PM Kisan Samman Nidhi Become Election Charity In India Name Of Farmer Welfare ABPP

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मोदी सरकार के कार्यकाल में देश के किसानों की दशा कितनी सुधरी? यह सवाल किसान सम्मान निधि शुरू होने के 5 साल बाद भी बना हुआ है. दिसंबर 2018 में किसानों की बेहतरी के लिए मोदी सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की थी.

शुरुआत में सिर्फ 2 एकड़ वाले किसानों को प्रत्येक साल 6 हजार रुपए देने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में एकड़ का बैरियर सरकार ने हटा लिया. 

किसान निधि लागू होने के बाद से ही सवालों के घेरे में है. पहले इसके लाभार्थी को लेकर सवाल उठा, जिसे सुलझाने के लिए सरकार ने कई बार इस योजना में संशोधन किया है. पीएम किसान स्कीम के पैसे भेजने की टाइमिंग भी विवादों की वजह बनी हुई है. 

सबसे अहम सवाल इसकी समीक्षा को लेकर है. 5 साल बीत जाने के बाद इस योजना की समीक्षा नहीं की है यानी सरकार यह बताने में विफल रही है कि आखिर इन सम्मान निधि से कितने किसानों की दशा सुधरी या उनकी आमदनी में कितनी बढ़ोतरी हुई?

पीएम किसान निधि योजना क्या है?
यह केंद्र सरकार की एक योजना है, जिसे उन किसानों को दिया जाता है, जिसके पास जमीन हो. कृषि वैज्ञानिक इसे इनपुट सब्सिडी कहते हैं. इसके तहत देश के करीब 8 करोड़ किसानों को प्रत्येक साल 6 हजार रुपए की राशि सहायता के रूप में दी जाती है.

सरकार के मुताबिक यह राशि फसल की लागत को कम करने के लिए दी जाती है. सरकार ने 6 हजार रुपए को 3 भागों में बांटकर किसानों को देता है. एक भाग रबी सीजन की बुआई के वक्त, तो एक भाग खरीफ बुआई के वक्त दिया जाता है. 

इसी तरह तीसरे भाग की राशि जायद फसलों के बुआई के वक्त दी जाती है. 

सम्मान निधि योजना: किसानों के लिए कितनी मददगार?

बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह योजना 5 साल में किसानों के लिए कितनी मददगार साबित हो रही है? 6000 रुपए की सम्मान राशि से किसानों की आमदनी कितनी बढ़ी और क्या सरकार के इस योजना को राहत की बजाय फ्रीबीज कहना कितना उचित है?

किसानों की आमदनी में दोगुनी बढ़ोतरी नहीं
मार्च 2023 में एनएसएसओ के हवाले से केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज जारी की थी. इस रिलीज में दावा किया गया था कि किसानों की आय में बढ़ोत्तरी हुई है. रिलीज में कहा गया था कि 2012-13 में किसानों की औसत आय करीब 6 हजार रुपए प्रतिमाह थी, जो 2018-19 में बढ़कर 10 हजार रुपए प्रतिमाह को पार कर गई.

हालांकि, यह आंकड़ा केंद्र द्वारा ही गठित अशोक दलवई कमेटी की सिफारिश से काफी कम है. दलवई कमेटी ने अपनी सिफारिश में कहा था कि 2022-23 तक किसानों की औसत आमदनी 22000 रुपए प्रतिमाह होनी चाहिए. 

कमेटी ने एनएसएसओ के ही डेटा को लेकर साल 2015-16 की आमदनी को आधार बनाया था. उस वक्त किसानों की औसत आमदनी 8,058 रुपए प्रतिमाह था. 

समिति ने सरकार से कहा था कि इस लक्ष्य को पाने के लिए किसानों की आमदनी में प्रत्येक साल 10.4 प्रतिशत के दर से बढ़ोतरी होनी चाहिए. अशोक दलवई कमेटी ने किसानों की आमदनी मापन के लिए एक ठोस मैकेनिज्म बनाने की भी पैरवी की थी. 

