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‘आप क्रोनोलॉजी समझिए…’, CJP प्रोटेस्ट के दौरान नड्डा की PC को लेकर भड़के जयराम रमेश, कहा- ‘समस्या…’

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केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर कांग्रेस के दिग्गज नेता जयराम रमेश ने उन पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि ये सरकार की बढ़ती हताशा का पक्का संकेत है. उन्होंने कहा कि पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बस ‘लेकिन-मगर’ और ‘वो-क्या-हुआ’ वाली बातें ही होती रहीं. उन्होंने आगे कहा कि नड्डा को बच्चों जैसी उंगली उठाने वाली बातों से आगे बढ़कर सबसे पहले प्रधानमंत्री की नाकामियों को बड़े पैमाने पर स्वीकार करना चाहिए. आप क्रोनोलॉजी समझिए.

जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि NEET-UG 2026 का पेपर लीक होना तो बस एक लक्षण है समस्या की जड़ें कहीं ज़्यादा गहरी हैं. छात्रों का गुस्सा शिक्षा मंत्री की अक्षमता, मोदी सरकार की बेहद खराब शिक्षा नीतियों और प्रधानमंत्री के अहंकार को लेकर है. उन्होंने कहा कि NTA को खास तौर पर मोदी सरकार ने परीक्षाएं आयोजित करने के लिए बनाया था. मोदी सरकार ने जान-बूझकर NTA के जरिए परीक्षाओं का एक सेंट्रलाइज़्ड सिस्टम बनाया और यूनिवर्सिटीज़ और राज्यों को इसे अपनाने के लिए मजबूर किया गया. 

उन्होंने कहा कि NTA के बुरी तरह से नाकाम होने के बाद 2024 में प्रधानमंत्री ने वादा किया था कि NTA में सुधार किए जाएंगे. NTA में सुधार के सुझाव देने के लिए राधाकृष्णन कमेटी बनाई गई थी और उसने 101 सिफारिशें पेश कीं. सुधारों को गंभीरता से लागू करने के बजाय सरकार टालमटोल करती रही और उन्होंने बहुत ज्यादा लापरवाही दिखाई. 

धर्मेंद्र प्रधान को लेकर क्या कहा
सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि NEET-UG 2026 पेपर लीक हुआ और NTA को बाद में परीक्षा रद्द करनी पड़ी. इस समय भी NTA और उच्च शिक्षा विभाग ने शिक्षा पर बनी संसदीय स्थायी समिति के सामने बेशर्मी से दावा किया कि कोई पेपर लीक नहीं हुआ था. धर्मेंद्र प्रधान के लिए सच्चाई से ज़्यादा दिखावा मायने रखता है. उन्होंने NTA को मजबूत करने के लिए शिक्षा पर बनी संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों को सिर्फ़ इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि समिति में विपक्ष के सदस्य भी शामिल थे.

समस्या की जड़ बहुत गहरी- जयराम रमेश 
जयराम रमेश ने कहा कि जब छात्र पेपर लीक और मोदी सरकार की शिक्षा नीतियों के खिलाफ़ विरोध करने के लिए सड़कों पर उतरे तो प्रधानमंत्री और उनके अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर बेमिसाल बर्बरता की. उन्होंने कहा कि लाठीचार्ज, वॉटर कैनन, आंसू गैस और खबरों के मुताबिक पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया गया. उन्होंने आगे कहा कि NEET-UG 2026 पेपर लीक सिर्फ़ एक लक्षण है. समस्या की जड़ बहुत गहरी है. 

