केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से शनिवार (25 जुलाई 2026) को इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने कथित तौर पर NEET पेपर लीक विवाद और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान दो बार अपना पद छोड़ने की पेशकश की थी. हालांकि, सरकारी नेतृत्व ने दोनों बार उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया और उनसे शिक्षा व्यवस्था में सुधारों पर काम जारी रखने को कहा. यह जानकारी सरकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई है.
20 जुलाई को वरिष्ठ मंत्रियों की एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी. दावा किया जा रहा है कि इस बैठक में धर्मेंद्र प्रधान ने एक बार फिर इस्तीफा देने की पेशकश की थी. लेकिन सरकार ने उनका प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया. नेतृत्व का मानना था कि सिर्फ इस्तीफा देना किसी समस्या का समाधान नहीं है. सरकार का विचार था कि किसी मंत्री का इस्तीफा देना सबसे आसान रास्ता हो सकता है, लेकिन असली जरूरत व्यवस्था में मौजूद कमियों को दूर करने और सुधार लागू करने की है. हालांकि इस पर आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है.
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कॉकरोच जनता पार्टी से बातचीत
हालांकि बाद में स्थिति बदल गई. सूत्रों के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के साथ दूसरे दौर की बातचीत के बाद सरकार ने हालात का दोबारा आकलन किया. बताया गया कि संगठन ने 20 जुलाई के चलो संसद मार्च की तरह एक और बड़े आंदोलन की चेतावनी दी थी. 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में कई छात्र घायल हुए थे, जिससे सरकार पहले से ही चिंतित थी. सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने भी सरकार को रिपोर्ट दी थी. इनमें आशंका जताई गई थी कि कुछ देश विरोधी तत्व इस आंदोलन और अशांति का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं.
सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान की गई
रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल निगरानी के दौरान 400 से अधिक सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान की गई. इनमें लगभग 100 इंस्टाग्राम अकाउंट ऐसे बताए गए जो कथित तौर पर पाकिस्तान से संचालित हो रहे थे और भारत में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों को बढ़ावा देने या उनसे जुड़ी सामग्री साझा कर रहे थे. शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि इनमें से कुछ अकाउंट पहले भी विभिन्न संवेदनशील मुद्दों के दौरान सक्रिय रहे थे. सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस के फेसियल रिकग्निशन सिस्टम ने 20 जुलाई से 24 जुलाई के बीच जंतर-मंतर और उसके आसपास मौजूद करीब 400 ऐसे लोगों की पहचान की थी, जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है. बताया गया कि इनमें से कुछ लोग 20 जुलाई को हुई तोड़फोड़ की घटनाओं से भी जुड़े होने के संदेह में थे.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया
इन सभी घटनाक्रमों और सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद सरकार ने स्थिति का पुनर्मूल्यांकन किया. सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और तनाव कम करना जरूरी है. इसी बीच धर्मेंद्र प्रधान ने एक बार फिर इस्तीफा देने का फैसला किया. बाद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया. इसके कुछ ही घंटों बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया.
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