अगर आप अस्पताल में भर्ती हैं और कोई सफेद एप्रन पहने महिला आकर कहे कि ‘मैं डॉक्टर हूं’ तो जरा सावधान हो जाइए, क्योंकि सिकंदराबाद के यशोदा अस्पताल में जो हुआ वह न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि अस्पताल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है. यहां एक महिला ने डॉक्टर बनकर मरीज को बेहोशी का इंजेक्शन लगाया और उसका 10 तोला सोना लेकर रफूचक्कर हो गई.
घटना यशोदा अस्पताल की है, जहां एक महिला ने डॉक्टरों की तरह एप्रन पहनकर पूरे आत्मविश्वास के साथ मरीज के कमरे में प्रवेश किया. उसने मरीज को इलाज का झांसा देते हुए बेहोशी का इंजेक्शन लगाया. जैसे ही मरीज बेहोश हुआ, महिला ने मरीज के पास रखा करीब 10 तोले सोना उठाया और बिना किसी को कानोंकान खबर हुए अस्पताल से निकल गई. पूरी वारदात इतनी सफाई से अंजाम दी गई कि किसी को भनक तक नहीं लगी.
मरीज को होश आया तो मच गया बवाल
कुछ देर बाद जब मरीज की नींद खुली और परिजनों ने सोना गायब पाया तो हड़कंप मच गया. परिवार ने तुरंत अस्पताल प्रबंधन से उस महिला डॉक्टर के बारे में पूछा और जवाब सुनकर होश उड़ गए. अस्पताल प्रबंधन ने साफ कह दिया कि ऐसी कोई डॉक्टर उनके यहां काम नहीं करती और उन्हें उस महिला के बारे में कोई जानकारी नहीं है. यानी जो महिला इलाज करने आई थी वह अस्पताल की कर्मचारी ही नहीं थी.
मरीज के परिजनों ने पुलिस से की शिकायत
परिजनों ने तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, जिनमें महिला की हरकतें कैद हैं. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह महिला अस्पताल की किसी जानकार की मदद से अंदर आई या फिर बाहरी व्यक्ति है. संदेह है कि इसमें किसी अंदरूनी व्यक्ति का हाथ भी हो सकता है.
यह घटना उन लोगों के लिए एक बड़ा सबक है जो अस्पताल में एप्रन देखकर आंखें मूंद लेते हैं. अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर अगर एक नकली डॉक्टर इतनी आसानी से घुस सकती है तो सवाल उठता है कि मरीजों की सुरक्षा का जिम्मा आखिर कौन ले रहा है?



