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Explained: धर्मेंद्र प्रधान को क्यों नहीं गंवा सकती मोदी सरकार? जबकि एक इस्तीफे पर थम जाएगा CJP आंदोलन

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भारत में परीक्षा लीक का मुद्दा अब एक सियासी रस्साकशी में बदल चुका है और इस रस्साकशी के केंद्र में हैं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान. नीट-यूजी विवाद के बाद से विपक्ष और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) लगातार उनके इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं. लेकिन मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि वह इस मांग को मानने वाली नहीं है. यह जिद्द सिर्फ एक व्यक्ति को बचाने की नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ी राजनीतिक, प्रशासनिक और कानूनी मजबूरियां हैं, जो सरकार को पीछे हटने से रोक रही हैं. आइए समझते हैं कि आखिर वो कौन सी मुश्किलें हैं, जिनकी वजह से सरकार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर झुक नहीं सकती है…

मोदी सरकार के न झुकने की 7 बड़ी वजहें हैं…

1. ‘व्यक्ति नहीं, व्यवस्था’ का सरकारी रुख

सरकार शुरू से यह कहती आ रही है कि पेपर लीक एक व्यवस्थागत चुनौती है, किसी एक व्यक्ति की गलती नहीं. अगर मोदी सरकार अभी सिर्फ विपक्ष के दबाव में आकर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लेती है, तो यह अप्रत्यक्ष रूप से इस बात का सबूत हो जाएगा कि सरकार की नीतियां विफल रहीं और मंत्री पर लगे आरोप सही हैं. यह राजनीतिक रूप से सरकार के लिए बहुत बड़ी रियायत होगी और विपक्ष को अगले किसी भी संकट में इसी तरह की मांग उठाने की नैतिक ताकत दे देगी.

2. राजनीतिक समीकरण और चुनावी संदेश

धर्मेंद्र प्रधान बीजेपी के सबसे प्रभावशाली ओबीसी चेहरों में से एक हैं और ओडिशा जैसे महत्वपूर्ण पूर्वी राज्य में पार्टी की जीत के प्रमुख शिल्पी रहे हैं. प्रधान को पद से हटाने का सीधा संदेश पार्टी के बड़े जनाधार वाले वर्ग तक जाएगा, जिससे समर्थकों में गलत संकेत जा सकता है. लोकसभा चुनाव के बाद जिस तरह बीजेपी को बहुमत के लिए सहयोगियों पर निर्भर रहना पड़ा. ऐसे में किसी कद्दावर मंत्री को बलि का बकरा बनाना पार्टी और सरकार की आंतरिक एकजुटता और मनोबल को कमजोर कर सकता है.

3. प्रशासनिक स्तर पर ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ और नए कानून की विश्वसनीयता पर संकट

PM मोदी ने खुद इस मामले पर कहा था, ‘दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा’ और फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का ऐलान किया. सरकार ने जून 2024 में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम’ भी लागू किया, जिसमें पेपर लीक करने वालों के लिए 10 साल तक की सजा और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.

अगर इस पूरे ढांचे को लागू करने के बाद भी सरकार अपने ही शिक्षा मंत्री को जिम्मेदारी से मुक्त कर देती है या उन्हें इस्तीफा देना पड़ता है, तो यह इन कानूनी और संस्थागत सुधारों की नाकामी का प्रमाण माना जाएगा. सरकार के लिए यह बहुत जरूरी है कि वह यह दिखाए कि उसकी नीतियां ही असली समाधान हैं, न कि किसी व्यक्ति को हटाना.

4. विपक्षी एकता का मनोवैज्ञानिक दबाव

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, विपक्ष लंबे समय बाद किसी मुद्दे पर पूरी तरह एकजुट दिख रहा है. कांग्रेस, TMC, आम आदमी पार्टी, सपा और क्षेत्रीय दलों ने संसद के भीतर और बाहर एक सुर में इस्तीफे की मांग को उठाया है. CJP जैसी संस्थाएं भी कोर्ट में सक्रिय हैं. अगर सरकार इस दबाव में आकर एक बार झुकी, तो आने वाले सत्रों में विपक्ष हर मुद्दे पर मंत्री के इस्तीफे की मांग को अपना पहला और सबसे बड़ा हथियार बना लेगा. इससे सरकार की निर्णय लेने की क्षमता पर स्थायी रूप से असर पड़ सकता है.

