उन गिने चुने ओडिशा के लोगों में हैं, जिन्होंने राजनीति के राष्ट्रीय फलक पर अपनी छाप छोड़ी. लेकिन नियति का खेल देखो, जिस शिक्षा को लेकर उन्होंने 29 साल पहले राजनीतिक मुद्दा बनाया था, वही मुद्दा उनके पद ले गया. 

पेपर लीक के एक आंदोलन से राजनीतिक करियर की शुरुआत

पेपर लीक के एक आंदोलन से उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत हुई. साल 1997 था. प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी. इसके मुख्यमंत्री वल्लभ पटनायक थे. पूरे राज्य में पेपर लीक का मामला गरमाया था. उस समय प्रधान एबीवीपी के राष्ट्रीय सचिव और उत्कल यूनिवर्सिटी से एंथ्रोपोलॉजी की पढ़ाई कर रहे थे. 28 साल के धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में 1500 स्टूडेंट ने भुवनेश्वर के राज्य सचिवालय का घेराव किया. इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता से लाठियां चलाई. इसमें प्रधान गंभीर रूप से घायल हो गए. उनके शरीर की हड्डियां टूटी. आज भी कहा जाता है कि अपनी किस्मत की वजह से ही प्रधान आज जिंदा हैं. 

प्रधान दो बार ABVP के राष्ट्रीय सचिव भी रहे

18 साल के उम्र में एक छात्र के तौर पर उन्होंने रानजीति में कदम रखा. प्रधान ने आरएसएस के स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ABVP में एक सक्रिय आयोजक के रूप में पहचान बनाई.1994 से 1997 के बीच दो बार एबीवीपी के राष्ट्रीय सचिव भी रहे. 

1997 में ओडिशा के इस ऐतिहासिक आंदोलन के बाद वह बीजेपी में शामिल हो गए. उन्होंने बीजेपी की जड़ों को मजबूत किया. इसका नतीजा साल 2024 में दिखा. भाजपा ने ओडिशा में नवीन पटनायक के 24 साल पुराने बीजू जनता दल के शासन को खत्म किया. बीजेपी ने इसी साल पहली बार सरकार बनाई. उन्हें केंद्र में पेट्रोलियम और कौशल विकास जैसे अहम मंत्रालय को संभालने के बाद 2021 में देश का शिक्षामंत्री बनाया. 

यह भी पढ़ें : धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अमित शाह का पहला रिएक्शन, कहा- पद से ज्यादा देश जरूरी

शिक्षामंत्री बनाए जाने के बाद प्रह्लाद जोशी का आया पहला रिएक्शन, बोले- ‘धर्मेंद्र प्रधान ने…’

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25 जुलाई 2026 को आखिरकार छात्रों की मांग के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षामंत्री के पद से इस्तीफा दिया है. उनके इस्तीफे के मंजूर करते हुए सरकार ने अब इस मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंपी है. उन्हें अतिरिक्त प्रभार सरकार की तरफ से सौंपा गया है. अब शिक्षामंत्री बनाए जाने के बाद प्रह्लाद जोशी का रिएक्शन आया है. उन्होंने पीएम मोदी का आभार जताया है. 

कर्तव्य-विनम्रता से जिम्मेदारी स्वीकार करता हूं: प्रह्लाद जोशी

प्रहलाद जोशी ने कहा, ‘मैं कर्तव्य और विनम्रता की भावना के साथ इस जिम्मेदारी को स्वीकार करता हूं. मैं प्रधानमंत्री का आभारी हूं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के पिछले 12 सालों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की गई हैं. पिछले चार-पांच सालों में धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया और कई महत्वपूर्ण पहल की गईं. देश ने नई शिक्षा प्रणाली में उल्लेखनीय प्रगति की है. प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में, मैं अपनी पूरी क्षमता से काम करूंगा और पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियों को निभाऊंगा.’

प्रह्लाद जोशी पहले से केंद्र सरकार में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. इन मंत्रालयों के साथ-साथ वह अब शिक्षा मंत्रालय के कामकाज और नीतिगत फैसलों की निगरानी करेंगे. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि से आने वाले प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ से पांच बार के सांसद हैं. उन्हें पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का करीबी भी माना जाता है.

राष्ट्रपति ने मंजूर किया इस्तीफा

प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत के संविधान के आर्टिकल 75 के खंड (2) के तहत धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्री परिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया है. पीएम की सलाह पर राष्ट्रपति ने निर्देश दिया है. कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूद विभागों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का प्रभार भी सौंपा जाएगा. 

