मैसूर में बीजेपी पर बरसे सिद्धारमैया, बोले- ‘संविधान के खिलाफ भाजपा, सिर्फ तानाशाही पर रखती है भरोसा’

मैसूर में बीजेपी पर बरसे सिद्धारमैया, बोले- ‘संविधान के खिलाफ भाजपा, सिर्फ तानाशाही पर रखती है भरोसा’


कर्नाटक के मैसूर  में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया हमलावर नजर आए. उन्होंने बीजेपी पर जमकर भड़ास निकाली. ये भाषण इसलिए मायने रखता है क्योंकि उनकी पार्टी उन्हें केंद्र में उनकी भूमिका को लेकर नई संभावनाओं को तलाश रही है. 

सिद्धारमैया ने मैसूर में एक जनसभा को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि बीजेपी संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ है. वे सिर्फ तानाशाही में यकीन रखते हैं. उनकी नीति एक देश और एक चुनाव है. 

पूर्व कर्नाटक सीएम ने आगे कहा कि क्या हिंदुत्व की बात करने वालों ने जाति और वर्ण के नाम पर लोगों का शोषण नहीं किया है? शूद्र समुदाय को बीजेपी का साथ नहीं देना चाहिए. वे समझते हैं कि सामाजिक न्याय नहीं आना चाहिए, और अगर यह आता है, तो शोषण की कोई गुंजाइश नहीं रहती.

उन्होंने कहा कि बीजेपी झूठ गढ़ती और बेचती है और उन्हें सच बना देती है. 13 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट में बदलाव किया गया है. हरियाणा, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में इसका क्या नतीजा निकला? केरल में उनका दांव नहीं चला. बीजेपी राज्य में दो बार ‘ऑपरेशन लोटस’ के जरिए सत्ता में आई.

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हिंदुओं का दमन किसने किया: सिद्धारमैया

बीजेपी को लेकर कहा कि अब वे हिंदुत्व की बात करते हैं. आज हिंदुओं का दमन किसने किया? जातिगत विभाजन और वर्ण व्यवस्था किसने बनाई? सैकड़ों सालों तक शूद्रों को शिक्षा से किसने वंचित रखा? आपको यह समझना होगा. इसलिए बाबा साहब ने कहा था कि जो लोग इतिहास नहीं जानते, वे कभी इतिहास नहीं बना सकते. 

उन्होंने कहा कि आपको इतिहास जानना चाहिए. हर व्यक्ति, हर भारतीय को हमारा सामाजिक इतिहास जानना चाहिए. जब हम इसे समझेंगे, तभी हम इसे सुधार सकते हैं. एक नया इतिहास लिख सकते हैं. उन्होंने वंचित समुदाय से बीजेपी का समर्थन न करने की अपील की है. साथ ही बीजेपी को समाजिक न्याय का विरोधी करार दिया. 

शूत्र बीजेपी के प्रलोभनों का हो रहे शिकार

सिद्धारमैया ने कहा कि आज शूद्र बीजेपी के प्रलोभनों का शिकार हो रहे हैं. किसी भी हाल में शूद्रों को बीजेपी के साथ नहीं जाना चाहिए. वे शूद्रों के विरोधी हैं क्योंकि अगर इस देश में सामाजिक न्याय स्थापित होता है. अगर सभी को समान अवसर मिलते हैं, तो वे लोगों का शोषण कैसे कर पाएंगे?

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