पुणे के रियल स्टेट बिजनेसमैन केतन विशाल अग्रवाल हत्याकांड ने पूरे देश को तो सदमे में डाल दिया है, वहीं, इस केस के चलते अब एक जगह की चर्चा निकल पड़ी है. यह जगह है लोहगढ़ किला. यहीं 26 साल के इस युवा बिजनेसमैन की हत्या उसी की होने वाली पत्नी सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने की है. दोनों पुलिस हिरासत में है. फिलहाल जांच जारी है.
लेकिन हम इस बार आपसे उस ऐतिहासिक किले की पूरी कहानी साझा कर रहे हैं, जिसका कनेक्शन सातवाहनों, चालुक्यों के साम्राज्य और छत्रपति शिवाजी महाराज से है.
पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है, लोहागढ़ का किला
लोनावला में स्थित यह किला स्थानीय और देश के पर्यटकों के बीच एक आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. किले की दीवारें लोहे से बनी हुई. तभी इसे लोहागढ़ का किला कहा जाता है. ऐसे में जब भी बारिश का मौसम होता है तो इस किले के आसपास प्राकृतिक सौंदर्यता बढ़ जाती है. पूरे राज्य से पर्यटक यहां आते हैं.
Indore News: NEET एग्जाम देकर लौटी छात्रा का नर्मदा नदी के किनारे मिला शव, मां को किया था आखिरी फोन
क्या है किले का इतिहास?
किले के इतिहास के बारे में बात करें, तो यह महाराष्ट्र के लोनावाला इलाके के सह्यात्री पर्वतमाला पर है. इसी बीच में बना हुआ है, लोहागढ़ का किला. इस किले का निर्माण किस साल में किया गया, इसकी जानकारी फिलहाल सटीक नहीं है. हालांकि, सातवाहन वंश ने इस किले पर राज किया है. सातवाहनों के अलावां चालुक्य, राष्ट्रकूट, यादव, मुगल और मराठाओं ने इस किले से शासन किया है.
छत्रपति शिवाजी महाराज का किला
इस किले को जीतना मुश्किल रहा है. किले के आसपास खाई और संकरा रास्ता है. इसी वजह से सुरक्षा की दृष्टी से इस किले को मजबूत माना जाता रहा है. कहा जाता है कि शिवाजी महाराज अपने खजाने को इसी किले में रखते थे.1648 में इस किले को शिवाजी महाराज ने जीता था. इसके बाद 17 साल तक उनके पास रहा. 1665 में पुरंथर संधि के तहत इस किले को मुगलों को सौंप दिया. 1670 में शिवाजी महाराज ने इस किले पर फिर कब्जा कर लिया.
सिया बनी सोनम! अब राजा रघुवंशी की मां बोलीं, ‘लड़कियों को हिम्मत इसलिए मिल रही है क्योंकि…’