इसके अलावा, प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने निर्देश दिया है कि कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा विभागों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) का प्रभार भी सौंपा जाए।

‘आप 2017 तक UP की सत्ता में थे, आपने क्यों नहीं…’, जौहर यूनिवर्सिटी मामले पर ओवैसी का अखिलेश यादव पर निशाना

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AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार (25 जुलाई, 2026) को उन युवाओं (Gen-Z) की कोशिशों की तारीफ की, जो अपने मकसद में कामयाब रहे और सरकार को युवाओं के सामने झुकने और धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने पर मजबूर किया.

मुरादाबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने भाजपा और RSS पर हिंदुत्व की विचारधारा को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया. ओवैसी ने मुसलमानों से अपील की कि वे उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनावों से पहले उस राजनीति के खिलाफ एकजुट रहें, जिसे उन्होंने बांटने वाली राजनीति कहा.

जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर बिफरे ओवैसी

इस दौरान हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने जौहर यूनिवर्सिटी को गिराने के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी (SP) के नेता अखिलेश यादव पर खासतौर पर निशाना साधा. उन्होंने सवाल किया कि अखिलेश यादव, जो 2017 तक मुख्यमंत्री रहे, ने अपने कार्यकाल के दौरान यूनिवर्सिटी की इमारतों को रेगुलर क्यों नहीं किया, जबकि उत्तर प्रदेश शहरी विकास अधिनियम, 1973 में ऐसा करने की गुंजाइश थी.

ओवैसी ने सभा से पूछा, ‘अखिलेश यादव ने कानून का हवाला देते हुए कहा था कि उत्तर प्रदेश शहरी विकास अधिनियम, 1973 के तहत जौहर यूनिवर्सिटी को रेगुलर किया जा सकता है. मैं सपा के चाटुकारों और समाजवादी पार्टी की गुलामी करने वालों से पूछना चाहता हूं कि आप 2017 तक मुख्यमंत्री थे. आपने जौहर यूनिवर्सिटी को रेगुलर क्यों नहीं किया?’

अखिलेश यादव पर ओवैसी का तीखा हमला

AIMIM प्रमुख ने सपा की इस दलील को पाखंड करार दिया कि पूर्व मंत्री आजम खान ने उन्हें इस मुद्दे के बारे में जानकारी नहीं दी थी. उन्होंने कहा, ‘सपा के लोग कहेंगे- नहीं, आजम खान ने हमें नहीं बताया. तो क्या आप वही करेंगे, जो आजम खान कहेंगे? यह उनका पाखंड है. जब वे मुख्यमंत्री थे, तब वे इमारत को बचा सकते थे, लेकिन अब क्योंकि चुनाव आ रहे हैं, वे आपके सामने ऐसे झूठ पेश कर रहे हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी ने हाल ही में मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया था. यह आदेश उत्तर प्रदेश शहरी योजना और विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27 के तहत नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए दिया गया था.’

यूपी चुनाव से पहले बढ़ रही सियासी सरगर्मी

ओवैसी का यह भाषण उत्तर प्रदेश में बढ़ती राजनीतिक सरगर्मी के बीच आया है. AIMIM प्रमुख ने सत्ताधारी पार्टी के तथाकथित हिंदुत्व एजेंडा के खिलाफ मुसलमानों की एकता पर जोर दिया. इमारतों को गिराने का यह आदेश राज्य की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन गया है और आने वाले चुनावों से पहले कई पार्टियां इसका इस्तेमाल एक-दूसरे पर हमला करने के लिए कर रही हैं.

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अमित शाह पहला रिएक्शन, कहा- पद से ज्यादा देश जरूरी

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हमारे लिए पद से ज्यादा महत्वपूर्ण देश और युवा छात्र हैं. धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई दोपहर में अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि पिछले 10 दिन के घटनाक्रम से उनका मन बेहद दुखी है और यह मुद्दा उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है. उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार देश के युवाओं का सम्मान करती है और पेपर लीक के खिलाफ सुधार के लिए प्रतिबद्ध है.

बीजेपी के लिए देश महत्वपूर्ण: अमित शाह

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ‘बीजेपी के कार्यकर्ताओं के लिए पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण देश, हमारी युवा पीढ़ी और विद्यार्थी हैं. आज धर्मेंद्र प्रधान जी  का अपने पद से इस्तीफा इसी को दर्शाता है. मोदी सरकार देश के युवाओं की भावनाओं का सम्मान करती है और पेपर लीक के विरुद्ध आवश्यक सुधारों के लिए कटिबद्ध है. पेपर लीक के दोषियों को कठोर दंड मिले, इसके लिए मोदी जी द्वारा लिए गए निर्णय सराहनीय हैं. मुझे पूर्ण विश्वास है कि इन कदमों से NEET परीक्षा में सफल हुए विद्यार्थियों के साथ पूरा न्याय होगा.’