5. संसदीय कार्यवाही और बहस का रास्ता रोकना

सरकार चाहती थी कि नीट विवाद पर संसद में रूल 193 के तहत अल्पकालिक चर्चा हो, जहां कोई मतदान या स्थगन प्रस्ताव नहीं होता. लेकिन विपक्ष रूल 60 के तहत स्थगन प्रस्ताव और राज्यसभा में रूल 267 के जरिए पूरे सदन का कामकाज रोककर तत्काल बहस की मांग कर रहा था. विपक्ष का पूरा जोर इस बात पर था कि सरकार को कठघरे में लाया जाए और शिक्षा मंत्री को सीधे जवाब देना पड़े.

सरकार ने यह मोर्चा भी नहीं छोड़ा. स्पीकर और सभापति के नियमों का हवाला देकर इसे टेक्निकल उलझनों उलझाए रखा. अगर इस तरह के सियासी दबाव के बाद भी सरकार इस्तीफे की मांग मान लेती, तो यह संसद में अपने पक्ष को मजबूती से रखने में विफलता का संकेत होता.

6. कोई सीधी कानूनी जिम्मेदारी न होना

CBI या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाली कमेटी की किसी भी जांच में सीधे तौर पर धर्मेंद्र प्रधान की किसी लापरवाही या संलिप्तता की पुष्टि नहीं की है. पेपर लीक एक आपराधिक साजिश है, जिसमें स्थानीय स्तर पर दलालों, प्राइवेट इंस्टीट्यूट्स और कुछ अधिकारियों की भूमिका सामने आती है. ऐसे में बिना किसी कानूनी आधार के किसी कैबिनेट मंत्री को हटाना सरकार के अपने प्रशासनिक सिद्धांतों के खिलाफ होगा और अन्य मंत्रियों में हलचल पैदा करेगा. इससे यह गलत परंपरा बन सकती है कि सड़क या संसद में हंगामा होते ही मंत्री को बदल दिया जाए.

7. जनभावना और कोर्ट का संतुलित रुख

सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी मामले में परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया था और पेपर लीक को बड़े पैमाने पर फैला हुआ नहीं माना था. हालांकि उसने सिस्टम में सुधार की जरूरत बताई थी. एग्जाम देने वाले छात्रों समेत जनता का एक बड़ा तबका पूरी परीक्षा को रद्द करने या अन्य बड़े फैसलों के पक्ष में नहीं था. ऐसे में कोर्ट के संतुलित रुख के बाद सिर्फ राजनीतिक विरोध के चलते मंत्री को हटाना सरकार के लिए तर्कसंगत नहीं दिखता. यह उसे अपने वोट बैंक में कमजोर भी कर सकता है.

कुल मिलाकर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे विपक्ष और CJP के सामने मोदी सरकार की मजबूरी सिर्फ एक मंत्री को बचाने की नहीं, बल्कि अपनी पूरी राजनीतिक रणनीति, संस्थागत सुधारों की साख और प्रशासनिक अधिकार को बचाने की है. यही वजह है कि सरकार इस मामले में पीछे हटने को तैयार नहीं है और इस टकराव के आने वाले दिनों में और तेज होने के पूरे आसार हैं.

Kareena Kapoor reaction on CJP students protest our children are watching us closely

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Kareena Kapoor On CJP Students Protest: स्टूडेंट प्रोटेस्ट को बॉलीवुड का खुला सपोर्ट मिल रहा है। तमाम सेलेब्स के बाद अब करीना कपूर खान ने भी स्टूडेंट्स के स्ट्रगल और उनकी मांगों को वाजिब करार दिया है। इसके लिए करीना कपूर खान ने इंस्टाग्राम पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा है जो कि काफी तेजी से वायरल हो गया है।

Kareena Kapoor

करीना कपूर खान का लंबा चौड़ा पोस्ट

करीना कपूर खान ने लिखा, “मैंने पिछले कुछ दिनों तक इस पर शांत रहकर विचार किया। लेकिन अब और चुप नहीं रह सकती। इतने सारे युवाओं की आवाज़ें, जो सिर्फ़ सुनी जाना चाहती हैं, अब नज़रअंदाज़ नहीं की जा सकतीं, और न ही की जानी चाहिए।”

