operation sindoor IANS matrize Survey PM Modi and Indira Gandhi Who has ability to take strong decisions

operation sindoor IANS matrize Survey PM Modi and Indira Gandhi Who has ability to take strong decisions


Operation Sindoor Survey: ऑपरेशन सिंदूर की सफलता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को और मजबूत किया है. पाकिस्तान के खिलाफ सख्त एक्शन लेने के बाद पीएम मोदी और पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की निर्णायक नेतृत्व शैली और सशक्त फैसले लेने की क्षमता को लेकर तुलना भी हो रही है. प्रधानमंत्री मोदी और पूर्व पीएम इंदिरा गांधी में से कौन सा नेता अधिक सशक्त फैसले लेने में सक्षम रहा है, इस पर आईएएनएस मैटराइज सर्वे में नतीजे सामने आए हैं.

सर्वे में लोगों ने किसे बताया सशक्त नेता?

आईएएनएस मैटराइज सर्वेक्षण में 42 फीसदी लोगों ने पीएम मोदी को अधिक सशक्त फैसले लेने वाला नेता माना है, जबकि 29 फीसदी ने इंदिरा गांधी के पक्ष में राय दी है. आईएएनएस मैटराइज के सर्वे में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर लोगों से सवाल किया गया. उन्होंने पूछा कि आपके अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और पूर्व पीएम इंदिरा गांधी में से कौन सा नेता अधिक सशक्त फैसले लेने में सक्षम रहा है?

इस सवाल के जवाब में 42 फीसदी लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अधिक सशक्त फैसले लेने वाला नेता माना, जबकि 29 फीसदी ने इंदिरा गांधी के पक्ष में राय दी. इसके अलावा 17 फीसदी लोगों का मानना है कि दोनों ही नेता अपनी-अपनी परिस्थितियों में सशक्त फैसले लेने में समान रूप से सक्षम रहे. वहीं 5 फीसदी लोगों को लगता है कि दोनों में से कोई भी इस मामले में प्रभावी नहीं रहा और 7 फीसदी लोग इस सवाल पर अनिश्चित दिखे.

पाकिस्तान पर हमला के बाद लोगों ने क्या कहा?

22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद पीएम मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना की ओर से ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया था. इस ऑपरेशन के अंतर्गत पाकिस्तान और पीओके में 9 आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की गई थी. इसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकियों के ठिकानों को पूरी तरह तबाह किया गया और 100 से अधिक आतंकी भारतीय सेना की इस कार्रवाई में ढेर हो गए थे.

आईएएनएस मैटराइज सर्वे में एक अन्य सवाल यह भी किया गया कि भारत के लिए पाकिस्तान जैसे न्यूक्लियर सशक्त देश के अंदर घुसकर हमला करना सदी की बड़ी उपलब्धि रही है? इस सर्वेक्षण में 72 फीसदी लोगों ने इसे सदी की बड़ी उपलब्धि करार देते हुए भारत की सैन्य और रणनीतिक क्षमता की सराहना की. वहीं, 9 फीसदी लोगों का मानना है कि यह उपलब्धि कुछ हद तक उल्लेखनीय है, जबकि 12 फीसदी ने इसे बड़ी उपलब्धि मानने से इनकार किया. इसके अलावा, 7 फीसदी लोग इस मुद्दे पर अनिश्चित रहे.