गृह मंत्री ने धर्मेंद्र प्रधान के कामों को गिनाया

उन्होंने कहा, ‘धर्मेंद्र प्रधान जी ने अपने कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन, मातृभाषाओं में परीक्षाओं की व्यवस्था, पीएम श्री विद्यालयों के विस्तार, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने, कौशल विकास और उद्योग-अकादमिक समन्वय को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं. परीक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में भी उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं. उनका कार्यकाल भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के प्रति उनके समर्पण का परिचायक है.’

प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है. इसी बीच, राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्रिमंडल मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है, जबकि वे खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के केंद्रीय मंत्री के रूप में अपना मौजूदा कार्यभार भी संभालते रहेंगे. देश के कई हिस्सों में जोर पकड़ने वाले इन विरोध प्रदर्शनों ने मंत्रालय को गहन जन और राजनीतिक जांच के दायरे में ला दिया था.

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं में खुशी की लहर है. प्रदर्शनकारियों ने इसे अपने लंबे आंदोलन की पहली बड़ी सफलता करार देते हुए जश्न मनाया. छात्रों का कहना है कि यह केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने तक जारी रहेगा.

NEET पेपर लीक प्रोटेस्ट से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक…, CJP आंदोलन ने कैसे हिला दी हुकूमत

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कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार (25 जुलाई 2026) को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफे ने भारतीय राजनीति में आंदोलन की परिभाषा को फिर से गढ़ा है. भारत में अब तक रैलियों, पर्चों और भाषणों से महीनों तक जमीनी स्तर पर भीड़ जुटाकर आंदोलनों को सफल बनाया जाता था. जबकि इस आंदोलन में पेपर लीक का मुद्दा जिस तरह से सोशल मीडिया पर उठाया गया उससे देशभर के लोग इससे जुड़ते गए और इसका एपी सेंटर रहा जंतर-मंतर. सरकार की ओर से संगठन की अन्य मांगें मान लिए जाने के बाद सीजेपी ने 36 दिन से जारी अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की.

प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शनिवार को धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है. जोशी को उनके उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है. राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सलाह पर प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है.

शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त चार्ज मिलने पर केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा, ‘मैं यह जिम्मेदारी निभाऊंगा. मैं प्रधानमंत्री का शुक्रगुजार हूं. पीएम मोदी की सरकार के पिछले 12 सालों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल हुई हैं. पिछले चार-पांच सालों में धर्मेंद्र प्रधान ने नई शिक्षा नीति भी लागू की और कई जरूरी काम किए गए. देश ने नई शिक्षा व्यवस्था में काफी तरक्की की है. प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मैं अपनी पूरी काबिलियत से काम करूंगा और अपनी जिम्मेदारियों को पूरी लगन से पूरा करूंगा.’

धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा

इस पूरे घटनाक्रम को युवाओं के नेतृत्व वाले उस आंदोलन के लिए एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने परीक्षाओं में गड़बड़ी और नीट पेपर लीक विवाद को लेकर लाखों लोगों को एकजुट किया था. धर्मेंद्र प्रधान ने दोपहर में अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि पिछले 10 दिन के घटनाक्रम से उनका मन बेहद दुखी है और यह मुद्दा उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है. उन्होंने कहा, ‘जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, उसका राष्ट्र-विरोधी ताकतें लाभ न उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझें, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर ध्यान केंद्रित करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया है.’ 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से प्रधान का इस्तीफा रात में स्वीकार कर लिया. सीजेपी प्रवक्ता सौरव घोष ने देशभर में सभी जगहों पर अपना विरोध-प्रदर्शन तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा करते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के अलावा सरकार नीट विवाद को लेकर कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा देने और बीजेपी शासित सभी राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने पर भी सहमत हो गई है. 

