Telangana Election Result: तेलंगाना में मतगणना जहां एक तरफ कांग्रेस के लिए राहत लेकर आई है तो वहीं दूसरी तरफ इसने असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM को बड़ा झटका दिया है. इस चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी ने ओवैसी का किला ध्वस्त कर दिया है. हैदराबाद और उसके आसपास की सीटों पर एकतरफा जीत दर्ज करने वाली ओवैसी की पार्टी इस बार अपनी सीट बचाने के लिए भी संघर्ष करती दिख रही है.
तेलंगाना में 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में ओवैसी की AIMIM को 7 सीटों पर जीत मिली थी. ये सभी सीटें हैदराबाद लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में आती हैं, लेकिन इस बार इन सात सीटों में से 4 पर एआईएमआईएम के उम्मीदवार लगातार पिछड़ रहे हैं. पार्टी सिर्फ 3 सीटों पर आगे है. इस बार एआईएमआईएम 9 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. आइए देखते हैं ओवैसी के गढ़ हैदराबाद में आने वाली 7 सीटों पर इस बार कैसा है AIMIM का प्रदर्शन.
1. मलकपेट
मलकपेट विधानसभा सीट पर दोपहर 1:40 बजे तक के रुझानों में AIMIM के अहमद बिन अब्दुल्ला बलाला आगे चल रहे थे. यहां दूसरे नंबर पर बीजेपी के समरेड्डी सुरेंदर रेड्डी हैं. 2018 में यहां AIMIM ने जीत दर्ज की थी.
2. कारवां
कारवां सीट पर पिछले चुनाव में AIMIM ने जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार दोपहर 1:40 बजे तक के रुझानों में बीजेपी के अमर सिंह आगे चल रहे थे. यहां दूसरे नंबर पर बीआरएस उम्मीदवार हैं. हैरानी की बात ये है कि AIMIM तीसरे नंबर पर है.
3. गोशामहल
गोशामहल सीट से बीजेपी के टी. राजा सिंह आगे चल रहे हैं. वह इससे पहले भी इस सीट से विधायक थे. 2018 में वह बीजेपी के इकलौते विधायक थे. हालांकि यहां एआईएमआईएम ने इस बार अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था.
4. चारमीनार
चारमीनार विधानसभा सीट से दोपहर 1:40 बजे तक के रुझानों में एआईएमआईएम के मीर जुल्फीकार अली आगे चल रहे थे. यहां पिछली बार भी ओवैसी की पार्टी ने ही जीत दर्ज की थी.
5. चंद्रयानगुट्टा
इस विधानसभा सीट पर असदुद्दीन ओवैसी के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी चुनाव लड़ते हैं. वह यहां से पिछली बार भी जीते थे. इस बार दोपहर 1:40 बजे तक के रुझानों में अकबरुद्दीन आगे चल रहे थे.
इन सीटों पर भी लड़खड़ाती दिखी AIMIM
ऊपर की सीटों के अलावा हैदराबाद में आने वाली याकूतपुरा सीट और बहादुरपुरा सीट पर भी ओवैसी की पार्टी के उम्मीदवार लड़खड़ाते दिखे.
क्या है इस नुकसान की वजह
ओवैसी को मुस्लिम राजनीति का बड़ा चेहरा माना जाता है. पिछले कुछ साल में इन्होंने लगभग हर राज्य में मुस्लिम वोट बैंक में अपनी पहुंच बनाई है और कई राज्यों में अपनी पार्टी को उतार चुके हैं. राजनीतिक एक्सपर्ट मानते हैं कि ओवैसी ने यहीं से गलती की. अपने गृह प्रदेश में वह महज 9 सीटों पर चुनाव लड़ते हैं, जबकि दूसरे राज्यों में 20-30 या इससे भी अधिक सीटों पर उम्मीदवार उतारते हैं. कांग्रेस लगातार ओवैसी की पार्टी को बीजेपी की बी टीम बताती रही है. कांग्रेस यह कहती है कि यह सिर्फ बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए मुस्लिम वोट बैंक को बांटती है. काफी हद तक अब मुस्लिम वोटर भी इस बात को समझने लगे हैं. जिस तरह कांग्रेस को तेलंगाना में बहुमत मिलता दिख रहा है, उससे साफ होता है कि कांग्रेस को मुस्लिम वोटरों का अच्छा खासा साथ मिला है.
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