इनपुट सब्सिडी से लाभ कैसे, नहीं बता पाई सरकार 
खेती को लाभ का धंधा बनाने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए स्वामीनाथन कमेटी ने एक सिफारिश सरकार को सौंपी थी. इसे स्वामीनाथन रिपोर्ट भी कहा जाता है. 2014 से पहले बीजेपी ने इसे लागू करने की बात कही थी. 

स्वामीनाथन कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में फसल के मूल्यों का जिक्र किया था. उनके मुताबिक फसल की लागत का 50 प्रतिशत किसानों को मूल्य के रूप में मिलनी चाहिए. यानी अगर किसी फसल में 5000 रुपए की लागत लगती है, तो उसे 7500 रुपए में खरीदा जाए.

सरकार की तरफ से फसल खरीद की प्रक्रिया को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) कहा जाता है. किसानों की आमदनी बढ़ानी है और खेती को लाभ का धंधा बनाना है, तो सही कीमत मिलनी चाहिए. 

राष्ट्रीय किसान संगठन के प्रवक्ता परमजीत सिंह कहते हैं, ‘न तो किसान और न ही किसी कमेटी ने आमदनी बढ़ाने के लिए कभी इनपुट सब्सिडी देने की मांग की. फिर इस तरह की योजना लागू क्यों किया गया, यह समझ से परे है.’

परमजीत आगे कहते हैं- सरकार आज तक यह नहीं बता पाई है कि इस पैसे से किसानों की आमदनी कैसे बढ़ेगी? इसके शुरू होने से आमदनी को लेकर 2 स्तर पर किसानों की मुश्किलें बढ़ गई है.

1. यह स्कीम सभी जोत के किसानों के लिए है. यानी जिस किसान के पास आधा एकड़ जमीन है, उसे भी इनपुट सब्सिडी के तौर पर 6 हजार रुपए सालाना मिलेगा और जिस किसान के पास 10 एकड़ है, उसे भी इतना ही मिलेगा. आधा एकड़ वाले के लिए तो यह एक राहत है, लेकिन 10 एकड़ वाले को?

10 एकड़ का गणित अगर देखा जाए, तो प्रति एकड़ यह 600 रुपए बैठता है. 3 सीजन के हिसाब से देखा जाए, तो प्रति एकड़ 200 रुपए. यानी जिसके पास 10 एकड़ जमीन है, उसकी आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार एक सीजन में उसे प्रति एकड़ 200 रुपए का सम्मान राशि दे रही है.

परमजीत के मुताबिक केंद्र के इनपुट सब्सिडी स्कीम से तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की योजनाएं बेहतर है. तेलंगाना में रायथु बंधु योजना के तहत प्रति एकड़ किसान को 5 हजार रुपए की राशि प्रदान की जाती है.

यानी किसी व्यक्ति के पास अगर 10 एकड़ खेती की जमीन है, तो उसे इनपुट सब्सिडी के रूप में 50 हजार रुपए सालाना मिलेंगे. इस योजना में 51 एकड़ से कम खेती की जमीन वाले सभी लोगों को पात्र माना गया है. 

छत्तीसगढ़ सरकार भी इनपुट सब्सिडी को लेकर एक योजना चला रही है. इसका नाम राजीव गांधी किसान न्याय योजना है. इसमें खरीफ फसल उपजाने वाले सभी किसानों को प्रति एकड़ 9 हजार रुपए इनपुट सब्सिडी के रूप में दी जाती है.

2. किसानों की फसल को अगर लागत के 50 प्रतिशत के हिसाब से खरीदा जाता, तो इसमें लगातार बढ़ोतरी होती, लेकिन इनपुट सब्सिडी पिछले 5 सालों से जस की तस है. इनपुट सब्सिडी में सरकार ने कोई बढ़ोतरी नहीं की है. 