36 दिन के विरोध-प्रदर्शन के बाद सरकार ने मानी बात

सीजेपी ने 25 जुलाई दोपहर शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा के बाद कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. यह सीजेपी और सरकार के बीच तीसरे दौर की बातचीत थी. इसमें केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने किया, जबकि सीजेपी प्रतिनिधिमंडल में सौरव दास के अलावा आशुतोष रांका शामिल थे. रांका ने कहा, ‘चूंकि, सरकार ने 36 दिन के विरोध-प्रदर्शन के बाद हमारी सभी मांगें मान ली हैं, इसलिए हम सभी से अपील करते हैं कि वे शांतिपूर्ण ढंग से विरोध स्थल से हट जाएं और घर लौट जाएं.’  

सौरव दास ने कहा कि उन्होंने संगठन की मांगों का एक मसौदा सरकार के साथ साझा किया है, जिस पर मंगलवार (28 जुलाई 2026) तक लिखित गारंटी मिलेगी. जेपी नड्डा ने कहा कि सीजेपी के प्रतिनिधि बैठक में एक लिखित मसौदा लेकर आए थे, जिसमें उन्होंने आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों से जुड़े कुछ बिंदु रखे हैं. उन्होंने कहा कि सीजेपी ने (मसौदे में) बाकी मांगें भी उठाई हैं, जिनमें कोई जवाबी कार्रवाई न किया जाना, मुआवजा दिया जाना और संगठन के पांच-सूत्री चार्टर पर विचार किया जाना शामिल है. नड्डा ने कहा, ‘हमने इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. चर्चा के बाद पहला निर्णय यह लिया गया कि कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी और कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी. अगर दिल्ली पुलिस या बीजेपी शासित राज्यों में कोई प्राथमिकी पहले ही दर्ज की जा चुकी है, तो उसे वापस ले लिया जाएगा.’

जंतर-मंतर पर खुशी की लहर 

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर खुशी की लहर दौड़ पड़ी और विरोध स्थल पर ‘हम जीत गए’ के नारे गूंजने लगे. जश्न जारी रहने के बीच अधिकारियों ने विरोध-प्रदर्शन को खत्म करने की प्रक्रिया की निगरानी शुरू की और प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक तितर-बितर होने का आग्रह किया, जबकि दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने लोगों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए आसपास के स्टेशन पर सभी एंट्री और एग्जिट गेट फिर से खोल दिए. 

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान सार्वजनिक विवाद के बाद इस्तीफा देने वाले दूसरे केंद्रीय मंत्री हैं. उनसे पहले एमजे अकबर ने 2018 में विदेश राज्य मंत्री के पद से उस समय इस्तीफा दे दिया था, जब मीटू आंदोलन के दौरान उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे. धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा 2014 के बाद उन कुछ मौकों में से एक है, जब मोदी सरकार ने जनता के विरोध या राजनीतिक दबाव के बीच अपने पैर खींचे हैं. 2015 में मोदी सरकार को बुनियादी ढांचे और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण को आसान बनाने के मकसद से भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन की अपनी योजना टालनी पड़ी थी, जबकि 2021 में उसे तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा करनी पड़ी थी. 

राहुल ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह छात्रों के खिलाफ हुई हिंसा के लिए “सीधे तौर पर जिम्मेदार” हैं. उन्होंने शाह पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक हथियारों और पैलेट गन के इस्तेमाल की मंजूदी देने का भी आरोप लगाया. हालांकि, बीजेपी ने प्रधान का बचाव किया. पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि उनके फैसले में ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा के उच्चतम मानक झलकते हैं. 

दो साल पुराने पेपर लीक रोधी कानून में संशोधन करने के उद्देश्य से सोमवार (27 जुलाई 2026) एक बिल लोकसभा में पेश किया जाएगा. इस बिल में आरोपियों की तुरंत सुनवाई के लिए हर राज्य में फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने और सजा को और कड़ा करने का प्रस्ताव किया गया है. इसमें पेपर लीक या अनुचित साधनों का प्रयोग करने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल की कैद और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.  संगठित अपराधों के लिए बिल में कम से कम 7 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है. 

सीजेपी आंदोलन ने कैसे पकड़ी रफ्तार

परीक्षा प्रणाली में सुधार, नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर 20 जून को छात्रों का विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ था. धीरे-धीरे यह Gen-Z के नेतृत्व वाले सबसे अहम आंदोलनों में से एक बन गया. जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के 28 जून को छात्रों के समर्थन में उतरने और जंतर-मंतर पर आइसा के छह कार्यकर्ताओं के साथ अनशन शुरू करने के बाद सीजेपी के नेतृत्व वाले आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर जोर पकड़ लिया.  