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Kajal Aggarwal reveals refusing inappropriate scenes in South films Salman Khan made her wait on set

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Kajal Aggarwal On Inappropriate Scenes In South Films: काजल अग्रवाल बॉलीवुड की एक जानी-मानी अभिनेत्री हैं और आपको बता दें कि वह पिछले दो दशकों से साउथ से लेकर हिंदी सिनेमा पर काम कर रही है। उन्होंने दोनों ही इंडस्ट्रीज में कई सारे बड़े सुपरस्टार्स के साथ में भी काम किया है। लेकिन हाल ही में उन्होंने एक इंटरव्यू में ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन और सलमान खान की लेट लतीफी को लेकर बात की है।

Kajal Aggarwal

साउथ इंडस्ट्री में समय से होते हैं सारे काम

न्यूज़ बुक के साथ इंटरव्यू के दौरान काजल अग्रवाल ने साउथ और बॉलीवुड के रवैये को लेकर बात की है। अभिनेत्री ने बताया कि बॉलीवुड को साउथ फिल्म इंडस्ट्री से समय की कीमत सीखनी चाहिए। दरअसल साउथ फिल्म इंडस्ट्री में समय की बहुत ज्यादा कीमत है और हर काम घड़ी देखकर किया जाता है। लेकिन बॉलीवुड में ऐसा नहीं होता।

जब काजल अग्रवाल से सवाल किया गया कि कौन सा ऐसा एक्टर है जिसमें उन्हें सबसे ज्यादा इंतजार करवाया तो उन्होंने तुरंत सलमान खान का नाम ले लिया। दरअसल सिकंदर फिल्म में सलमान खान के साथ काजल ने काम किया और बताया कि सलमान उनके हमेशा से क्रश रहे हैं और वह उनके साथ में काम करने के लिए काफी उत्साहित थी।

सलमान खान ने करवाया इंतजार

काजल ने इस पर बात करते हुए कहा कि “सलमान खान ने मुझे बहुत इंतजार करवाया और मैं साउथ से काम करके आई हूं। तुम मुझे इंतजार करने की आदत नहीं थी और मैं बस सेट पर यही सोचती रहती थी कि आखिर अब क्या होगा। वह कभी तो दिन में आते थे तो कभी शाम में आते थे। इसीलिए मैं तब तक जिम में जाकर एक्सरसाइज कर लेती थी। मैं साउथ इंडस्ट्री की अनुशासन और समय की बहुत पाबंद हूं।”

अब साउथ में नहीं होते नाभि वाले सीन

काजल अग्रवाल ने साउथ इंडस्ट्री में बदले हुए दौर को लेकर बात की और बताया कि “अब वहां पर कामकाज का तरीका बदल चुका है। नाभि वाला वक्त खत्म हो गया है और महिला आधारित फिल्में भी बनाई जा रही है। मैंने हमेशा से ही ऐसे काम के लिए साफ इनकार किया है। मैंने खुद कहा था कि मेरी नाभि पर फल मत फेंको बॉस।”

बोल्ड सीन से दूर रहती हैं अभिनेत्री

एक अन्य पॉडकास्ट में काजल अग्रवाल ने खुलासा किया था कि वह ज्यादातर बोल्ड सीन से दूरी बनाकर रखती हैं। वह जिस चीज में कंफर्टेबल नहीं है वह नहीं करती। अभिनेत्री की यह बात उनके फैन्स को भी काफी पसंद आई थी।

काजल अग्रवाल का करियर

काजल अग्रवाल की बात करें तो आपको बता दें कि उन्होंने साल 2004 में ‘क्यों हो गया ना’ से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में डेब्यू किया था। लेकिन तब अभिनेत्री को बॉलीवुड में कुछ खास लोकप्रियता हासिल नहीं हुई। लेकिन साउथ में उन्होंने खूब नाम कमाया और अभी के वक्त में वह तमिल से लेकर तेलुगु में मोस्ट पापुलर एक्ट्रेस बन गई है।

Survey Says Paying for College is a Bigger Challenge for Young Adults Today

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Young adults say paying for college, affording living expenses, saving for the future and finding a job are harder for them than older generations.