करीना ने बताया शिक्षा का क्या महत्व

करीना ने आगे लिखा,”हम सभी जानते हैं कि एक बच्चे के जीवन में शिक्षा का क्या महत्व होता है। शिक्षा उसे आत्मविश्वास देती है। उसे उम्मीद देती है। परिवारों को यह विश्वास दिलाती है कि आने वाला कल आज से बेहतर हो सकता है। लेकिन शिक्षा तभी सार्थक है, जब बच्चों का उस पर विश्वास बना रहे। और यह विश्वास उसी क्षण टूटने लगता है, जब उन्हें यह महसूस होने लगे कि ईमानदारी, कड़ी मेहनत और योग्यता का वास्तव में कोई मूल्य नहीं है।”

सिस्टम पर की करीना ने टिप्पणी

सिस्टम पर टिप्पणी करते हुए करीना ने लिखा, “किसी भी बच्चे को यह सोचने पर मजबूर नहीं होना चाहिए कि क्या उसकी मेहनत पर्याप्त होगी। हर बच्चे को ऐसा सिस्टम मिलने का अधिकार है, जिस पर वह भरोसा कर सके, जहां योग्यता ही पहचान बने, मेहनत का उचित सम्मान हो और हर बच्चे को समान अवसर के साथ शुरुआत करने का मौका मिले।”

बात सुनना कोई एहसान नहीं हमारी जिम्मेदारी

करीना ने आगे लिखा, “यह कोई बहुत बड़ी मांग नहीं है। यह तो किसी भी न्यायपूर्ण व्यवस्था की सबसे बुनियादी अपेक्षा है। जब एक पूरी पीढ़ी अपने भविष्य को लेकर एक स्वर में अपनी बात कह रही हो, तो उनकी बात सुनना कोई एहसान नहीं है। यह हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी है।”

वो ही हमारा कल हैं

करीना ने मुद्दे की गंभीरता भांपते हुए लिखा, “हमारे बच्चे हमें उतनी ही गंभीरता से देख रहे हैं, जितनी गंभीरता से हम उन्हें देखते हैं। आज-अभी, इसी क्षण, हम जो निर्णय लेंगे, वही उन्हें बताएगा कि निष्पक्षता और विश्वास वास्तव में हमारे मूल्य हैं, या फिर केवल ऐसे शब्द हैं जिन्हें बड़े लोग बोलते हैं। वो सिर्फ़ अपने कल की तैयारी नहीं कर रहे। वो ही हमारा कल हैं।”

स्टूडेंट्स के सपोर्ट में बॉलीवुड

जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस प्रोटेस्ट पर अभी तक सलमान खान, अनुपम खेर, शबाना आजमी, हुमा कुरैशी, प्राकश राज, कमल हासन से लेकर नसीरुद्दीन शाह और आलिया भट्ट तक तमाम सेलेब्स रिएक्ट करते हुए स्टूडेंट्स को सपोर्ट कर चुके है। हालांकि अभी भी लोगों को कई ए लिस्टर सेलिब्रिटी के रिएक्शन का काफी बेसब्री से इंतजार हो रहा है।

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College lists, tours, essays and more: Here’s a look back at our best admissions advice.

CJP से बात करने जंतर-मंतर जाएंगे मंत्री? मानी शर्त, मोदी सरकार बोली- आइए बैठकर करें बात

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नीट पेपर लीक के मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक राजनीति गरमाई हुई है. जंतर-मंतर पर सीजेपी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़ी हुई है. इस बीच केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि छात्र जहां चाहएंगे सरकार वहां बातचीत के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि बातचीत से ही समस्या का समाधान होगा.

सरकार छात्रों से बातचीत को तैयार: जितेंद्र सिंह

जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘सरकार की तरफ से आंदोलन कर रहे छात्रों से एक अपील करना चाह रहा हूं. सरकार की ओर से हम चर्चा के लिए हर समय तैयार हैं. सरकार के दरवाजे खुले हैं. हम छात्रों को कहना चाहते हैं कि आप कभी भी चर्चा करना चाहें आपकी सुविधानुसार हम चर्चा के लिए तैयार हैं. आंदोलन के अलावा दूसरे विषय को लेकर भी सरकार चर्चा के लिए तैयार रहेगी.’

