राज्यसभा का नॉमिनेशन रद्द करवाने में कांग्रेस की साजिश? BJP के दावों पर मीनाक्षी नटराजन का जवाब

राज्यसभा का नॉमिनेशन रद्द करवाने में कांग्रेस की साजिश? BJP के दावों पर मीनाक्षी नटराजन का जवाब


बीजेपी ने मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभ नॉमिनेशन रद्द होने को लेकर कांग्रेस पर साजिश का आरोप लगाया था. इस पर अब नटराजन ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने भाजपा के आरोपों पर पलटवार करते हुए राज्यसभा सीट को लेकर किसी भी साजिश से इनकार किया है. साथ ही कहा है कि दो रिटर्निंग अधिकारियों ने उनका विरोध किया है. इसके अलावा लोकतंत्र के सिद्धांतों का हवाला देकर उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधा.

नटराजन ने पीटीआई को जानकारी देते हुए कहा कि कोई साजिश नहीं है. कांग्रेस पार्टी के खिलाफ साजिश की बात बीजेपी फैला रही है. इससे हमारा उस साजिश से हटाया जा सके, जो वे देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ रच रहे हैं.

नटराजन ने कहा कि अगर कोई साजिश है भी तो किन वजहों से दो रिटर्निंग अधिकारियों ने मामूली आधार पर नॉमिनेशन रद्द कर दिया? असल में देश में लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश चल रही है. 

कांग्रेस नेता ने कहा कि उनके पास राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए जरूरी संख्या से दस कम सदस्य थे. तब भी वह कुछ न कुछ दाखिल कर रहे थे. इससे पता चलता है कि किस तरह की साजिश चल रही है. ये आरोप पूरी तरह से झूठे और बेबुनियाद हैं. 

क्या है पूरा मामला ? 

इससे पहले खबर आई थी कि नटराजन का राज्यसभा नॉमिनेशन खारिज होने के बाद कांग्रेस ने अंदरूनी जांच शुरू की. AICC की राज्य मामलों की इंचार्ज मीनाक्षी नटराजन को हैदराबाद में एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा. चुनाव रिटर्निंग ऑफिसर ने उनके राज्यसभा नॉमिनेशन पेपर ऑफिशियल तौर पर खारिज कर दिए. इसकी वजह उन्होंने नारायणपेट कांग्रेस नेता कंबम शिवकुमार रेड्डी और श्रीलता नाम की एक अन्य व्यक्ति से जुड़े स्थानीय विवाद से संबंधित एक पेंडिंग कानूनी कोर्ट नोटिस की जानकारी जानबूझकर नहीं दी थी.

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स्थानीय जिला अदालत में हाल ही में हुई एक कानूनी सुनवाई के दौरान, श्रीलता ने आश्चर्यजनक रूप से अपनी औपचारिक सिविल याचिका में मीनाक्षी नटराजन का नाम भी शामिल किया, जिसके बाद माननीय जज ने तुरंत वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता को एक औपचारिक कानूनी नोटिस जारी किया.

क्या कहते हैं कानूनी नियम?

चुनावी कानूनों के सख्त प्रावधानों के तहत, संसदीय सीट के लिए चुनाव लड़ने वाले किसी भी उम्मीदवार को अपने आधिकारिक नॉमिनेशन हलफनामे में सभी पेंडिंग कानूनी नोटिसों की जानकारी पारदर्शी तरीके से देनी होती है. उनके जमा किए गए दस्तावेजों में इस खास कोर्ट नोटिस का बिल्कुल भी जिक्र न होने से विपक्षी राजनीतिक गुटों को चुनाव अधिकारियों के सामने उनकी उम्मीदवारी को सफलतापूर्वक चुनौती देने के लिए जरूरी कानूनी मौका मिल गया.

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