Explained: धर्मेंद्र प्रधान को क्यों नहीं गंवा सकती मोदी सरकार? जबकि एक इस्तीफे पर थम जाएगा CJP आंदोलन

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भारत में परीक्षा लीक का मुद्दा अब एक सियासी रस्साकशी में बदल चुका है और इस रस्साकशी के केंद्र में हैं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान. नीट-यूजी विवाद के बाद से विपक्ष और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) लगातार उनके इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं. लेकिन मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि वह इस मांग को मानने वाली नहीं है. यह जिद्द सिर्फ एक व्यक्ति को बचाने की नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ी राजनीतिक, प्रशासनिक और कानूनी मजबूरियां हैं, जो सरकार को पीछे हटने से रोक रही हैं. आइए समझते हैं कि आखिर वो कौन सी मुश्किलें हैं, जिनकी वजह से सरकार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर झुक नहीं सकती है…

मोदी सरकार के न झुकने की 7 बड़ी वजहें हैं…

1. ‘व्यक्ति नहीं, व्यवस्था’ का सरकारी रुख

सरकार शुरू से यह कहती आ रही है कि पेपर लीक एक व्यवस्थागत चुनौती है, किसी एक व्यक्ति की गलती नहीं. अगर मोदी सरकार अभी सिर्फ विपक्ष के दबाव में आकर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लेती है, तो यह अप्रत्यक्ष रूप से इस बात का सबूत हो जाएगा कि सरकार की नीतियां विफल रहीं और मंत्री पर लगे आरोप सही हैं. यह राजनीतिक रूप से सरकार के लिए बहुत बड़ी रियायत होगी और विपक्ष को अगले किसी भी संकट में इसी तरह की मांग उठाने की नैतिक ताकत दे देगी.

2. राजनीतिक समीकरण और चुनावी संदेश

धर्मेंद्र प्रधान बीजेपी के सबसे प्रभावशाली ओबीसी चेहरों में से एक हैं और ओडिशा जैसे महत्वपूर्ण पूर्वी राज्य में पार्टी की जीत के प्रमुख शिल्पी रहे हैं. प्रधान को पद से हटाने का सीधा संदेश पार्टी के बड़े जनाधार वाले वर्ग तक जाएगा, जिससे समर्थकों में गलत संकेत जा सकता है. लोकसभा चुनाव के बाद जिस तरह बीजेपी को बहुमत के लिए सहयोगियों पर निर्भर रहना पड़ा. ऐसे में किसी कद्दावर मंत्री को बलि का बकरा बनाना पार्टी और सरकार की आंतरिक एकजुटता और मनोबल को कमजोर कर सकता है.

3. प्रशासनिक स्तर पर ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ और नए कानून की विश्वसनीयता पर संकट

PM मोदी ने खुद इस मामले पर कहा था, ‘दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा’ और फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का ऐलान किया. सरकार ने जून 2024 में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम’ भी लागू किया, जिसमें पेपर लीक करने वालों के लिए 10 साल तक की सजा और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.

अगर इस पूरे ढांचे को लागू करने के बाद भी सरकार अपने ही शिक्षा मंत्री को जिम्मेदारी से मुक्त कर देती है या उन्हें इस्तीफा देना पड़ता है, तो यह इन कानूनी और संस्थागत सुधारों की नाकामी का प्रमाण माना जाएगा. सरकार के लिए यह बहुत जरूरी है कि वह यह दिखाए कि उसकी नीतियां ही असली समाधान हैं, न कि किसी व्यक्ति को हटाना.

4. विपक्षी एकता का मनोवैज्ञानिक दबाव

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, विपक्ष लंबे समय बाद किसी मुद्दे पर पूरी तरह एकजुट दिख रहा है. कांग्रेस, TMC, आम आदमी पार्टी, सपा और क्षेत्रीय दलों ने संसद के भीतर और बाहर एक सुर में इस्तीफे की मांग को उठाया है. CJP जैसी संस्थाएं भी कोर्ट में सक्रिय हैं. अगर सरकार इस दबाव में आकर एक बार झुकी, तो आने वाले सत्रों में विपक्ष हर मुद्दे पर मंत्री के इस्तीफे की मांग को अपना पहला और सबसे बड़ा हथियार बना लेगा. इससे सरकार की निर्णय लेने की क्षमता पर स्थायी रूप से असर पड़ सकता है.