इसके उलट लागत लगातार बढ़ रही है. कैसे, उदाहरण से समझिए-  2018 में 45 किलो वाली यूरिया खाद की कीमत 242 रुपए (सब्सिडी पर) थी, जो अब बढ़कर 270 रुपए के करीब पहुंच गई है. 

दिसंबर 2017 में डीएपी के एक बोरी की कीमत 1050 रुपए थी, जो अब बढ़कर 1350 रुपए की हो गई है.

इसी तरह पिछले 5 सालों में डीजल के दामों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है. वो भी तब, जब सरकार ने टैक्स रेट घटाया है. दिसंबर 2018 में डीजल 63 रुपए प्रति लीटर बिक रहा था, जो अब बढ़कर 89 रुपए प्रति लीटर के पास पहुंच गया है. 

क्या चुनावी खैरात बन गई है किसान सम्मान निधि?
किसान सम्मान निधि की पहली किस्त फरवरी 2019 में आई थी. उसके 2 महीने बाद लोकसभा के चुनाव हुए थे. सर्वे एजेंसी सीएसडीएस के मुताबिक लोकसभा चुनाव में इस योजना ने गेमचेंजर की भूमिका निभाई. 

सर्वे में शामिल 0.7 प्रतिशत लोगों ने इस योजना को सबसे बेहतरीन बताया था. यह सर्वे 24235 लोगों पर किया गया था. 

केंद्र सरकार ने इसके बाद 4 ऐसे मौके पर किसान निधि के किस्त जारी किए, जब किसी न किसी राज्य में चुनाव थे. हाल ही में 5 राज्यों के चुनाव से पहले इसकी 15वीं किस्त जारी की गई है, जिस पर कांग्रेस ने सवाल उठाया था. 

किसान नेता परमजीत सिंह कहते हैं- इस योजना को पूरी तरह से पॉलिटिकल फायदा लेने के लिए बनाया गया है. सरकार न तो समीक्षा कर बता रही है कि कितने किसानों को इसका फायदा हुआ और न ही यह बता रही है कि इससे आमदनी कैसे बढ़ेगी?

परमजीत आगे कहते हैं- इनपुट सब्सिडी की अवधारणा फसल उपजाने से है. मान लीजिए किसान सरकार से मिलने वाले पैसे से फसल उपजा भी ले, तो उसकी फसल कौन खरीदेगा? बिहार जैसे राज्यों में तो मंडी व्यवस्था ही नहीं है. कई राज्यों में सरकार की ओर से धान और गेंहू छोड़कर अन्य फसल खरीदी ही नहीं जाती है.

हालांकि, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी सम्मान निधि को किसानों के हित में बताते हैं. एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए चौधरी कहते हैं- पहली बार इतिहास में भारत सरकार ने किसानों को इनपुट सब्सिडी देना शुरू किया. 

चौधरी के मुताबिक यह डीबीटी स्कीम है और पैसा सीधे किसानों के खाते में जाता है. जब पैसा किसानों के खाते में जाता है, तो वो आसानी से बीज-खाद खरीद सकता है. इसे किसानों के सबल के रूप में आप देखिए.

चौधरी आगे कहते हैं- इसकी समीक्षा भी होगी और वक्त आने पर इसको लेकर कई फैसले भी लिए जाएंगे, लेकिन फिलहाल यह योजना किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है. 

चुनाव के वक्त पैसा जारी होने के सवाल पर कैलाश चौधरी कहते हैं, ‘इसमें कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ, तो विपक्ष के लोग इसके टाइमिंग पर सवाल उठा रहे हैं. उन्हें उठाने दीजिए. हमारा काम किसानों का हित सोचना है.’

हाल ही में मीडिया के कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि मोदी सरकार लोकसभा चुनाव से पहले इस योजना की राशि में 2 हजार सालाना की बढ़ोतरी कर सकती है. यानी किसान सम्मान निधि में इनपुट सब्सिडी के तौर पर सरकार किसानों को 8 हजार रुपए सालाना देने पर विचार कर रही है.