झारखंड टेंडर घोटाला, ED ने कोर्ट में दाखिल की पांचवीं सप्लीमेंट्री चार्जशीट, जोड़े 14 इंजीनियर आरोपी

झारखंड टेंडर घोटाला, ED ने कोर्ट में दाखिल की पांचवीं सप्लीमेंट्री चार्जशीट, जोड़े 14 इंजीनियर आरोपी


झारखंड के चर्चित ग्रामीण कार्य विभाग (Rural Works Department) टेंडर घोटाले में प्रवर्तन (ED) ने 5वीं सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है. ये चार्जशीट 17 मार्च 2026 को रांची की PMLA स्पेशल कोर्ट में दाखिल की. इस नई चार्जशीट में विभाग के 14 इंजीनियरों और अधिकारियों को नए आरोपी के तौर पर जोड़ा गया है. इसके साथ ही इस केस में कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर 36 हो गई है. 

2019 का है पूरा मामला

ये मामला 2019 में दर्ज एक FIR से शुरू हुआ था. जमशेदपुर के एंटी करप्शन ब्यूरो ने FIR दर्ज की थी. आरोप था कि ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर देने के बदले रिश्वत ली जा रही थी. इसी FIR के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर जांच शुरू की. 

टेंडर में कमीशन के खेल की खुली पोल

ED की जांच में सामने आया कि विभाग के अंदर कमीशन लेने का एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था. जांच के मुताबिक जब भी किसी ठेकेदार को टेंडर दिया जाता था तो उससे कुल टेंडर कीमत का करीब 3 प्रतिशत कमीशन लिया जाता था. यह पैसा अलग-अलग स्तर के अधिकारियों में बांटा जाता था.  

90 करोड़ से ज्यादा की अवैध कमाई

कमीशन का बंटवारा इस तरह बताया गया है कि  1.35% हिस्सा तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम को जाता था. ये पैसा उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल के जरिए पहुंचाया जाता था. 0.65% से 1% हिस्सा विभागीय सचिव को मिलता था. बाकी पैसा चीफ इंजीनियर और अन्य इंजीनियरों में बांटा जाता था. ED के मुताबिक इस सिस्टम के जरिए करीब 3048 करोड़ रुपये के टेंडर दिए गए और इससे जुड़ी अवैध कमाई 90 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई है. 

ED ने इन अधिकारियों को बनाया आरोपी

चीफ इंजीनियर (रिटायर्ड) सिंगराय टुटी, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर संतोष कुमार, अजय कुमार, अजय तिर्की, राज कुमार टोप्पो, अशोक कुमार गुप्ता, सिद्धांत कुमार, अनिल कुमार (रिटायर्ड), असिस्टेंट इंजीनियर राम पुकार राम, रमेश ओझा (रिटायर्ड), अन्य अधिकारी उमेश कुमार (पूर्व सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर / इंजीनियर-इन-चीफ) शामिल हैं.

ED 9 लोगों को कर चुकी गिरफ्तार

ED के मुताबिक ये सभी अधिकारी कमीशन इकट्ठा करने, उसे जमा करने और ऊपर तक पहुंचाने की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे. इस मामले की जांच के दौरान ED ने कई बड़ी कार्रवाई की है. अब तक 9 लोगों की गिरफ्तारी कर चुकी है. करीब 44 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई है. लगभग 38 करोड़ रुपये नकद बरामद किया गया है. 8 लग्जरी गाड़ियां भी जब्त की गई है. बरामद नकदी में से 32.20 करोड़ रुपये तत्कालीन मंत्री के निजी सचिव संजीव कुमार लाल से जुड़े ठिकानों से मिले थे. वहीं, 2.93 करोड़ रुपये मुन्ना सिंह के ठिकाने से बरामद हुए थे.  

मामले की जांच जारी

फिलहाल पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल और सहयोगी जहांगीर आलम न्यायिक हिरासत में हैं. ED इस केस में अब तक 1 मेन चार्जशीट, 4 सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर चुकी थी. अब 5वीं सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल होने के बाद जांच और तेज हो गई है. मामले की जांच जारी है.