उन्होंने कहा, ‘छात्र चर्चा के लिए जितना समय मांगेंगे हम देने के लिए तैयार हैं. चर्चा में देश के स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और उनके साथ में भी रहूंगा. धीरे-धीरे हम चर्चा करके समाधान की तरफ बढ़ सकते हैं और समाधान से ही नया रास्ता भी निर्धारित हो सकता है. जहां भी आप कहें… चाहे आप जेपी नड्डा के आवास पर कहें या आप कहें ऑफिस में तो वहां चर्चा हो सकती है. हमारे लिए ये प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है. छात्रों और उनके प्रतिनिधियों से बातचीत करने के लिए सरकार की तरफ से चार बार प्रस्ताव जा चुका है. ‘

आइए बैठिए चर्चा कीजिए: जितेंद्र सिंह 

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘पीएम मोदी इस मामले को लेकर खुद संवदेनशील हैं. उन्होंने सुबह अपने कथन में कहा कि सर्वाधिक प्राथमिकता वह युवाओं के हितों को देते हैं. इसी से प्रेरित होकर उन्होंने ये निर्णय लिया कि जितने पर पेपरलीक के दोषी पाए जाएंगे उन्हें फास्ट ट्रैक के माध्यम से सजा दी जाएगी ताकि जल्दी निर्णय हो. मैं एक बार फिर बड़ी विनम्रता से आपसे अपील करता हूं कि आइए बैठिए चर्चा कीजिए और इस मुद्दे पर इमानदारी से एक रास्ता खोजें.’

सीजेपी चाहती है जंतर-मंतर आए सरकार

इससे पहले कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) ने स्पष्ट किया था कि हमने सरकार के सामने अपना मांगें रख दी है. अगर उन्हें अब बात करनी है तो उन्हें खुद जंतर-मंतर आना होगा. सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री के आवास पर बातचीत करने से इनकार कर दिया. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, ‘सीजेपी प्रदर्शनकारियों के साथ सरकार हर वक्त बातचीत को तैयार है, लेकिन बातचीत हमारे आवास पर या मंत्रालय में हो सकती है. बाकी कहीं बातचीत का औचित्य नहीं बनता है. कल से अब तक चार बार बातचीत का न्योता दिया गया है, लेकिन उनकी तरफ से जवाब नहीं आया.’

Salman Khan appeals students to end the protest and go back home soman wangchuk to end hunger strike Pm Modi will see

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Salman Khan Appeals Students To Go Back Home: सुपरस्टार सलमान खान ने कल ही स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट को सपोर्ट करते हुए उसे सही ठहराया था ही उनपर हुई हिंसा की आलोचना भी की थी। वहीं इस पोस्ट के 24 घंटे बाद सलमान खान ने इस प्रोटेस्ट को लेकर एक और पोस्ट करते हुए अब पीएम नरेंद्र मोदी पर भरोसा जताया है और सभी छात्रों से इस प्रोटेस्ट को खत्म कर घर वापसी की अपील की है।

Salman Khan

सलमान खान ने ट्वीट कर लिखा, ‘पढ़ाई और सुरक्षा, दोनों ही मामलों में छात्र हमारी पहली प्राथमिकता हैं इसलिए उन्हें और उनके माता-पिता को चिंता करने की जरूरत नहीं है। माननीय प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया है और मुझे यकीन है कि वे इस पेपर लीक के लिए सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे। इसलिए छात्रों, प्लीज अपने माता-पिता के पास अपने घर लौट जाइए।’

वहीं अपने ट्वीट में सलमान ने आगे लिखा, ‘और सोनम, बस हो गया। इसे और आगे मत खींचो। अगर जरूरत पड़ी तो इस जज्बे को किसी और दिन के लिए बचाकर रखना (हालांकि मुझे नहीं लगता कि जरूरत पड़ेगी) और कुछ खा-पी लो। अगर चाहो तो मैं घर से खाना भेज दूंगा।’