दिल्ली पुलिस की ओर से वांगचुक को 18 जुलाई को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के बाद छात्रों और युवाओं का आक्रोश और बढ़ गया. वांगचुक ने केंद्र से प्रदर्शनकारियों की मांगें मानने का आश्वासन मिलने के बाद गुरुवार (23 जुलाई) को 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया. केंद्र सरकार और सीजेपी नेतृत्व के बीच पहली आधिकारिक बैठक 20 जुलाई को जेपी नड्डा के आवास पर हुई थी. उसी दिन हजारों प्रदर्शनकारियों ने संगठन के ‘संसद चलो’ आह्वान पर संसद की ओर मार्च शुरू किया था, लेकिन पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करके उन्हें पीछे धकेल दिया था.

इस दौरान कई लोग घायल हुए थे.  दोनों पक्षों के बीच दूसरे दौर की बातचीत शुक्रवार को हुई थी, जब केंद्र ने बैठक किसी मंत्री के आवास या कार्यालय के बजाय एक तटस्थ स्थल पर आयोजित करने की सीजेपी की मांग स्वीकर कर ली.

‘थैंक्यू फ्रैंड्स’, PM मोदी ने देर रात जारी Video में की यूथ के प्यार और समर्थन की तारीफ, जानें क्या कहा?

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Narendra Modi New Video: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब लगातार Gen Z पीढ़ी और इसी उम्र के प्रदर्शनकारियों से संपर्क सीधे तौर पर साध रहे हैं. गुरुवार के बाद अब शुक्रवार को भी देर रात उन्होंने एक वीडियो जारी किया है. इससे पहले भी उन्होंने देर रात वीडियो जारी किया था. वहीं, पीएम मोदी के दोनों वीडियो में हेलो और थैंक्यू फ्रेंड्स कर संबोधित किया है. 

पीएम ने वीडियो में कहा है कि लोगों ने जो सुझाव दिए उसके लिए शुक्रिया. अब एक तरह से प्रधानमंत्री लगातार प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ इस तरह से संवाद स्थापित कर रहे हैं. इससे पहले कैबिनेट की बैठक के दौरान भी प्रधानमंत्री ने कैबिनेट के साथियों से कहा था कि वह भी सोशल मीडिया खास तौर पर इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्म के जरिए युवाओं से बेहतर तरीके से जुड़ सकते हैं.

 

 

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वीडियो में क्या बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी?

पीएम मोदी ने वीडियो में कहा, ‘थैंक्यू फ्रेंड्स. कल देर रात आपसे मिलने का मौका मिल गया. मैंने जो वीडियो पोस्ट किया था, उस पर जिस प्रकार से रिस्पॉन्ड किया. सकारात्मक सुझाव दिए. थैंक्स टू एवरीबडी. आपका प्यार बना रहेगा. हमारा नाता और अधिक सक्रियता से जुड़ता रहेगा. थैंक्यू. थैंक्यू दोस्तों. इसके अलावा उन्होंने वीडियो कैप्शन में लिखा, ‘उन युवाओं का धन्यवाद जिन्होंने कल मेरा वीडियो देखा और काम के सुझाव भेजे.’

पीएम मोदी ने कल देर रात भी किया था वीडियो जारी
इससे पहले गुरुवार को पीएम मोदी ने एक वीडियो जारी किया था. यह वीडियो उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए जारी किया था. उन्होंने कहा कि फ्रेंड्स मैं जानता हूं कि पेपर लीक यह कोई मामूली विषय नहीं है. लाखों विद्यार्थी और उनके अभिभावकों के लिए बहुत ही पीड़ादायक है. इसलिए पेपर लीक घटना से अब तक पिछले ढाई महीनों में अनेक कदम उठाए गए. गुनहगारों को पकड़ा गया है. वे जेल में पड़े हैं. हमारा सबसे महत्वपूर्ण जिम्मा था कि विद्यार्थियों का एक वर्ष बर्बाद ना हो. तत्काल परीक्षाएं लेना बहुत जरूरी था.

मोदी ने कहा, ‘सरकार ने अभी पूरी शक्ति का उपयोग करके कम से कम समय में 22 लाख विद्यार्थियों के एग्जाम हो जाए इसका प्रबंध किया और अभी पांच-छह दिन पहले 19 तारीख को रिजल्ट भी आ गया. देश भर में उत्तीर्ण हुए विद्यार्थियों की खुशियों की खबरें भी आ रही हैं, लेकिन हम वहां पर संतोष मानने वाले लोगों में से नहीं है. इसलिए मैंने आज फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए विभागों को निर्देश दिए थे.
 