5. संसदीय कार्यवाही और बहस का रास्ता रोकना

सरकार चाहती थी कि नीट विवाद पर संसद में रूल 193 के तहत अल्पकालिक चर्चा हो, जहां कोई मतदान या स्थगन प्रस्ताव नहीं होता. लेकिन विपक्ष रूल 60 के तहत स्थगन प्रस्ताव और राज्यसभा में रूल 267 के जरिए पूरे सदन का कामकाज रोककर तत्काल बहस की मांग कर रहा था. विपक्ष का पूरा जोर इस बात पर था कि सरकार को कठघरे में लाया जाए और शिक्षा मंत्री को सीधे जवाब देना पड़े.

सरकार ने यह मोर्चा भी नहीं छोड़ा. स्पीकर और सभापति के नियमों का हवाला देकर इसे टेक्निकल उलझनों उलझाए रखा. अगर इस तरह के सियासी दबाव के बाद भी सरकार इस्तीफे की मांग मान लेती, तो यह संसद में अपने पक्ष को मजबूती से रखने में विफलता का संकेत होता.

6. कोई सीधी कानूनी जिम्मेदारी न होना

CBI या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाली कमेटी की किसी भी जांच में सीधे तौर पर धर्मेंद्र प्रधान की किसी लापरवाही या संलिप्तता की पुष्टि नहीं की है. पेपर लीक एक आपराधिक साजिश है, जिसमें स्थानीय स्तर पर दलालों, प्राइवेट इंस्टीट्यूट्स और कुछ अधिकारियों की भूमिका सामने आती है. ऐसे में बिना किसी कानूनी आधार के किसी कैबिनेट मंत्री को हटाना सरकार के अपने प्रशासनिक सिद्धांतों के खिलाफ होगा और अन्य मंत्रियों में हलचल पैदा करेगा. इससे यह गलत परंपरा बन सकती है कि सड़क या संसद में हंगामा होते ही मंत्री को बदल दिया जाए.

7. जनभावना और कोर्ट का संतुलित रुख

सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी मामले में परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया था और पेपर लीक को बड़े पैमाने पर फैला हुआ नहीं माना था. हालांकि उसने सिस्टम में सुधार की जरूरत बताई थी. एग्जाम देने वाले छात्रों समेत जनता का एक बड़ा तबका पूरी परीक्षा को रद्द करने या अन्य बड़े फैसलों के पक्ष में नहीं था. ऐसे में कोर्ट के संतुलित रुख के बाद सिर्फ राजनीतिक विरोध के चलते मंत्री को हटाना सरकार के लिए तर्कसंगत नहीं दिखता. यह उसे अपने वोट बैंक में कमजोर भी कर सकता है.

कुल मिलाकर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे विपक्ष और CJP के सामने मोदी सरकार की मजबूरी सिर्फ एक मंत्री को बचाने की नहीं, बल्कि अपनी पूरी राजनीतिक रणनीति, संस्थागत सुधारों की साख और प्रशासनिक अधिकार को बचाने की है. यही वजह है कि सरकार इस मामले में पीछे हटने को तैयार नहीं है और इस टकराव के आने वाले दिनों में और तेज होने के पूरे आसार हैं.

