Education News: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि वह मिडिल ईस्ट के उन प्राइवेट स्टूडेंट को राहत देने के लिए एक नीति लाने पर विचार कर रही है. इनके रिजल्ट मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध की स्थितियों के बीच सीबीएसई ने जारी नहीं किए हैं. प्राइवेट स्टूडेंट वह होते हैं, जो नियमित स्कूल के माध्यम से नहीं बल्कि सीधे एजुकेशन बोर्ड में रजिस्ट्रेशन कराकर एग्जम देते हैं.
जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की अवकाशकालीन पीठ को केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार इस संबंध में जल्द ही निर्णय लेने पर विचार कर रही है. मेहता ने कहा कि यह एक व्यापक मुद्दा है. सरकार इसी तरह की स्थिति वाले विद्यार्थियों के लिए एक नीति तैयार करने पर विचार कर रही है. इसके बाद पीठ ने मामले की सुनवाई 22 जून तक स्थगित कर दी. यह याचिका सऊदी अरब में रहने वाले प्रवासी छात्र प्रांशु जिगरकुमार पटेल ने दायर की है. पटेल ने सीबीएसईको उसके 12वीं कक्षा के एग्जाम रिजल्ट में सुधार के बाद घोषणा करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है.
याचिका में CBSE की तरफ से रिजल्ट घोषित न किए जाने को चुनौती दी गई
याचिका में सीबीएसई द्वारा परिणाम घोषित न किए जाने को चुनौती दी गई है. जबकि खाड़ी देशों में सुरक्षा स्थिति के कारण परीक्षाएं रद्द होने पर छात्रों के लिए एक विशेष मूल्यांकन योजना बनाई गई थी. सीबीएसई ने 13 मई को 12वीं कक्षा का परिणाम घोषित किया था लेकिन याचिका के अनुसार पटेल का परिणाम घोषित नहीं किया गया. उनकी स्थिति आरएल (बाद में परिणाम) दिखाई गई.
पटेल का कहना है कि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि सुधार परीक्षा में शामिल होने वाले निजी अभ्यर्थी भी इस मूल्यांकन योजना के दायरे में आते हैं या नहीं. याचिका में कहा गया है कि पश्चिम एशियाई देशों में परीक्षाएं रद्द होने से प्रभावित निजी अभ्यर्थियों को भी सीबीएसई की विशेष मूल्यांकन योजना का लाभ मिलना चाहिए. इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था.
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