Bobby Deol’s impressive de-aging in ‘Alpha’ is the talk of the town; YRF’s VFX studios

Bobby Deol’s impressive de-aging in ‘Alpha’ is the talk of the town; YRF’s VFX studios


Bobby Deol VFX: यश राज फिल्म्स की आलिया भट्ट और शर्वरी अभिनीत धमाकेदार पॉपकॉर्न एक्शन एंटरटेनर ‘ऐल्फा’ दुनियाभर के सिनेमाघरों में सफलतापूर्वक प्रदर्शित हो रही है और अब तक 92.75 करोड़ रुपये से अधिक की वैश्विक कमाई कर चुकी है।

Bobby Deol

जहां दर्शक फिल्म के हाई-ऑक्टेन एक्शन और रोमांचक कहानी का आनंद ले रहे हैं, वहीं फिल्म का सबसे चर्चित पहलू बॉबी देओल का बेहद सहज और वास्तविक डी-एजिंग भी बन गया है। फिल्म के एक महत्वपूर्ण हिस्से में बॉबी को उनके ‘सोल्जर’, ‘गुप्त’ और ‘बरसात’ वाले दौर के युवा रूप में दिखाया गया है, जिसने दर्शकों को खासा प्रभावित किया है।

यह विजुअल ट्रांसफॉर्मेशन यश राज फिल्म्स के अत्याधुनिक वीएफएक्स विभाग वायएफएक्स स्टूडियोज़ ने तैयार किया है। इसे केवल तकनीकी प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि कहानी को भावनात्मक रूप से अधिक प्रभावशाली बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया, ताकि दर्शकों को ऐसा महसूस हो कि वे वास्तव में किरदार को उसकी जिंदगी के उसी दौर में देख रहे हैं। निर्देशक शिव रवैल के विज़न के अनुरूप वायएफएक्स स्टूडियोज़ ने अत्याधुनिक तकनीक और बारीक कलात्मक कौशल का इस्तेमाल करते हुए इस प्रभाव को साकार किया।

शिव रवैल कहते हैं, “शुरुआत से ही हमारे लिए यह विजुअल इफेक्ट केवल दिखावे के लिए नहीं था। मेरे लिए हर रचनात्मक निर्णय कहानी की सेवा करना चाहिए। दर्शकों को यह पूरी तरह विश्वास होना जरूरी था कि वे किरदार को उसकी जिंदगी के एक खास दौर में देख रहे हैं। अगर यह भ्रम सहज नहीं लगता, तो भावनात्मक प्रभाव भी वैसा नहीं पड़ता। हमारी सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि तकनीक पूरी तरह अदृश्य रहे, ताकि दर्शकों का ध्यान केवल कहानी और अभिनय पर रहे, इफेक्ट पर नहीं।”

पहली बार इस तरह की तकनीक का अनुभव करने वाले बॉबी देओल कहते हैं, “अपने चेहरे से सालों को गायब होते देखना सचमुच एक अनोखा अनुभव था। मैंने अपने करियर में कई तरह के किरदार निभाए हैं, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ। इससे यह एहसास हुआ कि फिल्म निर्माण तकनीक कितनी आगे बढ़ चुकी है। लेकिन तकनीक सिर्फ एक हद तक ही मदद कर सकती है। आखिरकार किरदार की भावनाओं को सच्चाई के साथ निभाना अभिनेता की जिम्मेदारी होती है। यही बात मेरे लिए सबसे रोमांचक रही।”

इस उपलब्धि के पीछे वायआरएफ के इन-हाउस वायएफएक्स स्टूडियोज़ की बड़ी भूमिका रही। वायएफएक्स स्टूडियोज़ की प्रमुख और वायएफएक्स सुपरवाइज़र शेरी भारदा कहती हैं, “आज के दर्शक बेहद सजग हैं, इसलिए विजुअल इफेक्ट्स लगभग अदृश्य होने चाहिए। वायएफएक्स में पहली बार हमने पूरे सीक्वेंस में इतने बड़े स्तर पर AI और वीएफएक्स का संयोजन किया। बॉबी देओल के शुरुआती दौर की उपयुक्त फुटेज सीमित होने के कारण यह काम बेहद चुनौतीपूर्ण था। केवल चेहरा युवा दिखाना पर्याप्त नहीं होता; त्वचा, झुर्रियां, आंखों की अभिव्यक्ति जैसी छोटी-छोटी बारीकियां ही भ्रम को वास्तविक बनाती हैं। AI डी-एजिंग में ‘डेड आइज़’ जैसी समस्या आम होती है, इसलिए हमने AI और हमारे कलाकारों की विशेषज्ञता का मिश्रित मॉडल अपनाया, जिससे हर फ्रेम पर पूरा नियंत्रण बना रहा। डी-एजिंग का मतलब सिर्फ किसी को जवान दिखाना नहीं, बल्कि उसके अभिनय और भावनाओं को पूरी तरह सुरक्षित रखना है। हमारे लिए यह एक बड़ा मील का पत्थर है।”

‘ऐल्फा’ में किया गया यह डी-एजिंग कार्य वायआरएफ के वायएफएक्स स्टूडियोज़ के लिए एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह दर्शाता है कि स्टूडियो विश्वस्तरीय फिल्म निर्माण तकनीक में लगातार निवेश कर रहा है और हर तकनीकी नवाचार को कहानी को बेहतर बनाने के उद्देश्य से इस्तेमाल कर रहा है।

आदित्य चोपड़ा निर्मित और शिव रवैल निर्देशित ‘ऐल्फा’ में आलिया भट्ट,शर्वरी , बॉबी देओल और अनिल कपूर प्रमुख भूमिकाओं में हैं। फिल्म फिलहाल दुनियाभर के सिनेमाघरों में सफलतापूर्वक प्रदर्शित हो चुकी है।