Kareena Kapoor reaction on CJP students protest our children are watching us closely

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Kareena Kapoor On CJP Students Protest: स्टूडेंट प्रोटेस्ट को बॉलीवुड का खुला सपोर्ट मिल रहा है। तमाम सेलेब्स के बाद अब करीना कपूर खान ने भी स्टूडेंट्स के स्ट्रगल और उनकी मांगों को वाजिब करार दिया है। इसके लिए करीना कपूर खान ने इंस्टाग्राम पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा है जो कि काफी तेजी से वायरल हो गया है।

Kareena Kapoor

करीना कपूर खान का लंबा चौड़ा पोस्ट

करीना कपूर खान ने लिखा, “मैंने पिछले कुछ दिनों तक इस पर शांत रहकर विचार किया। लेकिन अब और चुप नहीं रह सकती। इतने सारे युवाओं की आवाज़ें, जो सिर्फ़ सुनी जाना चाहती हैं, अब नज़रअंदाज़ नहीं की जा सकतीं, और न ही की जानी चाहिए।”

करीना ने बताया शिक्षा का क्या महत्व

करीना ने आगे लिखा,”हम सभी जानते हैं कि एक बच्चे के जीवन में शिक्षा का क्या महत्व होता है। शिक्षा उसे आत्मविश्वास देती है। उसे उम्मीद देती है। परिवारों को यह विश्वास दिलाती है कि आने वाला कल आज से बेहतर हो सकता है। लेकिन शिक्षा तभी सार्थक है, जब बच्चों का उस पर विश्वास बना रहे। और यह विश्वास उसी क्षण टूटने लगता है, जब उन्हें यह महसूस होने लगे कि ईमानदारी, कड़ी मेहनत और योग्यता का वास्तव में कोई मूल्य नहीं है।”

सिस्टम पर की करीना ने टिप्पणी

सिस्टम पर टिप्पणी करते हुए करीना ने लिखा, “किसी भी बच्चे को यह सोचने पर मजबूर नहीं होना चाहिए कि क्या उसकी मेहनत पर्याप्त होगी। हर बच्चे को ऐसा सिस्टम मिलने का अधिकार है, जिस पर वह भरोसा कर सके, जहां योग्यता ही पहचान बने, मेहनत का उचित सम्मान हो और हर बच्चे को समान अवसर के साथ शुरुआत करने का मौका मिले।”

बात सुनना कोई एहसान नहीं हमारी जिम्मेदारी

करीना ने आगे लिखा, “यह कोई बहुत बड़ी मांग नहीं है। यह तो किसी भी न्यायपूर्ण व्यवस्था की सबसे बुनियादी अपेक्षा है। जब एक पूरी पीढ़ी अपने भविष्य को लेकर एक स्वर में अपनी बात कह रही हो, तो उनकी बात सुनना कोई एहसान नहीं है। यह हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी है।”

वो ही हमारा कल हैं

करीना ने मुद्दे की गंभीरता भांपते हुए लिखा, “हमारे बच्चे हमें उतनी ही गंभीरता से देख रहे हैं, जितनी गंभीरता से हम उन्हें देखते हैं। आज-अभी, इसी क्षण, हम जो निर्णय लेंगे, वही उन्हें बताएगा कि निष्पक्षता और विश्वास वास्तव में हमारे मूल्य हैं, या फिर केवल ऐसे शब्द हैं जिन्हें बड़े लोग बोलते हैं। वो सिर्फ़ अपने कल की तैयारी नहीं कर रहे। वो ही हमारा कल हैं।”

स्टूडेंट्स के सपोर्ट में बॉलीवुड

जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस प्रोटेस्ट पर अभी तक सलमान खान, अनुपम खेर, शबाना आजमी, हुमा कुरैशी, प्राकश राज, कमल हासन से लेकर नसीरुद्दीन शाह और आलिया भट्ट तक तमाम सेलेब्स रिएक्ट करते हुए स्टूडेंट्स को सपोर्ट कर चुके है। हालांकि अभी भी लोगों को कई ए लिस्टर सेलिब्रिटी के रिएक्शन का काफी बेसब्री से इंतजार हो रहा है।

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CJP से बात करने जंतर-मंतर जाएंगे मंत्री? मानी शर्त, मोदी सरकार बोली- आइए बैठकर करें बात

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नीट पेपर लीक के मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक राजनीति गरमाई हुई है. जंतर-मंतर पर सीजेपी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़ी हुई है. इस बीच केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि छात्र जहां चाहएंगे सरकार वहां बातचीत के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि बातचीत से ही समस्या का समाधान होगा.

