NEET पेपर लीक, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और शिक्षा प्रणाली में सुधार जैसे मुद्दों पर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच सदन में जमकर तकरार हो रही है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान ने सदन में भूचाल ला दिया. राहुल ने एक छात्रा के हवाले से कहा कि वह ‘इडियट’ को भगवान मानने वालों को ‘अंधभक्त’ मानती है. इस पर बीजेपी सांसदों ने जमकर हंगामा किया और स्पीकर ओम बिरला ने ‘इडियट’ शब्द को असंसदीय करार देते हुए कार्यवाही से हटाने का आदेश दिया. अब मामला सिर्फ सदन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बाहर भी बवाल मचा है, लेकिन क्या…
लोकसभा में राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी बुधवार को लोकसभा के मानसून सत्र 2026 में CJP आंदोलन और शिक्षा प्रणाली पर बोल रहे थे. उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत में कहा कि उनकी मुलाकात एक 18 साल उम्र की स्टूडेंट ‘लवली’ से हुई, जो CJP प्रदर्शन में शामिल थी. राहुल ने उसके हवाले से कहा कि छात्रों की तीन कैटेगरी हैं:
- वे छात्र जो ‘ओपन माइंड’ और ‘ओपन हार्ट’ वाले होते हैं. वे जानते हैं कि दुनिया बदल रही है, ज्ञान बदलता है और उन्हें हर सच नहीं पता.
- वे छात्र जो ‘अहंकारी’ होते हैं. वे सोचते हैं कि उन्हें सब कुछ पता है, वे सुनते नहीं, दूसरों के सच को नहीं समझते. राहुल ने कहा कि जब उन्होंने लवली से पूछा कि वह ऐसे छात्रों को क्या कहती हैं, तो उसने कहा, ‘मैं इन्हें इडियट समझती हूं.’ राहुल ने बताया कि लवली ने आगे कहा कि ये ‘इडियट’ किसी की नहीं सुनते और खुद को भगवान बताने की कोशिश करते हैं.
- राहुल ने कहा कि उन्होंने लवली से पूछा कि तीसरी कैटेगरी क्या है, तो उसने कहा- ‘अंधभक्त.’ यानी वे लोग जो ‘इडियट’ को भगवान मानते हैं और उसे फॉलो करते हैं.
राहुल ने यह भी कहा कि छात्र असल में इसलिए नाराज हैं क्योंकि उन्हें भारत में अपनी बात कहने, सवाल पूछने और अपने जुनून को फॉलो करने की इजाजत नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि ‘शिक्षा व्यवस्था पर RSS का कब्जा हो चुका है.’ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ‘दिखावटी’ है, क्योंकि शिक्षा मंत्रालय असल में RSS चलाता है.
इसके अलावा राहुल ने गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, ‘गृह मंत्री ने छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया’ और ‘पैलेट गन’ चलाने की इजाजत दी.
‘इडियट’ शब्द पर बीजेपी का हंगामा और स्पीकर का आदेश
जैसे ही राहुल ने ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ शब्दों का इस्तेमाल किया, ट्रेजरी बेंच के सदस्यों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया. बीजेपी सांसदों ने कहा कि राहुल असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं और एक छात्रा के नाम पर वे ऐसे शब्द बोल रहे हैं जो सदन की गरिमा के खिलाफ हैं. उन्होंने मांग की कि इन शब्दों को कार्यवाही से हटाया जाए.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा, ‘जो शब्द असंसदीय होगा, उसे निकाल दिया जाएगा.’ उन्होंने राहुल से कहा कि वे ऐसे शब्दों का इस्तेमाल न करें.
इस पर राहुल ने कहा कि ‘इडियट शब्द की जगह मैं दूसरा शब्द दे देता हूं’. लेकिन स्पीकर ने साफ कहा, ‘इसके लिए आपको व्यवस्था देने की जरूरत नहीं है, मैं व्यवस्था दे चुका हूं.’ यानी स्पीकर ने पहले ही ‘इडियट’ शब्द को असंसदीय घोषित कर दिया था और उसे कार्यवाही से हटाने का आदेश दे दिया था.
लोकसभा में असंसदीय शब्दों का नियम क्या है?
लोकसभा के नियम 380 के मुताबिक, अगर स्पीकर को लगता है कि किसी सदस्य का बोला शब्द या टिप्पणी मानहानि, अशोभनीय असंसदीय या सदन की गरिमा के खिलाफ है. लोकसभा अध्यक्ष उसे सदन की कार्रवाई से हटे का आदेश दे सकता है.
नियम 381 के मुताबिक, कार्यवाही से हटाए गए शब्द या टिप्पणी को रिकॉर्ड में बीप के साथ दिखाया जाता है और उसके नीचे ‘Expunged as ordered by the Chair’ लिखा जाता है. किसी शब्द को असंसदीय माना जाएगा या नहीं, इसका फैसला स्पीकर उस शब्द के मायने और परिस्थितियों को देखते हुए करते हैं. इस मामले में स्पीकर बिरला ने ‘इडियट’ शब्द को असंसदीय माना.
