1 करोड़ रुपए फीस मांग रहे वकील की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की, पूर्व चीफ जस्टिस के पक्ष में दाखिल याचिका के लिए किया था दावा

1 करोड़ रुपए फीस मांग रहे वकील की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की, पूर्व चीफ जस्टिस के पक्ष में दाखिल याचिका के लिए किया था दावा


केंद्र सरकार से 1 करोड़ रुपए की फीस दिलवाने की मांग कर रहे एक वकील की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है. कोर्ट ने वकील की मांग को गलत धारणा पर आधारित बताया. वकील अशोक पांडे का दावा था कि उन्होंने 2017-18 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के समर्थन में याचिकाएं दायर की थीं. कोर्ट ने कहा कि अगर उन्होंने सामाजिक सेवा समझकर कुछ किया, तो उसकी फीस सरकार से नहीं दिलावाई जा सकती.

अशोक पांडे का दावा था कि उनकी याचिकाओं का उद्देश्य मुख्य न्यायाधीश के पद को अपमान से बचाना था. उन्होंने यह याचिकाएं उस समय दायर की थीं, जब विपक्षी दल राज्यसभा में तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहे थे. वकील का कहना था कि उन्होंने जो किया वह काम केंद्र सरकार के अटॉर्नी जनरल या सॉलिसिटर जनरल को करना चाहिए था.

पिछले साल मार्च में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने भी पांडे की याचिका खारिज कर दी थी. हाई कोर्ट ने कहा था कि सरकार के पास सुप्रीम कोर्ट में अपने हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए वकीलों का अधिकृत पैनल है. न तो पांडे उस पैनल का हिस्सा थे, न ही कानून मंत्रालय ने पांडे से कहा था कि वह इन मामलों को दायर करें इसलिए सरकार से फीस मांगने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता.

हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने से पहले पांडे ने फीस की मांग को लेकर राष्ट्रपति कार्यालय को पत्र लिखा था. राष्ट्रपति कार्यालय ने इस पत्र को मंत्रालय को भेज दिया था. केंद्रीय कानून मंत्रालय ने 26 जुलाई 2024 को यह कहते हुए उनके दावे को खारिज कर दिया कि वह याचिकाएं उन्होंने अपनी इच्छा से दायर की थीं. सरकार ने उनसे ऐसा करने का कोई अनुरोध नहीं किया था.

गुरुवार, 12 मार्च को हुई सुनवाई की शुरुआत में ही चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने यह साफ कर दिया कि वह याचिका को सुनवाई के योग्य नहीं मानती है. इसके बावजूद अशोक पांडे काफी देर तक बहस करते रहे. उन्होंने यह तक कहा कि जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में यह याचिकाएं दाखिल की थीं, तब उनके पास पैसे नहीं थे. उन्होंने अपनी बेटी से दो लाख रूपए उधार लेकर याचिकाएं दाखिल की थीं. आखिरकार जजों के सब्र का बांध टूट गया. चीफ जस्टिस ने कहा, ‘बस बहुत हो चुका. आपकी याचिका खारिज की जा रही है.’

 

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