उन्होंने कहा, ‘आज विभागों ने लगातार मेहनत करके देर रात मुझे मसौदा भी दे दिया. फास्ट ट्रैक कोर्ट और कठोर सजा के प्रावधान के साथ इस मसौदे पर कल कैबिनेट में चर्चा होगी. कैबिनेट के साथियों के सुझाव के बाद उसे अंतिम रूप दिया जाएगा. सोमवार से संसद का दूसरा सप्ताह शुरू हो रहा है, तब जल्द से जल्द उस बिल को सदन में पारित कराने का प्रयास किया जाएगा.’

 



‘कहीं लद्दाख जैसा न हो…’, सोनम वांगचुक ने क्यों तोड़ा अनशन? सामने आया असली कारण

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सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी 26 दिन लंबी भूख हड़ताल खत्म करने के फैसले पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने केंद्र सरकार की लिखित गारंटी मिलने के बाद ही अनशन समाप्त किया. उन्होंने बताया कि उन्हें डर था कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और समर्थकों पर कभी भी बड़ी पुलिस कार्रवाई हो सकती है. इसी आशंका को देखते हुए उन्होंने हिंसा रोकने और छात्रों को सुरक्षित रखने के लिए अनशन खत्म करने का फैसला लिया.

शुक्रवार देर रात यूट्यूब पर जारी एक वीडियो में वांगचुक ने सरकार के साथ किसी भी तरह की डील होने के आरोपों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि उनका सबसे बड़ा उद्देश्य आंदोलन में शामिल छात्रों को हिंसा और कानूनी कार्रवाई से बचाना था. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बातचीत के दौरान उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग इसलिए नहीं उठाई क्योंकि उस समय उनकी प्राथमिकता छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई को रोकना थी. हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि धर्मेंद्र प्रधान आखिर में इस्तीफा देंगे.

‘दिल्ली में बड़ा एक्शन होने का था डर’

वांगचुक ने बताया कि आधी रात के करीब उन्हें सूचना मिली कि केंद्र सरकार के मंत्री लिखित आश्वासन देने के लिए तैयार हो गए हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें जल्द फैसला लेना पड़ा क्योंकि दिल्ली का माहौल ऐसा बन गया था कि किसी भी समय बड़ी कार्रवाई हो सकती थी. उन्होंने कहा कि वह लगातार खबरें देख रहे थे और उन्हें 24 सितंबर 2025 की घटना याद आ गई, जब लद्दाख के युवाओं पर पुलिस और सीआरपीएफ ने बेरहमी से फायरिंग की थी. उन्हें डर था कि कहीं दिल्ली में भी वैसी ही स्थिति न बन जाए. इसलिए उन्होंने सोचा कि यदि वह अनशन समाप्त कर शांति की अपील करेंगे तो हालात सामान्य हो सकते हैं.

‘अगर समझौता करना होता तो 26 दिन भूखा क्यों रहता?’

सरकार से समझौता करने के आरोपों पर वांगचुक ने कहा कि जो लोग उन पर सवाल उठा रहे हैं, वे उन परिस्थितियों से अनजान हैं जिनका उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने के बाद सामना करना पड़ा. उन्होंने कहा कि अगर उन्हें सरकार से कोई समझौता ही करना होता तो वह 26 दिन तक भूखे क्यों रहते. उन्होंने कहा कि यदि डील करनी होती तो वह दिल्ली की गर्मी में अनशन करने के बजाय किसी एयर कंडीशन कमरे में बैठकर भी ऐसा कर सकते थे.

‘सफदरजंग अस्पताल में कैदी जैसा व्यवहार हुआ’

वांगचुक ने आरोप लगाया कि 18 जुलाई को उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाने के बाद उनके साथ कैदी जैसा व्यवहार किया गया. उन्होंने दावा किया कि उन्हें स्वतंत्र रूप से आने-जाने की अनुमति नहीं थी, लोगों से मिलने नहीं दिया गया और मोबाइल फोन व लैपटॉप तक रखने की इजाजत नहीं दी गई. उन्होंने कहा कि वहां का माहौल उत्तर कोरिया जैसा महसूस हो रहा था. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली हाईकोर्ट से मेदांता अस्पताल जाने की अनुमति मिलने के बावजूद उन्हें कई घंटों तक सफदरजंग अस्पताल से बाहर नहीं निकलने दिया गया.

जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से हुई मुलाकात

वांगचुक ने बताया कि मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह उनसे मिलने पहुंचे. उन्होंने कहा कि दोनों मंत्रियों ने कथित NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाया. साथ ही संसद में परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही और परीक्षा सुधारों पर विस्तृत चर्चा कराने पर भी सहमति जताई.

‘लिखित आश्वासन मिलने तक नहीं खत्म करता अनशन’

वांगचुक ने कहा कि उन्होंने साफ कर दिया था कि जब तक उन्हें लिखित रूप में यह भरोसा नहीं मिलेगा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक वह अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे. उन्होंने बताया कि शुरुआत में सरकार मुआवजे और संसद में चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन छात्रों पर कोई मामला दर्ज नहीं करने का सिर्फ मौखिक भरोसा दिया जा रहा था. उन्होंने इस पर सहमति नहीं जताई और लिखित आश्वासन मिलने तक अपनी मांग पर अड़े रहे. आखिरकार सरकार ने लिखित गारंटी दी, जिसके बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया.

‘मेरा मकसद छात्रों को बचाना था, मंत्री का इस्तीफा नहीं’

वांगचुक ने दोहराया कि उनकी प्राथमिकता किसी मंत्री का इस्तीफा कराना नहीं थी. उन्होंने कहा कि उनका पूरा ध्यान इस बात पर था कि छात्रों को किसी तरह का नुकसान न हो और उनके खिलाफ एफआईआर या अन्य कानूनी कार्रवाई न की जाए. उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि आंदोलन आगे भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाता रहेगा.

‘साथियों और सांसदों की मौजूदगी में अनशन खत्म करना चाहता था’

वांगचुक ने कहा कि उनकी इच्छा थी कि जब वह अपना अनशन समाप्त करें, उस समय सांसद, कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रतिनिधि और लद्दाख से आए उनके साथी मौजूद रहें. लेकिन उनका आरोप है कि केंद्रीय मंत्रियों के देर रात पहुंचने से पहले उनके कई साथियों, छात्रों और समर्थन देने आए सांसदों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई. उन्होंने कहा कि उनके मन का सबसे बड़ा दुख यही है कि उनके साथी और आंदोलन का समर्थन करने वाले लोग उस समय उनके साथ नहीं थे, जब उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया.

केंद्र की लिखित गारंटी के बाद खत्म हुआ 26 दिन का अनशन

सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात आधी रात के बाद अपना 26 दिन लंबा अनशन समाप्त किया. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने लिखित रूप में यह आश्वासन दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ मामले दर्ज नहीं करने के मुद्दे पर सरकार सकारात्मक रुख रखती है. इसके अलावा संसद में परीक्षा सुधार और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराने तथा कथित NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक विचार करने का भरोसा दिया गया.

वांगचुक ने अंत में एक बार फिर कहा कि उन्होंने अपना अनशन किसी राजनीतिक समझौते के कारण नहीं बल्कि छात्रों की सुरक्षा और आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए समाप्त किया. उनके अनुसार, उनकी सबसे बड़ी चिंता छात्रों का भविष्य था और यही कारण है कि उन्होंने लिखित आश्वासन मिलने तक अपनी मांग से समझौता नहीं किया.

‘AI का गलत इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं…’ फर्जी वीडियो पर भड़के केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, थाने में दर्ज कराई FIR

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Piyush Goyal on Deepfake Video: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपने कथित बयान वाले वीडियो को पूरी तरह फर्जी और AI से तैयार किया गया डीपफेक बताया है. उन्होंने कहा कि संसद के बाहर मीडिया से की गई उनकी टिप्पणियों के साथ छेड़छाड़ कर AI की मदद से यह वीडियो तैयार किया गया है, ताकि लोगों के बीच गलत जानकारी फैलाई जा सके. गोयल ने कहा कि इस मामले में पुलिस शिकायत दर्ज करा दी गई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

 

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‘AI की मदद से तैयार किया गया डीपफेक वीडियो’

पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि संसद के बाहर मीडिया से की गई उनकी टिप्पणियों को जानबूझकर एडिट किया गया और AI की मदद से डीपफेक वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर फैलाया गया. उनका कहना है कि इसका मकसद लोगों को गुमराह करना और गलत सूचना फैलाना है. उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकतें न सिर्फ भ्रामक हैं, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद को भी नुकसान पहुंचाती हैं.

