सालों तक बंद थे फोन, हमले के दिन हुए एक्टिव, पहलगाम टेरर अटैक की जांच में पाकिस्तान फिर बेनकाब

सालों तक बंद थे फोन, हमले के दिन हुए एक्टिव, पहलगाम टेरर अटैक की जांच में पाकिस्तान फिर बेनकाब


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  • लश्कर-ए-तैयबा के संगठन ने हमले की ली थी जिम्मेदारी।

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में पिछले साल 22 अप्रैल, 2025 को हुए आतंकवादी हमले में सोमवार (1 जून, 2026) को एक नया और बड़ा खुलासा हुआ है. आतंकवादी हमले की जांच में एक बार फिर से आतंकवादियों को शरण देने वाले पाकिस्तान का नापाक चेहरा उजागर हो गया है. दरअसल, पहलगाम आतंकवादी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और जम्मू-कश्मीर पुलिस की टीम ने हमले के दौरान इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोनों का कनेक्शन पाकिस्तान के साथ पाया है.

आतंकियों के एनकाउंटर के बाद बरामद हुए थे दोनों मोबाइल

जानकारी के मुताबिक, जांच में सबसे बड़ी बात यह सामने आई है कि ये मोबाइल फोन साल 2021 और 2023 में खरीदे गए थे, लेकिन फोन की खरीदारी के कई सालों बाद ये बिल्कुल ही बंद पड़े रखे गए थे और इन मोबाइल फोन्स को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले के दौरान पहली बार एक्टिव किया गया था और बाद में आतंकवादियों के एनकाउंटर के बाद बरामद किया गया था.

कराची और लौहार स्थित कंपनियों ने मंगवाया था मोबाइल 

एनआईए की जांच में पता चला है कि जनवरी, 2021 में पाकिस्तान के कराची स्थित टेक सिरत प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने रेडमी 9टी फोन की पूरी खेप मंगवाई थी. यह कंपनी कराची के क्लिफ्टन रोड पर स्थित है और इस शिपमेंट की पेमेंट भी पाकिस्तान की फैसल बैंक ने की थी. शिपमेंट के दस्तावेजों में लॉजिस्टिक्स कंपनी के रूप में फैसल बैंक का नाम दर्ज था और साथ ही डिलीवरी का पता भी कराची के शाहरा-ए-फैसल स्थित फैसल बैंक की मुख्य शाखा था. वहीं, दूसरा फोन साल 2023 में लाहौर की एयर लिंक कम्युनिकेशन कंपनी ने खरीदा था और दोनों मोबाइल का पहलगाम आतंकवादी हमले के समय एक्टिव किया गया था.

पहलगाम हमले में मारे गए थे 26 लोग

उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में यह आतंकवादी हमला पिछले साल 22 अप्रैल, 2025 को हुआ था. इस हमले में पाकिस्तानी आतंकवादियों ने 26 लोगों का धर्म पूछकर, उनसे कलमा पढ़वाकर उनके हिंदू होने की पहचान की और उसके बाद गोली मारकर उनकी बेरहमी से हत्या कर दी थी. पहलगाम में हुए इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान में स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के द रेजिस्टेंस फ्रंट ने ली थी. 

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