पांच MLA जीते पर नीतीश कैबिनेट में किसी को नहीं मिली जगह, तब भी खुश क्‍यों हैं मांझी

पांच MLA जीते पर नीतीश कैबिनेट में किसी को नहीं मिली जगह, तब भी खुश क्‍यों हैं मांझी



बिहार विधानसभा चुनाव में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) ने इस बार 6 सीटों पर चुनाव लड़ा और 5 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की. इसके बावजूद पार्टी के किसी भी जीते हुए विधायक को नीतीश कुमार की नई कैबिनेट में जगह नहीं मिली. फिर भी पार्टी प्रमुख जीतन राम मांझी खुश नजर आ रहे हैं और इसकी वजह है उनके बेटे संतोष सुमन का एक बार फिर मंत्री बनना.

HAM के 5 विधायकों की जीत, लेकिन किसी को मंत्री पद नहीं
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा ने इस चुनाव में जो 5 सीटें जीतीं, उनमें शामिल हैं-

  • इमामगंज से दीपा मांझी (जीतन राम मांझी की बहू)
  • कुटुंबा से ललन राम, जिन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम को हराया
  • बाराचट्टी से ज्योति देवी (जीतन राम मांझी की समधन)
  • अतरी से रोमित कुमार
  • सिकंदरा से प्रफुल्ल कुमार मांझी

इन पांचों में से किसी को भी नीतीश सरकार में मंत्री पद नहीं दिया गया है. राजनीतिक गलियारों में इसे बड़ा संकेत माना जा रहा है, लेकिन मांझी गुट में नाराजगी की कोई आवाज नहीं उठी.

संतोष सुमन तीसरी बार मंत्री बने
नीतीश कुमार की नई सरकार में जीते हुए विधायकों को भले ही जगह नहीं मिली, लेकिन जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन एक बार फिर मंत्री बनाए गए हैं. यह उनका तीसरा कार्यकाल होगा. सुमन HAM के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और बिहार विधान परिषद के सदस्य भी.

क्यों अहम हैं संतोष सुमन?
संतोष सुमन पढ़े-लिखे और प्लानिंग के साथ राजनीति करने वाले नेता माने जाते हैं. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया है. वह UGC-NET पास हैं. उन्होंने मगध विश्वविद्यालय से पीएचडी की है. राजनीति में आने से पहले वे लेक्चरर और सोशल वर्कर रहे हैं. उन्होंने मंत्री रहते हुए अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग में कई काम किए. 2023 में उन्होंने नीतीश कैबिनेट से इस्तीफा देकर पार्टी की स्वतंत्र पहचान के मुद्दे पर मजबूत राजनीतिक संदेश भी दिया था.

HAM का छोटा प्रदर्शन, लेकिन बड़ी राजनीतिक भूमिका
हालांकि, 2025 के बिहार चुनाव में HAM का प्रदर्शन बहुत बड़ा नहीं रहा पर राजनीतिक समीकरणों में यह पार्टी बेहद अहम बनकर उभरी. गठबंधन राजनीति में मांझी की भूमिका लगातार बढ़ी है और संतोष सुमन का मंत्री बनना इसका सबसे बड़ा प्रमाण है.