पुलिस में शिकायत, चाणक्यपुरी थाने में FIR दर्ज

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि उन्होंने इस मामले में पुलिस शिकायत दर्ज करा दी है. उन्होंने कहा कि 25 जुलाई 2026 को सुबह 4:35 बजे नई दिल्ली के चाणक्यपुरी पुलिस स्टेशन में एफआईआर संख्या 123/26 दर्ज की गई है. गोयल ने स्पष्ट कहा कि इस फर्जी वीडियो को बनाने, सोशल मीडिया पर फैलाने या उसे बढ़ावा देने वाले सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

‘AI का गैर-जिम्मेदाराना इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा’

पीयूष गोयल ने कहा कि लोगों को गुमराह करने के लिए AI का इस तरह गैर-जिम्मेदाराना इस्तेमाल किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने से पहले केवल आधिकारिक और सत्यापित स्रोतों पर ही विश्वास करें. उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि भारत के जागरूक और तकनीक को समझने वाले नागरिक, खासकर युवा, इस तरह की भ्रामक सूचनाओं के झांसे में नहीं आएंगे.

क्या है वायरल वीडियो?

सोशल मीडिया पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में उन्हें कथित तौर पर यह कहते हुए सुनाया जा रहा है कि, “मेरा साफ मानना है कि हमें दो-तीन कॉकरोचों को सरेआम लटका देना चाहिए, ताकि इस कॉकरोच जनता पार्टी को हमारी ताकत का अंदाजा हो जाए. जब ये लोग अपने दो-तीन कॉकरोचों को इस तरह लटकते हुए देखेंगे, तो इनका सारा हुड़दंग शांत हो जाएगा.”

 

‘धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिया तो…’, CJP का क्या है ‘प्लान बी’? आशुतोष रांका ने दिया जवाब

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केंद्र सरकार के साथ हुई बैठक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने साफ कर दिया है कि उसकी सबसे बड़ी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने कहा कि मुआवजे और कानूनी मामलों पर सरकार की ओर से सकारात्मक रुख जरूर देखने को मिला है, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अब तक कोई ठोस फैसला नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि अगर सरकार इस मांग पर स्पष्ट जवाब नहीं देती है तो ऐसी बैठकों का कोई मतलब नहीं रह जाता और पार्टी आगे की रणनीति पर काम करेगी.

‘मुआवजे और कानूनी मामलों पर सकारात्मक जवाब मिला’

आशुतोष रंका ने कहा कि सरकार के साथ हुई बैठक में मुआवजे और कानूनी मामलों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली. उन्होंने बताया कि इन मुद्दों पर सहमति बनी है और उन्हें उम्मीद है कि आज सरकार की ओर से इस संबंध में लिखित सहमति भी मिल जाएगी. उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ी है, लेकिन आंदोलन की मुख्य मांग अब भी अधूरी है.

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सरकार का यही रवैया रहा तो अपनाएंगे कड़ा रुख’

CJP  के  राष्ट्रीय प्रवक्ता ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार का यही रवैया जारी रहा तो पार्टी को मजबूर होकर आंदोलन को और तेज करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि अगर सरकार उनकी मुख्य मांगों पर फैसला नहीं करती है तो संगठन कड़ा रुख अपनाने के लिए बाध्य होगा.

सरकार की ओर से 47 एनटीए अधिकारियों को हटाए जाने के फैसले पर भी आशुतोष ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि इस फैसले के सभी पहलुओं को देखना होगा, लेकिन इससे मूल सवाल खत्म नहीं हो जाता. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी लगातार यही कह रही है कि अंतिम जवाबदेही शिक्षा मंत्री की है, क्योंकि NEET पेपर लीक और उसके बाद कथित तौर पर छात्रों की आत्महत्या जैसे मामलों की सीधी जिम्मेदारी शिक्षा मंत्रालय की बनती है.

‘शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना ही होगा’

ने कहा कि उनकी पार्टी का मानना है कि इन घटनाओं की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की है और उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए. उन्होंने कहा कि पार्टी केवल इस्तीफे की मांग ही नहीं कर रही, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों को लेकर भी लगातार चर्चा कर रही है.

सरकार को सौंपा गया मांगों का चार्टर

आशुतोष ने बताया कि सरकार के साथ हुई बैठक के दौरान पार्टी ने अपनी मांगों का विस्तृत चार्टर भी सौंप दिया है. उन्होंने कहा कि यह मांगपत्र सरकार को औपचारिक रूप से दे दिया गया है और अब पार्टी को सरकार के अगले कदम का इंतजार है. साथ ही उन्होंने दोहराया कि आंदोलन की दिशा आगे सरकार के रुख पर निर्भर करेगी.