सरकार छात्रों से बातचीत को तैयार: जितेंद्र सिंह

जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘सरकार की तरफ से आंदोलन कर रहे छात्रों से एक अपील करना चाह रहा हूं. सरकार की ओर से हम चर्चा के लिए हर समय तैयार हैं. सरकार के दरवाजे खुले हैं. हम छात्रों को कहना चाहते हैं कि आप कभी भी चर्चा करना चाहें आपकी सुविधानुसार हम चर्चा के लिए तैयार हैं. आंदोलन के अलावा दूसरे विषय को लेकर भी सरकार चर्चा के लिए तैयार रहेगी.’

उन्होंने कहा, ‘छात्र चर्चा के लिए जितना समय मांगेंगे हम देने के लिए तैयार हैं. चर्चा में देश के स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और उनके साथ में भी रहूंगा. धीरे-धीरे हम चर्चा करके समाधान की तरफ बढ़ सकते हैं और समाधान से ही नया रास्ता भी निर्धारित हो सकता है. जहां भी आप कहें… चाहे आप जेपी नड्डा के आवास पर कहें या आप कहें ऑफिस में तो वहां चर्चा हो सकती है. हमारे लिए ये प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है. छात्रों और उनके प्रतिनिधियों से बातचीत करने के लिए सरकार की तरफ से चार बार प्रस्ताव जा चुका है. ‘

आइए बैठिए चर्चा कीजिए: जितेंद्र सिंह 

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘पीएम मोदी इस मामले को लेकर खुद संवदेनशील हैं. उन्होंने सुबह अपने कथन में कहा कि सर्वाधिक प्राथमिकता वह युवाओं के हितों को देते हैं. इसी से प्रेरित होकर उन्होंने ये निर्णय लिया कि जितने पर पेपरलीक के दोषी पाए जाएंगे उन्हें फास्ट ट्रैक के माध्यम से सजा दी जाएगी ताकि जल्दी निर्णय हो. मैं एक बार फिर बड़ी विनम्रता से आपसे अपील करता हूं कि आइए बैठिए चर्चा कीजिए और इस मुद्दे पर इमानदारी से एक रास्ता खोजें.’

सीजेपी चाहती है जंतर-मंतर आए सरकार

इससे पहले कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) ने स्पष्ट किया था कि हमने सरकार के सामने अपना मांगें रख दी है. अगर उन्हें अब बात करनी है तो उन्हें खुद जंतर-मंतर आना होगा. सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री के आवास पर बातचीत करने से इनकार कर दिया. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, ‘सीजेपी प्रदर्शनकारियों के साथ सरकार हर वक्त बातचीत को तैयार है, लेकिन बातचीत हमारे आवास पर या मंत्रालय में हो सकती है. बाकी कहीं बातचीत का औचित्य नहीं बनता है. कल से अब तक चार बार बातचीत का न्योता दिया गया है, लेकिन उनकी तरफ से जवाब नहीं आया.’

Salman Khan appeals students to end the protest and go back home soman wangchuk to end hunger strike Pm Modi will see

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Salman Khan Appeals Students To Go Back Home: सुपरस्टार सलमान खान ने कल ही स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट को सपोर्ट करते हुए उसे सही ठहराया था ही उनपर हुई हिंसा की आलोचना भी की थी। वहीं इस पोस्ट के 24 घंटे बाद सलमान खान ने इस प्रोटेस्ट को लेकर एक और पोस्ट करते हुए अब पीएम नरेंद्र मोदी पर भरोसा जताया है और सभी छात्रों से इस प्रोटेस्ट को खत्म कर घर वापसी की अपील की है।

