West Bengal Election 2026: बंगाल में 8 की जगह अब सिर्फ 2 चरणों में चुनाव, ममता बनर्जी के लिए कितना मुश्किल? जानें एक्सपर्ट्स की राय

West Bengal Election 2026: बंगाल में 8 की जगह अब सिर्फ 2 चरणों में चुनाव, ममता बनर्जी के लिए कितना मुश्किल? जानें एक्सपर्ट्स की राय


बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का बिगुल बज चुका है. चुनाव आयोग ने रविवार को राज्य में तारीखों का ऐलान कर दिया है. राज्य में दो फेज में चुनाव होने हैं. पिछली बार यहां 8 फेजों में चुनावी कार्यक्रम संपन्न हुआ था. ऐसे में माना जा रहा है कि दो फेज में चुनाव होना बंगाल की वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए मुश्किल साबित हो सकते हैं. यहां 294 सीटों पर वोटिंग होगी. पहला फेज की वोटिंग 23 अप्रैल और दूसरे फेज की वोटिंग 29 अप्रैल को होगी. इसके अलावा 4 मई को चुनाव परिणाम आएंगे. टीएमसी को इस चुनाव में बीजेपी से कड़ी टक्कर मिल सकती है. 

राज्य में कई दिक्कतों से जूझ रही हैं ममता बनर्जी: एक्सपर्ट्स

दो फेज में चुनाव ममता बनर्जी के लिए मुश्किल साबित हो सकते हैं. ऐसा एक्सपर्ट्स का मानना है. वरिष्ठ पत्रकार प्रभाकर मणि तिवारी ने कहा कि यह चुनाव ममता बनर्जी के लिए चुनौती पहले से बना हुआ है. वह कई दिक्कतों से जूझ रही है. इनमें राज्य में वह पिछले 15 सालों से मुख्यमंत्री है और टीएमसी सरकार इस राज्य की शासन प्रशासन प्रणाली देख रही है. ऐसे स्वभाविक तौर पर एंटी इस्टेबलिशमेंट या विरोधी लहर राज्य में बढ़ा है. 

हालांकि, पिछले साल 8 फेज में चुनाव की आलोचना ममता बनर्जी ने की थी. लेकिन तब उनको 8 फेज का फायदा ही मिला था. उनको अपने तंत्र को इधर से उधर ले जाने का मौका मिल गया था. इस बार चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ जब आई थी तो तमाम दल ने दो चरण में चुनाव की मांग की थी. लेकिन टीएमसी ने इस मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं कहा था. ये ममता के लिए एक चुनौती हैं, क्योंकि एक साथ इतनी सीटों पर चुनाव. 6 दिनों के अंतर में दो फेज में अलग अलग 152 और 142 सीटों पर चुनाव होना, एक साथ इतनी सीटों पर चुनाव उनके लिए मुश्किल तो होने जा रही है. 

ममता बनर्जी कई महीनों में चुनावी मोड में: एक्सपर्ट्स

इसके अलावा वरिष्ठ पत्रकार आदेश रावल  ने कहा है कि ममता बनर्जी कई महीनों से चुनाव के मोड में हैं. कैसे राज्य में पिछले कुछ दिनों में ईडी बनाम पुलिस का झगड़ा हुआ. इसके बाद उन्हीं पूर्व डीजीपी को राज्यसभा भेज दिया. लेकिन बीजेपी के सामने राज्य में चैलेंज होता है. मतलब पूरा चुनाव मोदी-अमित शाह बनाम ममता बनर्जी होता है. बीजेपी के पास कोई ऐसा लोकल नेता नहीं है, जिसका कद ममता बनर्जी के बराबर हो सके. 

उन्होंने कहा कि फेज एक तकनीकि मुद्दा है. इसका फायदा या नुकसान बाद में समझ आएगा. इसके अलावा 8 फेज की तुलना में दो फेज में चुनाव का अंतर वोटिंग और मतगणना के बाद नजर आएगा. पिछले साल भी बीजेपी ने ममता बनर्जी के खिलाफ आक्रमक होकर चुनाव लड़ा था. बीजेपी की खास बात ये है कि जबतक नतीजे नहीं आते बीजेपी तबतक चुनाव लड़ती है. इधर, ममता बनर्जी इंडिया गठबंधन की एक ऐसी नेता हैं, जो अपने लड़ाकू पन के लिए जानी जाती हैं. उनके अंदर वो क्षमता है कि वो बीजेपी से लड़ सके. ऐसे ही बिहार चुनाव के जब रिजल्ट आए थे, तो उसके बाद से ही चर्चा शुरू हुई है कि क्या बीजेपी ममता बनर्जी को चुनाव हरा पाएगी? ममता बनर्जी एकमात्र ऐसी नेता हैं, जो बीजेपी के पिच पर जाकर खेलती हैं और उन्हें कड़ी टक्कर देती हैं. दो फेज का नुकसान होगा, फायदा होगा यह अलग विषय है. लेकिन राजनीतिक तौर पर ममता बनर्जी बीजेपी को कड़ी टक्कर देने वाली हैं. 

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