पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार (20 जून, 2026) को कोलकाता नगर निगम (KMC) की तरफ से शहर के एक प्रमुख सड़क सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड किए जाने के फैसले का स्वागत किया है, जिसके बाद कांग्रेस ने कोलकाता नगर निगम के इस फैसले पर पलटवार करते हुए बीजेपी और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर निशाना साधा है.
पवन खेड़ा ने भाजपा पर साधा निशाना
भाजपा पर निशाना साधते हुए कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने रविवार (21 जून, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया है. उन्होंने कहा, ‘मूर्खों की जमात है यह भाजपाइयों की. हसन सुहरावर्दी और हुसैन सुहरावर्दी में फर्क ही नहीं पता इन जाहिलों को.’
मूर्खों की जमात है यह भाजपाइयों की। हसन सुहरावर्दी और हुसैन सुहरावर्दी में फ़र्क़ ही नहीं पता इन जाहिलों को। https://t.co/DR8GXy93Ly
— Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ (@Pawankhera) June 21, 2026
राजनीतिक विज्ञान आपको ये बात नहीं सिखाता- जयराम
वहीं, कांग्रेस के राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने कहा, ‘हसन सुहरावर्दी, जिनके नाम पर इस सड़क का नाम रखा गया था, वो कलकत्ता यूनिवर्सिटी के कुलपति (वाइस चांसलर) थे. उनके बाद श्यामा प्रसाद मुखर्जी कुलपति बने थे, जबकि श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पिता सर आशुतोष मुखर्जी उनसे कुछ साल पहले इस पद पर रह चुके थे, लेकिन पूरा राजनीतिक विज्ञान आपको इस तरह की बातें नहीं सिखाता है.’
Hassan Suhrawardy after whom the road was named was Vice Chancellor of Calcutta Univ. Syamaprasad Mookerjee had succeeded him while SPM’s father Sir Ashustosh Mookerjee had preceded him by some years. But Entire Political Science doesnt teach you such stuff. https://t.co/m3x8WTknCf
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) June 21, 2026
सड़क का नाम बदलने पर क्या बोले बंगाल के मुख्यमंत्री?
आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता नगर निगम के अंतर्गत आने वाले सड़क के नाम बदलने को ऐतिहासिक भूल को सुधारने वाला कदम करार दिया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इसे लेकर X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट शेयर किया. उन्होंने कहा कि कोलकाता नगर निगम की तरफ से लिया गया यह ऐतिहासिक फैसला न्यायपूर्ण और समायोचित है. दशकों तक शहर की एक महत्वपूर्ण सड़क का नाम ऐसे व्यक्ति के नाम पर रहा, जिस पर सत्ता का दुरुपयोग कर राजनीतिक लाभ के लिए निर्दोष नागरिकों के नरसंहार को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं.
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