Article 370 Verdict Updates: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त किए चार साल से ज्यादा का वक्त हो चुका है. हालांकि, इसे निरस्त किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई सारी याचिकाएं दायर की गईं. सुप्रीम कोर्ट सोमवार (11 नवंबर) को अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाने वाला है. चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संवैधानिक पीठ अपना फैसला सुनाएगी.
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई की वजह से किसी भी तरह के तनाव और संभावित संघर्ष के लिए पूरे जम्मू-कश्मीर में तैयारी की जा रही है. पुलिस पूरी तरह से मुस्तैद है और सेना के जवान भी अलर्ट पर हैं. देशभर में राजनीतिक नेताओं की तरफ से इस मुद्दे पर बयानबाजी का सिलसिला भी जारी है. विपक्ष की तरफ से लगातार कोशिश की जा रही है कि जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर से अनुच्छेद 370 की वापसी हो, जिसके जरिए केंद्रशासित प्रदेश को स्पेशल स्टेटस मिल पाए.
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने का ऐलान किया था. इसके साथ ही राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया था. इसके लिए सरकार की तरफ से ‘जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून’, 2019 लाया गया था, जिसे ही चुनौती दी गई है. जम्मू-कश्मीर के केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद से अभी तक वहां पर विधानसभा चुनाव नहीं हुए हैं. हालांकि, हाल के दिनों में स्थानीय चुनाव जरूर हुए हैं.
वहीं, सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 370 पर सुनवाई करने वाली पांच जजों की पीठ में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एसके कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट ने पांच सितंबर को इस मामले में अपना फैसला 11 दिसंबर के लिए सुरक्षित रख लिया था. देशभर की निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि आज सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला होने वाला है. इस फैसले से जम्मू-कश्मीर के आगे का भविष्य भी तय होने वाला है.