‘छात्रों पर गोली चलाने’ के आरोप पर रिजिजू-राहुल में जमकर बहस
राहुल गांधी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि ‘गृह मंत्री ने छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया’ और ‘पैलेट गन’ चलाने की इजाजत दी. यह आरोप इतना गंभीर था कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू तुरंत खड़े हो गए और राहुल पर पलटवार किया.
रिजिजू ने कहा, ‘आप बिना सोचे-समझे बोल रहे हैं. ऐसा मत बोलिए. आपको गंभीरता से बोलना चाहिए. ये ठीक नहीं है. ये किस आधार पर आपने बयान दिया? आपको किसने बताया? आप माफी मांगिए. गोली चली, ये छोटी बात नहीं है. ऐसा कैसे कह सकते हैं कि किसी ने गोली चलाई? ये गंभीर आरोप है.’
राहुल ने अपनी बात पर अड़े रहे और कहा कि अगर गृह मंत्री ने कोई आदेश नहीं दिया है, तो उन्हें सदन में आकर साफ करना चाहिए कि उन्होंने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया.
इस पर विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी और ‘राहुल गांधी को बोलने दो, राहुल गांधी को बोलने दो’ नारे लगाए.
समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा, ‘अगर नेता प्रतिपक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं तो ये सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि छात्रों पर ऐसा व्यवहार करने वाले की जांच करे.’ लेकिन रिजिजू ने साफ कहा, ‘आप जांच की मांग करिए, लेकिन राहुल गांधी सीधे-सीधे गृह मंत्री पर आरोप लगा रहे हैं. आपको माफी मांगना होगा. झूठा आरोप लगाया है.’
लोकसभा के बाहर राहुल गांधी ने क्या कहा?
अपने भाषण के बाद संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा, ‘गृह मंत्री शाह सदन में नहीं आए, जबकि उन्हें छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर जवाब देना चाहिए था. अगर गृह मंत्री ने कोई आदेश नहीं दिया है, तो उन्हें सदन में आकर साफ करना चाहिए कि उन्होंने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया. सबसे बड़ी बात यह है कि मुझे संसद में बोलने का अधिकार है और वह अधिकार मुझे मिलना चाहिए.’
राहुल ने यह भी कहा, ‘छात्र असल में इसलिए नाराज हैं क्योंकि उन्हें भारत में छात्र बने रहने, अपने जुनून को फॉलो करने, अपनी बात कहने और अपने मन के सवाल पूछने की इजाजत नहीं है. उन्हें वह बेतुका इतिहास मानना पड़ता है जिसकी कल्पना RSS करता है.’
स्पीकर बिरला का रुख: संतुलन की कोशिश
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पूरे मामले में संतुलन बनाने की कोशिश की. उन्होंने राहुल के ‘इडियट’ शब्द को असंसदीय बताकर कार्यवाही से हटाने का आदेश दिया, लेकिन साथ ही राहुल को बोलने का अवसर भी दिया.
बिरला ने कहा कि वे सदन की गरिमा बनाए रखना चाहते हैं और कोई भी सदस्य ऐसे शब्दों का इस्तेमाल न करे जो असंसदीय हों. उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई सदस्य सदन की मर्यादा का उल्लंघन करेगा तो वे सख्त कार्रवाई करेंगे. हालांकि, बिरला के इस फैसले से न तो बीजेपी पूरी तरह संतुष्ट हुई और न ही विपक्ष.
बीजेपी चाहती थी कि राहुल को माफी मांगने के लिए मजबूर किया जाए, जबकि विपक्ष का कहना था कि स्पीकर को राहुल को बिना किसी रुकावट के बोलने देना चाहिए.
सोशल मीडिया पर क्या चल रहा है?
राहुल के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है. RahulGandhi, Idiot, BlindBhakt और CJPProtest जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं. बीजेपी समर्थक राहुल को ‘असंसदीय’ और ‘गैर-जिम्मेदाराना’ बयान देने के लिए निशाना बना रहे हैं, तो कांग्रेस और विपक्षी समर्थक उनके बयान को ‘सच्चाई’ बता रहे हैं.
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि राहुल ने CJP आंदोलन के छात्रों की बात को सदन में उठाकर सही काम किया, लेकिन ‘इडियट’ शब्द का इस्तेमाल उन्हें नहीं करना चाहिए था. वहीं, कुछ यूजर्स का कहना है कि ‘अंधभक्त’ शब्द तो ठीक है क्योंकि यह व्यवस्था पर सवाल उठाता है, लेकिन ‘इडियट’ शब्द असंसदीय था.