सलमान खान का ये एक्स पोस्ट पीएम मोदी के एक्स पोस्ट के बाद में आया है। पीएम मोदी ने आज इस प्रोटेस्ट पर रिएक्शन देते हुए एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए, केस के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा। इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं कि संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए, सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों की श्रृंखला में ये एक महत्वपूर्ण कदम है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।”

इससे पहले कल रात सलमान खान ने जो पोस्ट किया था उसमें लिखा था, “यह एक बहुत ही शांतिपूर्ण आंदोलन था, बहुत दुख की बात है कि इसने हिंसक रूप ले लिया, जो छात्र और उनके परिवार घायल हुए, उनके प्रति मेरी पूरी संवेदना है। पेपर लीक एक बहुत गंभीर मुद्दा है। मुझे यह देखकर खुशी है कि हमारे देश के बच्चे बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए एकजुट हुए हैं और उनके माता-पिता ने भी उनका साथ दिया है। मैं उनके इस कदम की सच में सराहना करता हूं। उन्होंने लगन, ईमानदारी और कड़ी मेहनत करके अपना भविष्य बनाने और एक बेहतर, शिक्षित भारत के निर्माण के प्रति अपना उत्साह दिखाया है। यह आंदोलन या विरोध प्रदर्शन ही सही तरीका है और छात्रों ने इसे शांतिपूर्ण ढंग से किया है। वे बहुत साहसी और बहादुर हैं। शिक्षा के प्रति प्रेरित और उत्साहित यह पीढ़ी भारत का नाम रोशन करेगी। यह मुद्दा छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के बीच का है। इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। इसका श्रेय केवल हमारे देश के छात्रों को ही मिलना चाहिए।”

साथ ही सलमान खान पहले भी सरकार पर यकीन जताते हुए सलमान खान ने लिखा, “मुझे यकीन है कि सरकार भी उन्हें पूरा समर्थन देगी और शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाएगी। यह सभी के लिए फायदेमंद स्थिति है। एक सकारात्मक फैसले की उम्मीद और प्रार्थना है। जो लोग शिक्षित होना चाहते हैं, उन सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। शिक्षा ही अगला ट्रेंड और फैशन होना चाहिए और इसे हर साल और अधिक लोकप्रिय व आकर्षक बनना चाहिए, ताकि दूसरे देशों से लोग पढ़ने के लिए भारत आएं और भारत एक एजुकेशन हब बन जाए।”

वर्कफ्रंट की बात करें तो सलमान की फिल्म ‘मातृभूमि’ इस साल रिलीज होनी है। इसके लिए उन्होंने काफी मेहनत की है। फिल्म में वो आर्मी ऑफिसर के रोल में नजर आएंगे। इसके साथ ही वो साउथ की भी एक फिल्म कर रहे हैं। इसमें उनके अपोजिट नयनतारा नजर आएंगी।



An Enhanced Trade School Experience

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University of Mount Saint Vincent President Susan R. Burns discusses a new partnership that allows students to complete trade certifications in addition to an associate degree.

क्यों हुआ पेपर लीक और क्यों चली लाठी? प्रियंका गांधी ने मांगा शिक्षा मंत्री-गृह मंत्री और PM से जवाब

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CJP Protest: नीट पेपर लीक और छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि नीट परीक्षा में पेपर लीक और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जवाब देना चाहिए.

प्रियंका का सरकार पर हमला

प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया कि अब तक इन दोनों मंत्रियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई. उन्होंने कहा कि इसका जवाब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि संसद की कार्यवाही नहीं चल पाने के लिए भी सरकार जिम्मेदार है. प्रियंका ने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि संबंधित मंत्री कब इस्तीफा देंगे और इस पूरे मामले की जवाबदेही कौन लेगा.

प्रियंका गांधी ने पत्रकारों से बाचतीत करते हुए कहा कि क्या आपने अमित शाह से पूछा कि छात्रों पर लाठियां क्यों चलवाईं, बच्चे हॉस्पिटल में क्यों हैं? किसलिए… क्या ये छात्र आतंकवादी हैं? उन्होंने आगे कहा कि जब आप सरकार से ये सवाल करेंगे, तब मैं आपके सवालों का जवाब दूंगी.

