North East Delhi Riots: उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान मारे गए आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में दिल्ली की एक स्थानीय अदालत ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी करार दिया है. फरवरी 2020 में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान 26 फरवरी को अंकित शर्मा का शव एक नाले से बरामद हुआ था. इस मामले में ताहिर हुसैन के अलावा जावेद, अनस, नसीम और कासिम को भी विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया गया है. हालांकि, साक्ष्यों के अभाव में छह अन्य आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया.
फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा भड़क गई थी. चांद बाग, खजूरी खास और मुस्तफाबाद समेत कई क्षेत्रों में भारी पत्थरबाजी, आगजनी और गोलीबारी हुई थी. इस सांप्रदायिक हिंसा में 53 लोगों की जान गई थी और कई लोग घायल हुए थे.
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 25 फरवरी 2020 को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा कार्यालय से घर लौटे थे. इलाके में तनाव का माहौल देखकर वे घर से बाहर निकले. आरोप है कि इसी दौरान दंगाइयों ने उन्हें पकड़ लिया और तत्कालीन आप पार्षद ताहिर हुसैन के घर की ओर ले गए, जहां उन पर धारदार हथियारों से हमला कर उनकी हत्या कर दी गई. बाद में उनका शव नाले में फेंक दिया गया.
दिल्ली दंगे का खौफनाम मर्डर
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या), 153A (वैमनस्य फैलाना), 147 (दंगा), 148 (घातक हथियार के साथ दंगा) और धारा 149 के तहत दोषी ठहराया. हालांकि, उन्हें धारा 120B (आपराधिक साजिश) और धारा 109 (उकसाने) के आरोपों से बरी कर दिया गया. अदालत ने नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को भी हत्या को छोड़कर अन्य आरोपों में दोषी ठहराया, जबकि हसीन उर्फ मुल्लाजी, फिरोज, गुलफाम, शोएब, समीर खान और मुंताजिम उर्फ मूसा को बरी कर दिया.
फैसला सुनाए जाने के दौरान ताहिर हुसैन अदालत में फूट-फूटकर रो पड़े. उनके वकील ने उन्हें सांत्वना दी. अदालत ने जमानत पर बाहर चल रहे अनस और जावेद को तुरंत हिरासत में लेने का भी आदेश दिया. फिलहाल अदालत ने सजा पर सुनवाई की तारीख तय नहीं की है और विस्तृत फैसले का इंतजार किया जा रहा है.
यह मामला अंकित शर्मा के पिता रविंद्र कुमार की शिकायत पर दयालपुर थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है. शिकायत के अनुसार, अंकित शर्मा 25 फरवरी को कार्यालय से लौटने के बाद बाहर निकले थे, लेकिन काफी देर तक वापस नहीं आए. बाद में स्थानीय लोगों ने परिवार को बताया कि उनकी हत्या कर दी गई है और शव चांद बाग पुलिया के पास खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया है. इसके बाद पुलिस ने शव बरामद किया और जांच शुरू की.
पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, ताहिर हुसैन 24 और 25 फरवरी 2020 को अपने घर और चांद बाग पुलिया के पास भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे. आरोप है कि उन्होंने भीड़ को सांप्रदायिक रूप से भड़काया और हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के लिए उकसाया. अभियोजन का दावा है कि उनके उकसावे के बाद भीड़ ने दुकानों और घरों में आग लगाई, पत्थरबाजी और पेट्रोल बम से हमले किए तथा अंकित शर्मा को पकड़कर उनकी हत्या कर दी.
अदालत ने क्या कहा
विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने फैसले के बाद कहा कि यह किसी भी पक्ष की जीत नहीं, बल्कि पूरे समाज की हार है. उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार ने अपना बेटा खोया है और अब दोषी ठहराए गए लोगों के परिवार भी दुख झेलेंगे. उनके मुताबिक, ऐसे मामलों में अंततः समाज ही सबसे बड़ा नुकसान उठाता है.
वहीं, ताहिर हुसैन की वकील तारा नरूला ने फैसले पर निराशा जताते हुए कहा कि न तो अंकित शर्मा के परिवार को न्याय मिला और न ही ताहिर हुसैन को. उन्होंने कहा कि बचाव पक्ष इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देगा. उनके अनुसार, अभी विस्तृत फैसला सामने नहीं आया है, इसलिए उसके अध्ययन के बाद आगे की कानूनी रणनीति तय की जाएगी.



