रामचंद्र गुहा के राहुल गांधी की योग्यता पर सवाल उठाने को लेकर फायर हुए थरूर, पूछा- ओबामा और मोदी को कितना तजुर्बा था

रामचंद्र गुहा के राहुल गांधी की योग्यता पर सवाल उठाने को लेकर फायर हुए थरूर, पूछा- ओबामा और मोदी को कितना तजुर्बा था


राहुल गांधी को लेकर प्रसिद्ध इतिहासकार और लेखक रामचंद्र गुहा के दिए बयान की कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार (6 जून) को कड़ी आलोचना की. रामचंद्र गुहा ने राहुल गांधी के राजनीतिक अनुभव और उनकी राजनीतिक यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उनके पास प्रधानमंत्री बनने के लिए आवश्यक प्रशासनिक अनुभव की कमी है. इसके अलावा इतिहासकार ने विदेश नीति की कुशलता को लेकर भी सवाल उठाए थे.

हाल ही में दिए एक मीडिया इंटरव्यू में राहुल गांधी के भारत के प्रधानमंत्री बनने को लेकर गुहा ने उनकी योग्यता पर सवाल उठाया था. उन्होंने खासकर गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकटों से निपटने के लिए उनके पारंपरिक प्रशासनिक अनुभव और विदेश नीति की कुशलता की कमी का जिक्र किया था. रामचंद्र गुहा ने सवाल उठाए कि राहुल गांधी को उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि और व्यक्तिगत शालीनता के अलावा इस पद के लिए क्या चीजें योग्य बनाती हैं.

शशि थरूर ने गुहा को दिया जवाब

उनके इसी बयान को लेकर शशि थरूर ने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए बराक ओबामा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उदाहरणों का हवाला दिया. थरूर ने तर्क दिया कि राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए पूर्व कार्यकारी पद या विदेश नीति का अनुभव होना जरूरी नहीं है. उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘कम ऑन रामचंद्र गुहा, ये तो कुछ ज़्यादा ही हो रहा है. जब दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति बराक ओबामा बने, तब इलिनोइस से पहली बार सीनेटर बने बराक ओबामा को विश्व मामलों का कितना अनुभव था.’ इसके अलावा पीएम मोदी का जिक्र करते हुए थरूर ने कहा कि भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संभालने के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री को कितना अंतरराष्ट्रीय अनुभव था?

‘राहुल गांधी के दुनिया भर के नेताओं के साथ संपर्क’ 

शशि थरूर ने आगे आगे तर्क दिया कि राहुल गांधी एक दशक से अधिक समय से एक राष्ट्रीय पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और उनके दुनिया भर के नेताओं के साथ संपर्क हैं और उनकी पार्टी के अंदर और बाहर सलाहकारों की कोई कमी नहीं है. उन्होंने कहा कि कोई भी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री अकेले संकटों का सामना नहीं करता, इसीलिए तो वह सरकार का मुखिया होता है. मुझे लगता है कि इस बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए विवाद को अब समाप्त करने का समय आ गया है.

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