वहीं, मक्कल निधि मय्यम (एमएनएम) के संस्थापक और राज्यसभा सांसद कमल हासन ने भी नीट विवाद और छात्रों के आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि जब बच्चे सवाल पूछते हैं तो उन्हें जवाब देने के बजाय बैरिकेड और लाठियां मिलती हैं, जो किसी भी लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है.

कमल हासन ने पूछे सवाल

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखी अपनी पोस्ट में कमल हासन ने कहा, “जब एक बच्चा रोया था, तभी हमें उसकी बात सुननी चाहिए थी. इसके बजाय हमने तब तक इंतजार किया, जब तक हमारे बहुत सारे बच्चों की मौत नहीं हो गई. ऐसा तंत्र, जिसमें सीखने की जगह कोचिंग, जिज्ञासा की जगह बेचैनी और मेधा की जगह अपराध ले लेते हैं, वह पूरी तरह से विफल है.”

उन्होंने आगे कहा कि “देश तब नाकाम हो जाता है, जब बच्चों को जवाब के बजाय बैरिकेड और लाठियां मिलती हैं.” कमल हासन ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अपना अनशन समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि देश को आगे के संघर्ष में उनकी अंतरात्मा की आवाज की जरूरत है.

उन्होंने देश के छात्रों के नाम संदेश देते हुए लिखा, “आप हममें से सबसे बेहतर हैं. आपने अपना फर्ज निभाया है, अब देश की बारी है कि वह आपके प्रति अपना फर्ज निभाए. आपके सपने हमेशा हमारी नाकामियों से बड़े हों.” नीट पेपर लीक और छात्रों के आंदोलन को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है. संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान जारी है, जबकि विपक्ष परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहा है.

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Archana Puran Singh Refused Cooking In Kitchen Before Marrying Parmeet Sethi

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Archana Puran Singh: बॉलीवुड इंडस्ट्री से लेकर टीवी पर मशहूर हो चुके अर्चना पूरन सिंह आज के वक्त में किसी भी पहचान के मोहताज नहीं है। उन्हें कपिल शर्मा शो में जज के तौर पर देखा जाता है। लेकिन वह अपने निजी जिंदगी को लेकर भी काफी चर्चा में रहती हैं।

Archana Puran Singh

अर्चना पूरन सिंह ने अभिनेता परमीत सेठी के साथ में शादी की थी। अब हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अपनी शादी को लेकर खुलासा किया है। उन्होंने बताया है कि जब उनके पति ने उन्हें प्रपोज किया था तो उन्होंने एक खास शर्त रखी थी जिसको वह आज भी फॉलो कर रहे हैं।

किचन में कदम नहीं रखती अर्चना

इंटरव्यू के दौरान अर्चना पूरन सिंह ने बताया कि जब परमीत सेठी ने उन्हें शादी के लिए प्रपोज किया था तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा था कि “मैं कभी भी किचन में नहीं जाऊंगी और बिस्तर पर कभी गीला तौलिया नहीं डालोगे।”

परमीत ने जब साल 2010 में बात और निर्देशक अपनी पहली फिल्म बदमाश कंपनी लिखी थी तो उन्होंने अर्चना पूरन सिंह की इस लाइन का इस्तेमाल शाहिद कपूर और अनुष्का कपूर के सीन में भी किया गया था। अर्चना ने बताया कि मैं आज भी किचन में नहीं जाती हूं।

अर्चना ने चलाया शादी के बाद घर

जानकारी के लिए आपको बता दें कि अर्चना पूरन सिंह का पहला टीवी शो मिस्टर या मिसेज था। जिसमें वह एक कामकाजी महिला का किरदार निभाती है और उनके पति हाउस हस्बैंड थे। ठीक है इसी तरीके से 1992 में जब उन्होंने परमीत सेठी के साथ में शादी की थी तो अर्चना तो पहले से ही इंडस्ट्री में अपनी जगह बना चुकी थी। लेकिन परमीत स्ट्रगल कर रहे थे तो शुरुआती वक्त में अर्चना ही घर चलाया करती थी।

