एक तरफ जंतर मंतर पर प्रदर्शन जारी है, तो वहीं सोनम वांगचुक भी भूख हड़ताल पर हैं. 20 जुलाई को यह सभी संसद तक मार्च निकालेंगे. ऐसे में कई लोगों को समर्थन देखने को मिल रहा है. अब इस पर महात्मा गांधी के पोते का बयान भी आया है.
उन्होंने उपवास को लेकर अपनी बात रखी है. इतिहासकार और महात्मा गांधी के पोते राजमोहन गांधी ने पीटीआई से बात करते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने सिर्फ सरकारों को ही नहीं, बल्कि लोगों की सोच को बदलने के लिए भी उपवास का सहारा लिया था.
आयरलैंड में सबसे पहले हुई थी ब्रिटिश शासन के खिलाफ भूख हड़ताल
इसके अलावा उन्होंने कहा कि भारत से पहले आयरलैंड के लोगों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ भूख हड़ताल की थी. इनके अलावा भगत सिंह और जतिन दास ने भी सबसे पहले ज्यादा दिन तक भूख हड़ताल की थी. लेकिन महात्मा गांधी ने सबसे पहले भूख हड़ताल साउथ अफ्रीका में की थी. इसके अलावा उन्होंने अन्य छोटे और बड़े उपवास रखे थे.
VIDEO | Historian and Mahatma Gandhi’s grandson Rajmohan Gandhi says, “Gandhi used fasting to change minds, not just governments.”
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/r1k0sczQVO
— Press Trust of India (@PTI_News) July 19, 2026
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महात्मा गांधी ने अपने उपवास से लोगों के मन बदलने का काम किया
महात्मा गांधी ने के पोते राजमोहन गांधी ने कहा ‘यह सच है कि कई भूख हड़ताल उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ की थी. इसके अलावा उन्होंने कई बार भूख हड़ताल भारत के लोगों के मन में बदलाव को लेकर की थी. उन्होंने हिंदू और मुस्लिम की एकता को बनाए रखने के लिए भी उपवास किए. इसके अलाव उन्होंने कहा कि अगर सरकार बातचीत करे या उनकी मांगों को समझे तो उपवास को तुड़वाया जा सकता है. ‘
6 जून से चल रहा जंतर मंतर पर प्रदर्शन
बता दें, 6 जून से सीजेपी जंतर मंतर पर शिक्षा के मुद्दे पर प्रदर्शन कर रही है. वहीं, सोनम वांगचुक ने 21 दिन तक भूख हड़ताल की. इसके बाद शनिवार को दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर उन्हें जबरन उठाकर अस्पताल में एडमिट कर दिया. रविवार को उनके परिजनों की मांग की याचिका की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने अन्य अस्पताल में शिफ्ट करने से इनकार कर दिया है.
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