Salman Khan

सलमान खान ने ट्वीट कर लिखा, ‘पढ़ाई और सुरक्षा, दोनों ही मामलों में छात्र हमारी पहली प्राथमिकता हैं इसलिए उन्हें और उनके माता-पिता को चिंता करने की जरूरत नहीं है। माननीय प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया है और मुझे यकीन है कि वे इस पेपर लीक के लिए सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे। इसलिए छात्रों, प्लीज अपने माता-पिता के पास अपने घर लौट जाइए।’

वहीं अपने ट्वीट में सलमान ने आगे लिखा, ‘और सोनम, बस हो गया। इसे और आगे मत खींचो। अगर जरूरत पड़ी तो इस जज्बे को किसी और दिन के लिए बचाकर रखना (हालांकि मुझे नहीं लगता कि जरूरत पड़ेगी) और कुछ खा-पी लो। अगर चाहो तो मैं घर से खाना भेज दूंगा।’

सलमान खान का ये एक्स पोस्ट पीएम मोदी के एक्स पोस्ट के बाद में आया है। पीएम मोदी ने आज इस प्रोटेस्ट पर रिएक्शन देते हुए एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए, केस के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा। इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं कि संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए, सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों की श्रृंखला में ये एक महत्वपूर्ण कदम है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।”

इससे पहले कल रात सलमान खान ने जो पोस्ट किया था उसमें लिखा था, “यह एक बहुत ही शांतिपूर्ण आंदोलन था, बहुत दुख की बात है कि इसने हिंसक रूप ले लिया, जो छात्र और उनके परिवार घायल हुए, उनके प्रति मेरी पूरी संवेदना है। पेपर लीक एक बहुत गंभीर मुद्दा है। मुझे यह देखकर खुशी है कि हमारे देश के बच्चे बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए एकजुट हुए हैं और उनके माता-पिता ने भी उनका साथ दिया है। मैं उनके इस कदम की सच में सराहना करता हूं। उन्होंने लगन, ईमानदारी और कड़ी मेहनत करके अपना भविष्य बनाने और एक बेहतर, शिक्षित भारत के निर्माण के प्रति अपना उत्साह दिखाया है। यह आंदोलन या विरोध प्रदर्शन ही सही तरीका है और छात्रों ने इसे शांतिपूर्ण ढंग से किया है। वे बहुत साहसी और बहादुर हैं। शिक्षा के प्रति प्रेरित और उत्साहित यह पीढ़ी भारत का नाम रोशन करेगी। यह मुद्दा छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के बीच का है। इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। इसका श्रेय केवल हमारे देश के छात्रों को ही मिलना चाहिए।”

साथ ही सलमान खान पहले भी सरकार पर यकीन जताते हुए सलमान खान ने लिखा, “मुझे यकीन है कि सरकार भी उन्हें पूरा समर्थन देगी और शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाएगी। यह सभी के लिए फायदेमंद स्थिति है। एक सकारात्मक फैसले की उम्मीद और प्रार्थना है। जो लोग शिक्षित होना चाहते हैं, उन सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। शिक्षा ही अगला ट्रेंड और फैशन होना चाहिए और इसे हर साल और अधिक लोकप्रिय व आकर्षक बनना चाहिए, ताकि दूसरे देशों से लोग पढ़ने के लिए भारत आएं और भारत एक एजुकेशन हब बन जाए।”

वर्कफ्रंट की बात करें तो सलमान की फिल्म ‘मातृभूमि’ इस साल रिलीज होनी है। इसके लिए उन्होंने काफी मेहनत की है। फिल्म में वो आर्मी ऑफिसर के रोल में नजर आएंगे। इसके साथ ही वो साउथ की भी एक फिल्म कर रहे हैं। इसमें उनके अपोजिट नयनतारा नजर आएंगी।



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University of Mount Saint Vincent President Susan R. Burns discusses a new partnership that allows students to complete trade certifications in addition to an associate degree.