‘लोकतंत्र का मर्डर कर दिया’, मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद चुनाव आयोग दफ्तर के बाहर बवाल

‘लोकतंत्र का मर्डर कर दिया’, मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद चुनाव आयोग दफ्तर के बाहर बवाल


दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर मंगलवार शाम उस वक्त हंगामा मच गया, जब मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों में से एक पर कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया. समाचार एजेंसी के मुताबिक, नामांकन हलफनामे में कथित तौर पर कानूनी मामले छिपाने के कारण रद्द किया गया. इसके बाद केसी वेणुगोपाल के नेतृत्व में कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल निर्वाचन सदन पहुंचा, जहां उन्हें गेट पर ही रोक दिया गया.

सुरक्षा कर्मियों का कहना था कि बैठक के लिए उन्हें कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है, जबकि कांग्रेस नेता अंदर जाकर अपना पक्ष रखना चाहते थे. इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर रोका जा रहा है और यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि वे केवल अपना ज्ञापन चुनाव आयोग को सौंपना चाहते हैं.

चुनाव आयोग दफ्तर के बाहर हंगामा

वहीं, केसी वेणुगोपाल ने इस पूरे घटनाक्रम को “लोकतंत्र की हत्या” बताया, जबकि दूसरी ओर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नामांकन रद्द होने के फैसले का समर्थन करते हुए कांग्रेस को आत्ममंथन की सलाह दी. इस घटनाक्रम के बाद चुनाव आयोग के बाहर राजनीतिक तनाव और आरोप-प्रत्यारोप का माहौल बन गया.

निर्वाचन सदन के गेट पर ही कांग्रेस नेता और सुरक्षा जवानों के बीच काफी देर तक बहस होती रही, जिससे वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, केसी वेणुगोपाल के नेतृत्व में कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने शाम साढ़े सात बजे चुनाव आयोग से मिलने के लिए समय मांगा था. इसी बैठक के सिलसिले में जयराम रमेश वहां पहुंचे थे, लेकिन एंट्री को लेकर विवाद खड़ा हो गया. जयराम रमेश के साथ केसी वेणुगोपाल, भूपेश बघेल, सचिन पायलट समेत अन्य नेता भी वहां पहुंचे.

जयराम बोले- ऐसे हाल कभी नहीं देखा

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग दफ्तर के लिए रवाना होने से पहले इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी आलोचना की. उन्होंने इसे “लोकतंत्र की हत्या” करार देते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं को अपनी बात रखने से रोका जाना बेहद चिंताजनक है. वहीं दूसरी ओर, मोहन यादव ने इस फैसले का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इस स्थिति पर सवाल उठाने के बजाय आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत है.

यह मामला अब केवल एक प्रशासनिक विवाद नहीं रह गया है, बल्कि सियासी बहस का केंद्र बन गया है- जहां एक पक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट बता रहा है, तो दूसरा पक्ष इसे नियमों के पालन के रूप में देख रहा है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि वे अपना पेटिशन लेकर चुनाव आयोग पहुंचे हैं, क्योंकि उनके उम्मीदवार को अयोग्य घोषित कर दिया गया है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब वे सिर्फ अपना पक्ष रखना चाहते हैं, तो उन्हें वेटिंग रूम में जाने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है.

कांग्रेस प्रतिनिधिंडल के साथ कल बैठक संभव

जयराम रमेश ने आगे कहा कि वे पिछले 35 वर्षों से सार्वजनिक जीवन में हैं और लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं, लेकिन उन्हें 10 मिनट से अधिक समय से इंतजार करवाया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर रोका जा रहा है और उन्होंने पहले कभी ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया.

मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि कल कांग्रेस सभी विधायक कार्यकर्ताओं के साथ चुनाव आयोग के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठेंगे. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के मेमोरेंडम में चुनाव आयुक्त के साथ अर्जेंट मीटिंग की मांग की गई है जिसकी जानकारी संबंधित विभाग ने चुनाव आयुक्त तक पहुंचा दी है.  हालांकि आज इस बैठक की संभावना ना के बराबर है.

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