‘मिस्टर, अदालत को हुक्म न दें कि किस…’, I-PAC रेड केस की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल के वकील को खूब सुनाया

‘मिस्टर, अदालत को हुक्म न दें कि किस…’, I-PAC रेड केस की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल के वकील को खूब सुनाया


सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (18 मार्च, 2026) को पश्चिम बंगाल सरकार के वकील से सख्त लहजे में कहा कि वह अदालत को हुक्म नहीं देंगे कि उसे रिकॉर्ड में मौजूद किस बात पर विचार करना है. सुप्रीम कोर्ट प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस याचिका सुनवाई कर रहा था, जिसमें बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म आईपैक के ऑफिस में ईडी की रेड के दौरान बाधा डाली और सबूत भी नष्ट किए. ईडी ने ममता बनर्जी और बंगाल के टॉप पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सीबीआई जांच की मांग की है.

जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच से बंगाल सरकार ने ईडी की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए थोड़े और समय की मांग की थी. बंगाल सरकार का पक्ष रखने के लिए पेश हुए सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने कहा कि ईडी ने अपने हलफनामे में कुछ नए आरोप लगाए हैं, जिनका जवाब दाखिल करने के लिए उन्हें थोड़ा और समय चाहिए. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईडी ने तो 10 दिन से भी ज्यादा समय पहले ही हलफनामा दाखिल कर दिया था. एसजी तुषार मेहता ने भी इस पर आपत्ति जताई और कहा कि 2 हफ्ते पहले 19 फरवरी को ईडी ने एफिडेविट दाखिल किया था, कम से कम सुनवाई टालने के लिए कोई उचित बहाना तो लाते. 

एसजी तुषार मेहता ने कहा कि हैरानी वाली बात है कि पहले मुख्यमंत्री ने ईडी की जांच में दखलअंदाजी की और अब राज्य सरकार सुनवाई टाले जा रही है. एडवोकेट श्याम दीवान ने कहा कि अभिवेदन पूर्ण होने के बाद ही मामले की कार्यवाही आगे बढ़ाना सही तरीका होगा. कोर्ट ने उनसे पूछा कि क्या वह प्रतिउत्तर दाखिल करना चाहते हैं. कोर्ट ने कहा कि अगर हमें लगा कि मामला सुनवाई योग्य है तो हम गुण-दोष के आधार पर प्रतिवाद दाखिल किए जाने के बजाय एक साथ ही सुनवाई करेंगे.

एडवोकेट श्याम दीवान ने कहा कि मेरे काउंटर के बाद एक प्रतिवाद आया है, अगर इसको देखने की जरूरत है तो. कोर्ट ने इस पर सख्त लहजे में कहा, ‘मिस्टर दीवान, आप हम पर हुक्म नहीं चला सकते कि रिकॉर्ड में मौजूद किस बात पर हमें विचार करना है.’ एडवोकेट श्याम दीवान ने यह भी कहा कि वह असमर्थ महसूस कर रहे हैं क्योंकि उन्हें जवाब दाखिल करने का लाभ नहीं मिल रहा है. कोर्ट ने इस पर कहा कि यहां सुनवाई टलवाने की कोई लड़ाई नहीं चल रही है.

 

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