अर्चना का करियर

पिछले कई सालों से वैसे तो अर्चना पूरन सिंह को कपिल शर्मा के शो में ही जज के तौर पर देखा जाता था और वह खूब हंसते हुए भी नजर आती थी। लेकिन अब इससे बाहर निकल कर उन्होंने 2026 में कमबैक किया। नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘टोस्टर’ में वह विलन बनी। अब उन्हें 24 जुलाई को प्राइम वीडियो इंडिया पर आने वाले शो आदर्श बल विद्यालय में एक मैनिपुलेटिव सरकारी अफसर के तौर पर देखा जाएगा।

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केजरीवाल का सवाल- NEET पेपर लीक केस में CBI ने संजीव मुखिया को दी क्लीन चिट? एजेंसी बोली- नहीं मिला सबूत

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NEET-UG 2024 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा बयान जारी करते हुए कहा है कि उसकी जांच में संजीव कुमार उर्फ संजीव मुखिया के खिलाफ कोई ऐसा सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि वह प्रश्नपत्र चोरी या उसे आगे बांटने की साजिश में शामिल था. वहीं, इस बयान के बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

CBI ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि 2024 में बिहार पुलिस ने NEET-UG का प्रश्नपत्र चोरी होने का मामला दर्ज किया था. शुरुआती जांच में संजीव मुखिया पर शक जताया गया, क्योंकि उसका नाम पहले भी अन्य परीक्षा पेपर लीक मामलों में सामने आ चुका था. इसी आधार पर बिहार पुलिस ने उसे FIR में आरोपी बनाया था.

बाद में जांच CBI को सौंपी गई. एजेंसी का दावा है कि उसने पेपर चोरी करने, उसे आगे पहुंचाने और उससे लाभ उठाने वाले सभी लोगों की पहचान कर ली. इस मामले में अब तक 45 आरोपियों के खिलाफ कई चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं.

CBI के अनुसार, विस्तृत जांच और पूछताछ के बावजूद संजीव मुखिया की NEET-UG 2024 पेपर लीक में संलिप्तता का कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिला. इसलिए उसके खिलाफ इस मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं की गई. एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसे NEET मामले में जमानत मिली, लेकिन वह बिहार पुलिस द्वारा दर्ज अन्य मामलों में आरोपी होने के कारण न्यायिक हिरासत में रहा.

CBI ने यह भी कहा कि पूरी साजिश और उसमें शामिल सभी लोगों की पहचान की जा चुकी है तथा यह सुनिश्चित किया गया है कि कोई भी आरोपी कानून की प्रक्रिया से बच न सके. एजेंसी के मुताबिक, यह स्थिति 2024 में ही स्पष्ट कर दी गई थी और अब यह कहना कि संजीव मुखिया का नाम जानबूझकर चार्जशीट से हटाया गया, तथ्यों के आधार पर गलत है.

उधर, CBI के इस स्पष्टीकरण के बाद अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर केंद्र सरकार पर हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि “2024 में NEET का पेपर लीक हुआ. मोदी सरकार ने कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया, लेकिन CBI ने तय समय के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की, जिससे उसे स्वतः जमानत मिल गई. अब CBI ने उसे क्लीन चिट दे दी.” केजरीवाल ने आगे कहा, “आप इससे बच नहीं पाएंगे, क्योंकि आपकी नीयत में खोट है.”

राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि छात्रों का गुस्सा जायज है, लेकिन किसी भी आंदोलन को हिंसक नहीं होना चाहिए. उनके मुताबिक, इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाने चाहिए. उन्होंने कहा कि छात्रों का भरोसा बहाल करना सरकार और संस्थाओं की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है.

वहीं, अभिनव बिंद्रा ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा, “मैंने खुद को कभी राजनीतिक व्यक्ति नहीं माना. लेकिन मेरा मानना है कि कुछ मुद्दे ऐसे होते हैं जो हम सभी के हैं, चाहे हमारी राजनीतिक सोच कुछ भी हो. शिक्षा उन्हीं में से एक है.” उन्होंने कहा कि हर छात्र को यह विश्वास होना चाहिए कि उसकी मेहनत का मूल्यांकन निष्पक्ष होगा. बिंद्रा ने जोर देकर कहा कि देश को ऐसी शिक्षा व्यवस्था की जरूरत है जो पारदर्शी, विश्वसनीय और पूरी तरह योग्यता आधारित हो, ताकि छात्रों का भरोसा फिर से मजबूत हो सके.