Success Story: कौन कहता है आसमां में छेद नहीं हो सकता, एक पत्थर तो जरा तबीयत से उछालों यारों.. ये कहावत इस सूरज यादव की कहानी पर बिल्कुल फिट बैठती है। एक फूड डिलिवरी बॉय से डिप्टी कलेक्टर के पद तक पहुंचने वाली कहानी फिल्मी ही लगती है।

लेकिन सच हुआ है और लोगों का मानना है कि अगर लगन से कोई काम किया जाए तो इंसान को कामयाबी जरूर मिलती है। सूरज यादव की कहानी जिसने भी सुनी वो हैरान रह गए। गरीबी और मेहनत की ये कहानी लोगों को प्रेरणा देने के लिए है और पैसों का बहाना बनाकर पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चे भी काफी कुछ सीखेंगे।
कभी स्विगी डिलीवरी बॉय तो कभी रैपिडो राइडर…
झारखंड के रहने वाले सूरज यादव ने अपने लाइफ में काफी समस्याओं का सामना किया था। उनके पास पढ़ने के लिए पैसे नहीं थे तो वो खुद काम पर निकल गए। सूरज ने स्विगी डिलीवरी बॉय का काम किया और रैपिडो राइडर भी बने। इसी साथ साथ लगातार मेहनत करते रहे और एक दिन झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) की परीक्षा पास करके लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
इस वक्त सूरज झारखंड के गिरिडीह में डिप्टी कलेक्टर के पद तैनात है और लोगों को ये कहानी काफी हैरान करने वाली लग रही है। बता दें कि सूरज के पास उस वक्त बाइक नहीं थी तो दोस्तों ने मदद की और अपने स्कॉलरशिप के पैसे दिए जिससे सेकंड हैंड बाइक आई थी। लेकिन अब वो किसी पहचान के मोहताज नहीं है और लोग उनसे मिलने लिए तरसते हैं।
कमेंट्स कर रहे हैं लोग
इस खबर पर लोगों के ढेरों रिएक्शन्स आ रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, ”आगे बढ़ते रहें…… बधाई हो। एक ने लिखा, जानकर खुशी हुई।” एक ने लिखा, ”मुबारक हो भाई।” एक ने लिखा, ”आपको बहुत बहुत बधाई।” इस तरह से लोगों के कमेंट्स आ रहे हैं। हालांकि सूरज ने किसी कोई जवाब नहीं दिया है।



