क्रिप्टो के जरिए 2500 करोड़ रुपये से ज्यादा के अवैध विदेशी लेनदेन का खुलासा, ED की बड़ी कार्रवाई

क्रिप्टो के जरिए 2500 करोड़ रुपये से ज्यादा के अवैध विदेशी लेनदेन का खुलासा, ED की बड़ी कार्रवाई


ED ने क्रिप्टोकरेंसी के जरिए कथित तौर पर किए जा रहे बड़े पैमाने पर अवैध विदेशी धन क्रॉस बॉर्डर मनी ट्रांसफर के मामले में बड़ी कार्रवाई की है. ED की बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने 17 जून को FEMA के तहत बेंगलुरु स्थित छह परिसरों पर छापेमारी की. ED के मुताबिक कई कंपनियां वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) यानी क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल कर भारत और विदेशों के बीच धन का लेनदेन कर रही थी. शुरुआती जांच में 2500 करोड़ रुपये से अधिक के FEMA उल्लंघन का मामला सामने आया है.

ED ने जिन प्रमुख कंपनियों के ठिकानों पर तलाशी ली, उनमें Transak, Carret, Xpat, Onramp.money और Onmeta) शामिल है. ED को शिकायत मिली थी कि कुछ कंपनियां भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति के बिना क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से विदेशों में पैसे भेजने और मंगाने का काम कर रही है. जांच में सामने आया कि ये कंपनियां इंटरनेट और सोशल मीडिया पर खुलेआम ऐसे विज्ञापन चला रही थी. जिनमें क्रिप्टो के जरिए तेजी से अंतरराष्ट्रीय क्रॉस बॉर्डर मनी ट्रांसफर सुविधा देने का दावा किया जाता था.

जांच एजेंसी का कहना है कि ये कंपनियां “ऑन-रैम्प” और “ऑफ-रैम्प” सेवाएं उपलब्ध कराती थी. इसके जरिए ग्राहक अपने बैंक खाते से पैसे जमा कर क्रिप्टोकरेंसी खरीदते थे और बाद में उसे बेचकर दूसरे देश में भुगतान प्राप्त कर लेते थे. ED के मुताबिक किसी व्यक्ति को विदेश से भारत या भारत से विदेश पैसा भेजना होता था तो वो पहले इन प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन करता था.

ग्राहक कंपनी के बैंक खाते में जमा करता था पैसे

इसके बाद ग्राहक कंपनी के बैंक खाते में पैसा जमा करता था. उस रकम से USDT जैसी स्टेबल क्रिप्टोकरेंसी खरीदी जाती थी..क्रिप्टो को दूसरे देश या भारत के एक्सचेंज पर ट्रांसफर किया जाता था, बाद में उसे बेचकर प्राप्त राशि लाभार्थी के खाते में भेज दी जाती थी. कई मामलों में ग्राहक टीडीएस का दावा भी कर सकते थे.

ED का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में RBI द्वारा निर्धारित नियमों जैसे पर्पज कोड, FIRC और अन्य अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जा रहा था. जांच में सामने आया कि मोक्षाग्ना टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (Xpat) के जरिए अमेरिका में मौजूद ग्राहकों से पैसा लिया जाता था. इसके बाद रकम को क्रिप्टो में बदलकर भारत भेजा जाता था और यहां क्रिप्टो बेचकर प्राप्त धन भारतीय ग्राहकों को वितरित किया जाता था. ED के मुताबिक कंपनी का मुख्य संचालक अमेरिका में रहकर पूरे नेटवर्क को नियंत्रित कर रहा था..जबकि भारत में उसके परिवार के सदस्य संचालन में मदद कर रहे थे.

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ईडी ने क्या दावे किए हैं

ED ने दावा किया है कि ट्रांसाक टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने भी बिना RBI की अनुमति के क्रॉस बॉर्डर लेनदेन से जुड़ी सेवाएं दी. जांच में ये भी सामने आया कि कंपनी ने अपने मुनाफे को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर अमेरिका स्थित अपनी सहयोगी कंपनी को भेजा. Carret नामक मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए ग्राहकों को क्रिप्टो खरीदने और बेचने की सुविधा दी जाती थी. ED का आरोप है कि कंपनी विदेशी रेमिटेंस ऐप्स के साथ ओटीसी (OTC) डील कर भारत में बिना अनुमति क्रॉस बॉर्डर मनी ट्रांसफर  का काम कर रही थी. तलाशी के दौरान ED को ऐसे संकेत भी मिले हैं कि कुछ कंपनियां टैक्स हेवन देशों में बनाई गई शेल कंपनियों और विदेशी क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रही थी.. इससे आधिकारिक बैंकिंग चैनलों को दरकिनार कर धन का लेनदेन किया जा रहा था.

ईडी ने कुछ कंपनियों के बैंक खाते पर लगाई रोक

कार्रवाई के दौरान ईडी ने कुछ कंपनियों के बैंक खातों पर रोक लगा दी है. इन खातों में करीब 6 करोड़ रुपये की राशि मौजूद थी..एजेंसी का मानना है कि इन खातों का उपयोग अवैध विदेशी क्रॉस बॉर्डर मनी ट्रांसफर के लिए किया जा रहा था. ED ने कहा है कि ये जांच अभी शुरुआती चरण में है.. अब तक के साक्ष्यों से 2500 करोड़ रुपये से अधिक के FEMA उल्लंघन के संकेत मिले है. मामले में आगे की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते है.

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